मोसाद ने ईरान के घुसकर निकाले थे गोपनीय परमाणु दस्तावेज, साढ़े छह घंटे में लाए 5 क्विंटल दस्तावेज
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इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने इस साल जनवरी में ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी फाइलों को चुरा लिया। अमरीकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने इजराइली खुफिया एजेंसी मोसाद द्वारा की गई एक बड़ी चोरी का खुलासा किया है। न्यूयॉर्क टाइम्स की खबर के अनुसार, मोसाद ने 31 जनवरी को इस ऑपरेशन को अंजाम दिया। मोसाद के एजेंटों ने तेहरान के औद्योगिक क्षेत्र में एक वेयरहाउस में सेंध लगाई और सुबह सात बजे की शिफ्ट शुरू होने से पहले छह घंटे 29 मिनट में अपना काम पूरा कर लिया।
एक साल तक गोदाम की निगरानी करने के बाद इजरायल को यह पता लग गया था कि ईरानी गार्ड मॉर्निंग शिफ्ट में सुबह 7 बजे आते हैं। ऐसे में एजेंट्स को स्पष्ट आदेश दिए गए थे कि वे सुबह 5 बजे तक किसी भी कीमत पर गोदाम से निकल जाएं, ताकि उनके पास भागने के लिए पर्याप्त समय रहे।
मोसाद के एजेंट सीमा की तरफ भागे और अपने साथ 50 हजार पन्ने, 163 मेमोज वाली कॉम्पैक्ट डिस्क, विडियो और प्लान ले गए। ऑपरेशन अवधि में उन्होंने वेयरहाउस के अलार्म को बंद कर दिया, दो दरवाजों को तोड़ा, दर्जनों तिजोरियों के दरवाजों को जलाकर खोला और कई सीडी, दस्तावेज लेकर निकल गए। मोसाद ने सिर्फ साढ़े छह घंटे में ईरान के एटमी प्रोग्राम से जुड़े करीब 5 क्विंटल दस्तावेज चुरा लिए। इन्हीं दस्तावेज के आधार पर इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान पर परमाणु समझौते के उल्लंघन के आरोप लगाए थे।
माना जा रहा है कि एटमी प्रोग्राम से जुड़े किसी शख्स ने इसराईल की मदद की है। इस शख्स ने मोसाद को बताया कि कौन सी तिजोरी काटनी है। वेयरहाउस में सैकड़ों तिजोरियां थीं, जिन्हें छुआ भी नहीं गया। मोसाद के एजेंट्स के पास आग लगाने वाली ऐसी टॉर्चें थीं जो 2000 डिग्री सेल्सियस की गर्मी पैदा कर आग लगा सकती हैं। इनकी सहायता से उन्होंने तिजोरियों के दरवाजों को जला दिया। ऑपरेशन के दौरान मोसाद ने सिर्फ उन्हीं तिजोरियों को खोला जिनमें परमाणु कार्यक्रम के कागजात रखे थे। जिन तिजोरियों में ऐसे कागजात नहीं थे उन्हें छुआ भी नहीं गया।
2015 में हुए ईरान परमाणु समझौते से ट्रंप को बाहर हो जाना चाहिए- नेतन्याहू
अप्रैल के आखिर में इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप को जानकारी देने के बाद इस चोरी से मिले परिणामों के बारे में घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह एक और कारण है जिसकी वजह से ट्रंप को साल 2015 में हुए ईरान परमाणु समझौते से बाहर हो जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि इन दस्तावेजों से ईरान की धोखाधड़ी और उसके दोबारा बम बनाने का इरादा साफतौर पर दुनिया के सामने है।
कुछ दिन बाद, ट्रंप ने ईरान समझौते से अलग होने का ऐलान कर दिया। यह एक ऐसा कदम था जिसके बाद अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों के रिश्तों में भी तनाव आ गया। ईरान ने 2015 में अमेरिका, यूरोपीय यूनियन, रूस और चीन के साथ परमाणु समझौते के बाद इस वेयरहाउस में दस्तावेज जमा करना शुरू किया था। इस समझौते की वजह से ही संयुक्त राष्ट्र ईरान की संदिग्ध परमाणु कार्यक्रमों की जगह पर पहुंच पाया था।
खबर के अनुसार इजराइली अधिकारियों ने बताया कि ईरान को पाकिस्तान और बाकी विदेशी जानकारों से परमाणु कार्यक्रम के लिए मदद मिली थी। इजराइल ने पिछले सप्ताह पश्चिमी देशों की मीडिया को इस बारे में सूचना दी थी। साथ ही चुराए गए दस्तावेजों की जानकारियां भी साझा की गई थी। वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान ने जब परमाणु कार्यक्रम रोका था तब वह 'बम बनाने की महत्वपूर्ण तकनीक' को हासिल करने के करीब था।
न्यूक्लियर इंजिनियर और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के पूर्व इंस्पेक्टर रॉबर्ट केली ने कुछ दस्तावेजों को देखने के बाद कहा इन दस्तावेजों से यह साफ पता लगता है कि ये लोग परमाणु बम बनाने के लिए काम कर रहे हैं। अभी तक इन दस्तावेजों की सत्यता की पुष्टि नहीं की जा सकी है। इनमें से कई दस्तावेज तो 15 साल तक पुराने हैं। इजरायलियों ने यह दस्तावेज रिपोर्टर्स को दिखाते समय यह भी कहा कि कुछ पन्ने इसलिए सार्वजनिक नहीं किए जा रहे हैं ताकि किसी और के पास परमाणु हथियार बनाने से संबंधित जानकारी न पहुंचे।
अमेरिकी और ब्रिटिश खुफिया एजेंसियों ने कहा, असली डॉक्युमेंट्स हैं
उधर, ईरान का कहना है कि यह पूरी कहानी फर्जी है। जबकि कुछ ईरानियों का कहना है कि यह सबकुछ इजरायल जानबूझकर कर रहा है जिससे उनके देश पर दोबारा प्रतिबंध लगा दिए जाए। हालांकि अमेरिकी और ब्रिटिश खुफिया अधिकारियों ने इन दस्तावेजों को देखने और कुछ पुराने दस्तावेजों से तुलना करने के बाद माना है कि ये असली डॉक्युमेंट्स हैं। इजरायल ने जिन पत्रकारों को ये रिपोर्ट्स दिखाई, उनमें वॉशिंगटन पोस्ट और वॉल स्ट्रीट जर्नल के पत्रकार भी शामिल हैं। इसके आधार पर कहा गया है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम स्पष्टतौर पर विशालकाय हथियार बनाने पर केंद्रित है। इसके अलावा 2003 में जब प्रॉजेक्ट अमद को खत्म करने की घोषणा की गई, उसकी तुलना में यह काफी सुनियोजित है।
इन दस्तावेजों के अनुसार ईरानी मिसाइल शहाब-3 के वॉरहेड के तौर पर परमाणु हथियार तैयार किया जाना बड़ी चुनौती है। एक दस्तावेज से परमाणु परीक्षणों के लिए संभावित अंडरग्राउंड साइट की भी जानकारी दी गई है। इसमें स्पष्ट जानकारी दी गई है कि ईरान पहले बैच में पांच हथियार बनाएगा। हालांकि अब तक कोई नहीं बना क्योंकि उन्हें डर था कि वे पकड़े जाएंगे या अमेरिकी और इजरायली खुफिया एजेंसियां उनकी कोशिशों पर पानी फेर सकती हैं।
पूर्व इंस्पेक्टर और इंस्टिट्यूट फॉर साइंस ऐंड इंटरनेशनल सिक्यॉरिटी संचालित करनेवाले डेविड अलब्राइट ने एक साक्षात्कार में कहा कि इन दस्तावेजों में 'महत्वपूर्ण जानकारी' है। पिछले महीने उन्होंने कांग्रेस को बताया, 'पहले से हमें जैसी जानकारी है, ईरान ने परमाणु हथियारों को बनाने से संबंधित उससे कहीं ज्यादा शक्तिशाली परीक्षण किए हैं।' इजरायल दावा करता रहा है कि 2003 के बाद भी ईरान का कार्यक्रम जारी रहा। दस्तावेजों से यह भी पता चलता है कि ईरान के इस कार्यक्रम में शामिल कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की कथिततौर इजरायली एजेंट्स ने हत्या कर दी थी।