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भारत के वन क्षेत्र में दो साल में हुआ 5,188 वर्ग किलोमीटर का इजाफा

Tue, 31 Dec 2019 12:09 AM IST
अनवर अंसारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अनवर अंसारी Updated Tue, 31 Dec 2019 12:09 AM IST
सार

  • भारत में जंगलों की स्थिति रिपोर्ट 2019 में दावा, हर दो साल में होता है सर्वे
  • केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने जारी की रिपोर्ट, बताया अच्छा संकेत
  • पूर्वोत्तर राज्यों में 765 वर्ग किमी जंगल घटने पर केंद्रीय मंत्री ने जताई चिंता
  • 7,12,149 वर्ग किमी के साथ भारत की 21.67 प्रतिशत भूमि पर वन आवरण

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ISFR Environment Minister Prakash Javadekar ,Green area increased by five thousand square kilometers
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर - फोटो : ट्विटर

विस्तार

देश में जंगलों का क्षेत्रफल बीते दो साल में 5,188 वर्ग किमी बढ़ा है। इसमें 3,976 वर्ग किमी वन आवरण और 1,212 वर्ग किमी वृक्ष आवरण है। साथ ही जंगलों में कार्बन स्टॉक 4.26 करोड़ टन बढ़ा है, जो वातावरण से कार्बन घटाने में काम आता है। 

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वहीं मेंग्रोव (समुद्र के खारे पानी में पनपे सदाबहार वन) की संख्या 54 वर्ग किमी बढ़ी है। इसमें दो वर्ष में 1.10 प्रतिशत वृद्धि आई है। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर द्वारा सोमवार को जारी भारत में जंगलों की स्थिति पर 2019 की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।
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भारतीय वन सर्वेक्षण द्वारा तैयार की गई इस रिपोर्ट को अच्छा संकेत बताते हुए जावड़ेकर ने कहा कि भारत आज पेरिस समझौते के लक्ष्यों की ओर बढ़ रहा है। साथ ही उन्होंने चिंता भी जताई कि पूर्वोत्तर में 765 वर्ग किमी के जंगल घटे हैं। असम और त्रिपुरा के अलावा यहां के सभी राज्यों में वनक्षेत्र कम हुआ है। 
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बता दें कि हर दो वर्ष में सर्वे के जरिए वन संसाधनों का आकलन होता है। 1987 से अब तक 16 दफा यह रिपोर्ट जारी हुई है। सर्वे में एक हैक्टेयर से बड़े ऐसे सभी क्षेत्रों को जंगल के रूप में दर्ज किया गया, जहां 10 प्रतिशत से अधिक जमीन पर वृक्ष आवरण है। 

इसमें वन क्षेत्र के साथ किस भी श्रेणी में उपयोग हो रही, किसी भी तरह के मालिकाना हक और किसी भी तरह के वृक्षों वाली भूमि को भी शामिल किया गया। रिपोर्ट के आधार पर सरकार वनों से जुड़ी योजनाएं और नीतियां बनाती है। 

तीन वर्गों में बांटे वन

रिपोर्ट में जंगलों को तीन वर्गों में रखा गया। जहां वृक्ष आवरण का घनत्व 70 प्रतिशत से अधिक है, उन्हें बेहद घने वन, जहां आवरण 40 से 70 प्रतिशत है उन्हें मध्यम घने वन और जहां आवरण 10 से 40 प्रतिशत है, उन्हें खुले वन का नाम दिया गया। उपग्रहों से मिले डाटा से आकलन हुआ, जो 23.5 मीटर तक के सूक्ष्म क्षेत्रफल का विश्लेषण कर सकता है। आंकड़ों की पुष्टि के लिए 2200 जगहों पर जाकर रिपोर्ट ली गई।

भारत और जंगल : वे अहम बातें जो सभी को जाननी चाहिए

कुल वन आवरण

7,12,149 वर्ग किमी के साथ भारत की 21.67 प्रतिशत भूमि पर वन आवरण है। 2017 में यह 7,082,73 वर्ग किमी यानी करीब 21.54 प्रतिशत था।

वृक्षों की छांव से और बढ़ा जंगल

95,027 वर्ग किमी यानी करीब 2.89 प्रतिशत भारत भूमि वृक्षों की छांव में है। इस वृक्ष आवरण को वन आवरण के साथ मिला दें तो यह 8,07,276 वर्ग किमी यानी देश का 24.56 प्रतिशत हिस्सा हो जाता है।

लेकिन वन क्षेत्र में घटी हरियाली

चिंताजनक तथ्य यह भी है कि आरक्षित वन क्षेत्र का वन आवरण 330 वर्ग किमी यानी करीब 0.05 प्रतिशत घटा। वन क्षेत्रों में आने वाले जनजातीय जिलों में भी 741 वर्ग किमी वन आवरण कम हुआ। हालांकि आरक्षित वन क्षेत्रों के बाहर वन आवरण 4306 वर्ग किमी बढ़ा है।
 

जंगल बढ़ाने में दक्षिण भारत आगे, कर्नाटक सबसे आगे

वनों को बचाने में दक्षिण भारतीय राज्यों ने देश के बाकी हिस्सों के लिए नजीर कायम की है। 1025 वर्ग किमी के साथ कर्नाटक ने देश में सबसे अधिक वन आवरण की वृद्धि की मिला। इसके बाद आंध्र प्रदेश 990 वर्ग किमी, केरल 823 वर्ग किमी, जम्मू कश्मीर 371 वर्ग किमी और हिमाचल प्रदेश 334 वर्ग किमी के साथ रहे।

और यहां घटे जंगल

अरुणाचल प्रदेश में 66,688 वर्ग किमी जंगल हैं जो 2017 के मुकाबले 276 वर्ग किमी कम हैं। इसी प्रकार मणिपुर में 16,847 वर्ग किमी जंगल हैं, जो पिछली बार से 499 वर्ग किमी कम हुआ। मिजोरम में 180 वर्ग किमी, मेघालय में 27, सिक्किम में दो और नागालैंड में भी तीन वर्ग किमी जंगल घटा।

यहां सबसे ज्यादा

देश में सबसे ज्यादा 77482 वर्ग किमी जंगल मध्यप्रदेश में है। इसके बाद अरुणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़ 55,611 वर्ग किमी, ओडिशा 51,619, महाराष्ट्र 50,778 और कर्नाटक 38,575 वर्ग किमी के साथ आते हैं।

पहाड़ी जिलों में 40 प्रतिशत जंगल

2,84,006 वर्ग किमी के साथ देश के 140 पहाड़ी जिलों का कुल 40.30 प्रतिशत हिस्सा वन आवरण के रूप में रिपोर्ट में दर्ज हुआ है। इन जिलों की हरियाली में 0.19 वृद्धि भी हुई है।

जनजातीय जिलों में 37 प्रतिशत जंगल

देश के जंगल जनजातीय जिलों में सुरक्षित रहे। यहां 4,22,351 वर्ग किमी में जंगल हैं, जो इन जिलों के क्षेत्रफल का करीब 37.54 प्रतिशत यानी देश के औसत से बहुत ज्यादा है।

पूर्वोत्तर में 65 प्रतिशत जंगल, लेकिन घटे भी

देश के पूर्वोत्तर राज्यों का 1,70,541 वर्ग किमी क्षेत्र वन आवरण में है। यह इन क्षेत्रों का 65.5 प्रतिशत है। हालांकि इसमें 765 वर्ग किमी की गिरावट भी आई है।

कार्बन स्टॉक सवा चार करोड़ टन बढ़ा

देश में कार्बन स्टॉक 712.6 करोड़ टन दर्ज हुआ है। इसमें 2017 के मुकाबले 4.26 करोड़ टन वृद्धि हुई हैै। कार्बन स्टॉक के मायने हैं कि जंगलों द्वारा कितनी कार्बन को जैविक पदार्थों में बदला जा रहा है। यह प्रक्रिया वातावरण से बढ़े कार्बन उत्सर्जन को घटाने में मदद करती है।

गुजरात, में सबसे ज्यादा वेटलैंड

देश के आरक्षित जंगलों में 3.83 प्रतिशत भूमि वेट लैंड है। कुल 62,466 वेटलैंड यहां मिले हैं। इनमें से सर्वाधिक 8.13 प्रतिशत गुजरात में हैं।

21 प्रतिशत जंगलों पर दावानल का खतरा

भारत के 21.40 प्रतिशत जंगलों को आग के खतरे की जद में भी यह रिपोर्ट बता रही है। पांच गुणा पांच वर्ग किमी की ग्रिड में जंगलों को बांटकर किए आकलन के अनुसार यहां आग लगने के जोखिम अधिक हैं।

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