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चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर ने लैंडर विक्रम का पता लगाया, संपर्क साधने की कोशिश में इसरो

Sun, 08 Sep 2019 02:46 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू Published by: Sneha Baluni Updated Sun, 08 Sep 2019 02:46 PM IST
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ISRO Chief K Sivan to says We have found location of Vikram Lander on lunar surface
चंद्रयान- 2 - फोटो : PTI

इसरो के वैज्ञानिकों को चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम की लोकेशन मिल गई है। लैंडर विक्रम चांद की सतह पर अपनी निर्धारित लोकेशन से पांच सौ मीटर की दूरी पर दिखाई दिया है। चांद के चक्कर काट रहे ऑर्बिटर ने लैंडर की थर्मल तस्वीर भेजी है। यह जानकारी खुद इसरो अध्यक्ष के सिवन ने देशवासियों को दी है। फिलहाल लैंडर से संपर्क स्थापित नहीं हो पाया है लेकिन उससे संपर्क करने की कोशिशें लगातार जारी हैं। इसरो अध्यक्ष ने कहा कि जल्द ही लैंडर से संपर्क कर लिया जाएगा। अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगा। 

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शुक्रवार-शनिवार की दरमियानी रात को चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग के समय इसरो का लैंडर विक्रम से संपर्क टूट गया था। 13 मिनट 48 सेकेंड तक सारी प्रक्रिया इसरो के वैज्ञानिकों के अनुसार चल रही थी। अचानक से आखिरी के डेढ़ मिनट में इसरो के कंट्रोल रूम से इसका संपर्क टूट गया। जिसके बाद वैज्ञानिकों के चेहरे पर मायूसी छा गई थी। वह काफी देर तक लैंडर से संपर्क साधने की कोशिश करते रहे लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ था।

कुछ देर बाद के सिवन ने बयान जारी करते हुए बताया था कि चांद की सतह से 2.1 किलोमीटर पहले विक्रम लैंडर से हमारा संपर्क टूट गया। वैज्ञानिक फिलहाल आंकड़ों का अध्ययन करने में लगे हुए हैं। सॉफ्ट लैंडिंग के महत्वपूर्ण पलों का गवाह बनने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसरो के बंगलूरू स्थित मुख्यालय पहुंचे थे। उनके साथ भारत के चंद्र मिशन के इतिहास का गवाह बनने के लिए देशभर से चुने हुए बच्चे भी मौजूद थे। 

हालांकि जब वैज्ञानिकों का लैंडर से संपर्क तब वैज्ञानिकों को हिम्मत देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा था कि आपने जो किया, वह कम बड़ी उपलब्धि नहीं है। जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। वैज्ञानिकों का हौसला बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि आप छोटी-छोटी गलतियों से सीखते हैं। आपने देश की और मानव जाति की बड़ी सेवा की है। हम आशान्वित हैं और अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम पर कड़ी मेहनत करना जारी रखेंगे।

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लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान - फोटो : AmarUjala

पूर्व वैज्ञानिक ने नकारी थी लैंडर विक्रम के क्रैश होने की बात

इसरो के पूर्व वैज्ञानिक डी ससीकुमार ने शनिवार को कहा था कि चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर से संपर्क क्रैश लैंडिंग के कारण नहीं टूटा होगा। उन्होंने कहा था, 'मुझे लगता है, ये क्रैश लैंडिंग नहीं थी क्योंकि लैंडर और ऑर्बिटर के बीच का संपर्क चैनल अब भी चालू है।' ससीकुमार ने आगे बताया था कि जो संपर्क डाटा खो गया है उसका फिलहाल विश्लेषण किया जा रहा है। चंद्रयान-2 के तीन हिस्से हैं। पहला ऑर्बिटर, दूसरा लैंडर विक्रम और तीसरा रोवर प्रज्ञान। लैंडर-रोवर को दो सिंतबर को ऑर्बिटर से अलग किया गया था। ऑर्बिटर इस समय चांद से करीब 100 किलोमीटर ऊंची कक्षा में चक्कर लगा रहा है।

के सिवन ने अभियान को बताया था 95 प्रतिशत सफल

इसरो प्रमुख के सिवन ने शनिवार को चंद्रयान-2 मिशन को 95 फीसदी सफल बताया था। डीडी न्यूज से बातचीत में सिवन ने कहा था कि विक्रम लैंडर से संपर्क करने की कोशिश जारी है। उन्होंने कहा था कि विक्रम लैंडर से दोबारा संपर्क बनाने के लिए प्रयास जारी हैं। हम अगले 14 दिन तक इसके लिए कोशिश करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि आखिरी चरण ठीक से पूरा नहीं किया जा सका, उसी चरण में हमने विक्रम से संपर्क खो दिया। चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर 7.5 साल तक काम कर सकता है।

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नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

प्रधानमंत्री ने बढ़ाया था वैज्ञानिकों का हौसला

लैंडर विक्रम से संपर्क टूटने के बाद निराश वैज्ञानिकों का हौसला बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार सुबह उन्हें संबोधित करते हुए कहा था कि विज्ञान में असफलता नहीं होती बल्कि प्रयास और प्रयोग होते हैं। विज्ञान परिणामों से कभी संतुष्ट नहीं होता है। उन्होंने कहा था, 'विज्ञान में हर प्रयोग हमें अपने असीम साहस की याद दिलाता है। चंद्रयान-2 के अंतिम पड़ाव का परिणाम हमारी आशा के अनुसार नहीं रहा लेकिन पूरी यात्रा शानदार रही है। हमारे चंद्रयान ने दुनिया को चांद पर पानी होने की अहम जानकारी दी। इस पूरे मिशन के दौरान देश कई बार आनंदित हुआ है। अभी भी ऑर्बिटर पूरी शान से चंद्रमा के चक्कर लगा रहा है। आप मक्खन पर नहीं बल्कि पत्थर पर लकीर लिखने वाले हैं। पहली बार मे मंगल पर पहुंचने वाले वाले आप ही हैं। मैं यहां आपसे प्रेरणा लेने आया हूं। आपकी आंखों में प्रेरणा का समुंदर है।'

नासा सहित कई देशों ने की थी इसरो की तारीफ

पूरी दुनिया ने इसरो के जज्बे की तारीफ की थी। दुनिया की सबसे बड़ी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने भविष्य में इसरो के साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताई थी। ऐसा ही कुछ संयुक्त अरब अमीरात की अंतरिक्ष एजेंसी ने भी कहा था। यूएई की अतंरिक्ष एजेंसी ने कहा था कि चांद पर उतरने जा रहे चंद्रयान 2 से संपर्क भले टूट गया हो लेकिन इसरो को हमारा पूर्ण समर्थन है। भारत ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में खुद को एक रणनीतिक खिलाड़ी के तौर पर साबित किया है और इसके विकास और उपलब्धियों में भागीदार है। वहीं नासा ने कहा था कि अंतरिक्ष एक कठोर जगह है। हम इसरो के मिशन चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-2 को उतारने के प्रयास की सराहना करते हैं। आपने अपनी इस यात्रा से हमें भी प्रेरित किया है और हम भविष्य में साथ मिलकर अपने सौर मंडल के नए आयामों को खोजने के अवसरों को लेकर उत्साहित हैं।

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