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RBI और सरकार का बड़ा फैसला, देश में नहीं खुलेगा इस्लामिक बैंक
एजेंसी/ नई दिल्ली
Updated Sun, 12 Nov 2017 07:13 PM IST
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भारतीय रिजर्व बैंक
- फोटो : WordPress
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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने देश में इस्लामिक बैंकिंग शुरू करने के प्रस्ताव को आगे नहीं बढ़ाने का अहम फैसला लिया है। सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत एक सवाल के जवाब में केंद्रीय बैंक ने कहा कि देश में बैंकिंग व वित्तीय सेवाओं का इस्तेमाल करने के लिए देश के सभी नागरिकों को व्यापक व समान मौका मिलता है, जिस पर विचार करते हुए यह फैसला लिया गया है।
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इस्लामिक या शरिया बैंकिंग एक वित्तीय प्रणाली है, जो ब्याज न देने के सिद्धांत पर आधारित है, क्योंकि इस्लाम में ब्याज हराम माना जाता है। भारत में इस्लामिक बैंकिंग शुरू करने के मुद्दे पर आरबीआई तथा सरकार ने गौर किया।
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आरबीआई से भारत में इस्लामिक या ‘ब्याज मुक्त’ बैकिंग व्यवस्था के लिए उठाए गए कदमों का विवरण मुहैया कराने के लिए कहा गया था। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सभी परिवारों के व्यापक रूप से वित्तीय समावेशन के लिए एक राष्ट्रीय मिशन के रूप में 28 अगस्त, 2014 को ‘जन धन योजना’ की शुरुआत की थी।
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पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने दिया था सुझाव
आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन के नेतृत्व में वित्तीय क्षेत्र में सुधार पर गठित एक कमेटी ने साल 2008 में देश में ब्याज-मुक्त बैकिंग के मुद्दे पर गौर करने की जरूरत पर बल दिया था।
कमेटी ने कहा था कि कुछ मजहब ब्याज देने वाले वित्तीय संस्थान का इस्तेमाल करने से उन्हें रोकते हैं। ब्याज मुक्त बैंकिंग की व्यवस्था न होने से वे बैंकिंग उत्पादों व सेवाओं का इस्तेमाल करने अक्षम हैं, क्योंकि उनका धर्म उन्हें ब्याज वाली व्यवस्था का इस्तेमाल करने से रोकता है।
बाद में, केंद्र सरकार के निर्देश पर आरबीआई के तहत एक अंतर-विभागीय समूह (आईडीजी) का गठन किया गया, जिसने देश में ब्याज मुक्त बैंकिंग व्यवस्था शुरू करने के मुद्दे के कानूनी, तकनीकी तथा नियामक पहलू पर विचार करते हुए अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी।