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Israel-Hamas War: हमास हमले के बीच इस्राइल में फंसी भारतीय प्रोफेसर, घर वापसी के लिए पति ने की सरकार से गुहार
Sat, 14 Oct 2023 01:48 PM IST
श्वेता महतो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुचिरापल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुचिरापल्ली
Published by: श्वेता महतो
Updated Sat, 14 Oct 2023 01:48 PM IST
सार
टीएनएयू के एसोसिएट प्रोफेसर एवं विभाग के प्रमुख टी रमेश ने बताया कि उनकी पत्नी राधिका दक्षिणी इस्राइल के क्षेत्र द नेगेव में हैं, जो गाजा के बहुत करीब है।
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Israel Hamas War
- फोटो : Social Media
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विस्तार
तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली जिले के तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय (टीएनएयू) की एक एसोसिएट प्रोफेसर दो महीने के प्रशिक्षण कार्यक्रम पर इजराइल गई थीं और हमास द्वारा इस्राइल पर किए हमले के बाद वहीं फंस गई। उन्होंने स्वदेश वापस आने के लिए मदद की गुहार की है। उनके पति टी रमेश ने इस बात बात की जानकारी है।
टीएनएयू के एसोसिएट प्रोफेसर एवं विभाग के प्रमुख टी रमेश ने बताया कि उनकी पत्नी राधिका दक्षिणी इस्राइल के क्षेत्र द नेगेव में हैं, जो गाजा के बहुत करीब है। उन्होंने कहा कि शनिवार को बमबारी से पहले सायरन की आवाज सुनने के बाद राधिका को तीन दिनों तक एक आश्रय स्थल में शरण लेनी पड़ी और वह इजराइल सरकार की घोषणा के बाद नेगेव लौट आई। रमेश ने कहा कि उन्हें व्हाट्सएप के जरिए अपनी पत्नी के फंसे होने के बारे में पता चला था।
टी रमेश ने कहा, 'राधिका फिलहाल सुरक्षित है। उन्हें भोजन और पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। वह अपने घर वापस लौटना चाहती है। हमारा 13 वर्षीय बेटा भी अपनी मां को सुरक्षित घर वापस देखना चाहता है।'
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राधिका, बेन-गुरियन विश्वविद्यालय में भारत सरकार द्वारा प्रायोजित दो महीने के प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल होने के लिए 23 सितंबर को इजराइल रवाना हुई थीं। इस्राइल-हमास के युद्ध के बाद से ही रमेश और उनकी पत्नी दोनों तमिलनाडु सरकार के संपर्क में हैं। उन्होंने बताया कि भारतीय दूतावास उनकी पत्नी से लगातार संपर्क में हैं। भारत सरकार ने इस्राइल में फंसे भारतीय नागरिकों को वापस लाने के लिए "ऑपरेशन अजय" शुरू किया। इसके तहत 12 अक्तूबर को 21 लोग तो वहीं 14 अक्तूबर को 250 से ज्यादा लोग भारत वापस आए।
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टीएनएयू के एसोसिएट प्रोफेसर एवं विभाग के प्रमुख टी रमेश ने बताया कि उनकी पत्नी राधिका दक्षिणी इस्राइल के क्षेत्र द नेगेव में हैं, जो गाजा के बहुत करीब है। उन्होंने कहा कि शनिवार को बमबारी से पहले सायरन की आवाज सुनने के बाद राधिका को तीन दिनों तक एक आश्रय स्थल में शरण लेनी पड़ी और वह इजराइल सरकार की घोषणा के बाद नेगेव लौट आई। रमेश ने कहा कि उन्हें व्हाट्सएप के जरिए अपनी पत्नी के फंसे होने के बारे में पता चला था।
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टी रमेश ने कहा, 'राधिका फिलहाल सुरक्षित है। उन्हें भोजन और पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। वह अपने घर वापस लौटना चाहती है। हमारा 13 वर्षीय बेटा भी अपनी मां को सुरक्षित घर वापस देखना चाहता है।'
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राधिका, बेन-गुरियन विश्वविद्यालय में भारत सरकार द्वारा प्रायोजित दो महीने के प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल होने के लिए 23 सितंबर को इजराइल रवाना हुई थीं। इस्राइल-हमास के युद्ध के बाद से ही रमेश और उनकी पत्नी दोनों तमिलनाडु सरकार के संपर्क में हैं। उन्होंने बताया कि भारतीय दूतावास उनकी पत्नी से लगातार संपर्क में हैं। भारत सरकार ने इस्राइल में फंसे भारतीय नागरिकों को वापस लाने के लिए "ऑपरेशन अजय" शुरू किया। इसके तहत 12 अक्तूबर को 21 लोग तो वहीं 14 अक्तूबर को 250 से ज्यादा लोग भारत वापस आए।