फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Isro Fake Spying Case Scientist Nambi Narayanan, Supreme Court says Cbi Needs More Facts

वैज्ञानिक नंबी नारायणन मामला: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- सीबीआई को जांच के लिए अभी और तथ्य जुटाने की जरूरत

Mon, 26 Jul 2021 03:49 PM IST
संजीव कुमार झा पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Mon, 26 Jul 2021 03:49 PM IST
सार

इसरो के वैज्ञानिक नंबी नारायणन को झूठे जासूसी केस में फंसाने के मामले में उच्चतम न्यायालय ने कहा कि एफआईआर दर्ज कर चुकी सीबीआई  को और भी तथ्य जुटाने की जरूरत है।

विज्ञापन
Isro Fake Spying Case Scientist Nambi Narayanan, Supreme Court says Cbi Needs More Facts
नंबी नारायणन (फाइल फोटो)

विस्तार

इसरो के वैज्ञानिक नंबी नारायणन को झूठे जासूसी मामले में फंसाने और प्रताड़ना मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) डीके जैन के नेतृत्व में बनाई गई कमेटी द्वारा दर्ज रिपोर्ट को मुकदमे का आधार नहीं बनाया जा सकता।

विज्ञापन


उच्चतम न्यायालय ने कहा कि इस मामले में एफआईआर दर्ज कर चुकी सीबीआई  को और भी तथ्य जुटाने की जरूरत है। न्यायाधीश ए एम खानविलकर और संजीव खन्ना की पीठ ने कहा कि सिर्फ रिपोर्ट के आधार पर सीबीआई अभियुक्त के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सकती। उन्हें जांच करने के साथ-साथ कागजात जमा करने होंगे और तब जाकर कानून के अनुसार आगे की प्रक्रिया पूरी करेंगे। आखिरकार यह जांच का विषय है जिसे पूरा किया जाना है। बेंच ने कहा कि सुनवाई के दौरान एक अभियुक्त ने निवेदन किया था कि कमेटी की रिपोर्ट को उनके साथ साझा की जाए क्योंकि सीबीआई को उन पर काफी अधिक भरोसा है।  
विज्ञापन

   
बेंच ने कहा कि इस रिपोर्ट से कुछ नहीं बदला जा सकेगा। रिपोर्ट सिर्फ प्रारंभिक सूचना है। आखिरकार सीबीआई ही इसकी जांच करेगी जिसके परिणाम सामने आएंगे। वहीं  इससे पहले सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर इस रिपोर्ट का अंश है। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने पहले ही कहा था कि सिर्फ कमेटी की रिपोर्ट को लोगों के सामने नहीं लाए जा सकते और कानून के अनुसार कार्रवाई करने के लिए अधिकारी स्वतंत्र हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन


वहीं इसके बाद ने उच्चतम न्यायालय ने कहा कि रिपोर्ट कहती है कि सीबीआई ने केस दर्ज कर रखा है लेकिन वह वेबसाइट पर नहीं है। तब मेहता ने कहा कि एफआईआर दर्ज किया गया है और उसकी कॉपी संबंधित अदालत में पेश की जा चुकी है। कोर्ट की इजाजत होगी तो समय के साथ उसे अपलोड किया जाएगा।   

वर्ष 2018 में कमेटी का किया गया था गठन
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 14 सितंबर 2018 को कमेटी का गठन किया था और केरल सरकार से कहा था कि नारायणन के अपमान के मामले में उन्हें 50 लाख रुपये मुआवजा दिया जाए। 79 वर्षीय नारायणन को मामले में बरी कर दिया गया था।

 
जानिए क्या है मामला
यह मामला वर्ष 1994 का है। इसमें आरोप है कि कुछ गोपनीय दस्तावेज अन्य देश के लोगों को सौंपा गया था। इस मामले में वैज्ञानिक नारायणन को गिरफ्तार किया गया था। बाद में सीबीआई ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा था कि नारायणन की अवैध गिरफ्तारी थी और केरल के तत्कालीन आला पुलिस अधिकारी इसके लिए जिम्मेदार हैं। इस मामले ने राजनीति जगत में भी विवाद खड़ा कर दिया था और तत्कालीन मुख्यमंत्री को इस्तीफा देना पड़ा था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed