फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Is Modi Government planning to make new Jammu Kashmir, what symbols say

क्या नए जम्मू-कश्मीर की जमीन तैयार हो रही है, मोदी सरकार से मिल रहे संकेतों का क्या मतलब?

Tue, 30 Jul 2019 08:38 PM IST
Gaurav Pandey जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली Published by: Gaurav Pandey Updated Tue, 30 Jul 2019 08:38 PM IST
विज्ञापन
Is Modi Government planning to make new Jammu Kashmir, what symbols say
जम्मू-कश्मीर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

जम्मू-कश्मीर में आजकल क्या हो रहा है और भविष्य में क्या कुछ हो सकता है, इस तरह के कुछ सवाल सभी के जेहन में घूम रहे हैं। ऐसी आवाजें आ रही हैं कि मोदी सरकार अनुच्छेद 35-ए का कुछ करने जा रही है। इस पर राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती भी आगबबूला हैं। अलगाववादी भी कह रहे हैं कि अगर इस अनुच्छेद को खत्म किया गया तो घाटी में विद्रोह हो जाएगा। 

विज्ञापन


इन सबके बीच मंगलवार को दिल्ली में जम्मू-कश्मीर भाजपा के कोर ग्रुप की बैठक बुलाई गई। सुरक्षा बलों की स्थिति को देखें तो राज्य में इनकी संख्या एक लाख के पार पहुंच गई है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या ये सब नए जम्मू-कश्मीर के लिए जमीन तैयार करने के लिए उठाए जा रहे कदम हैं। जुलाई में ही कई ऐसे घटनाक्रम हुए हैं, जो इशारा करते हैं कि वहां कुछ तो हो रहा है।

विज्ञापन

जम्मू-कश्मीर पर लगातार नजर रख रहा गृह मंत्रालय

मार्च में केंद्र सरकार ने मल्टी डिसिप्लिनरी टेरर मॉनीटरिंग ग्रुप (एमडीटीएमजी) का गठन किया था। इसका मकसद जम्मू-कश्मीर में आतंकियों को मिलने वाली वित्तीय मदद को रोकना और उनकी गतिविधियों पर नजर रखना था। गृह मंत्रालय के निर्देशन में काम करने वाले इस ग्रुप में जम्मू-कश्मीर पुलिस, आईबी, सीबीआई, एनआईए, इनकम टैक्स और ईडी जैसी एजेंसियों को शामिल किया गया था।

जम्मू-कश्मीर में एडीजी स्तर के एक अधिकारी सप्ताह में इस समूह की बैठक लेते हैं। इस समूह की मदद से आतंकियों को किसी भी तरह की मदद पहुंचाने वाले जैसे शिक्षक, राजस्व विभाग के कर्मी, स्थानीय नेता, अलगाववादी या कोई अन्य संस्थाओं पर दबिश दी जा रही है। एनआईए दो माह से लगातार छापेमारी कर रही है। केंद्रीय गृह मंत्रालय में ज्वाइंट डायरेक्टर स्तर के अधिकारी रोजाना इस ग्रुप की गतिविधि पर नजर रख रहे हैं।

हर छोटी-बड़ी सूचना को आईबी के मल्टी एजेंसी सेंटर में साझा करने के अलावा गृह मंत्री अमित शाह को भी उससे अवगत कराया जा रहा है। इस ग्रुप में अब निचले स्तर तक की इंटेलीजेंस रिपोर्ट भी साझा हो रही है। स्कूल, कॉलेज और ग्राम पंचायतों जैसी संस्थाओं में आतंकियों को लेकर सरकार की नीति और अनुच्छेद 35-ए के संशोधन पर उनकी राय जैसी सूचनाएं भी नियमित तौर से गृह मंत्रालय में पहुंच रही हैं।

नए जम्मू-कश्मीर की इस तरह जुड़ रही हैं कड़ियां

  • गृह मंत्री शाह ने अपने दो दिवसीय दौरे में नए जम्मू-कश्मीर को लेकर राज्यपाल सत्यपाल मलिक, वरिष्ठ अधिकारियों और सामान्य जन से बातचीत की।
  • एनएसए अजीत डोभाल भी दो दिन के लिए जम्मू-कश्मीर पहुंचे। राज्यपाल के तीनों सलाहकारों के साथ बैठक की। मुख्य सचिव, डीजीपी और इंटेलीजेंस के अफसरों से अपडेट लिया। बताया जा रहा है कि वहां की सिविल सोसायटी के कई लोगों ने भी दोभाल के साथ चर्चा की है।
  • रॉ (रिसर्च एंड एनालिसिस विंग) सेक्रेट्री सामंत गोयल भी दो दिन के लिए जम्मू-कश्मीर पहुंचे। उन्होंने कई जगहों पर बैठकें की। सीमावर्ती इलाकों में भी गए। उन्होंने आतंकियों के छिपे होने के अलर्ट, सीमा पार से मिल रही मदद और स्थानीय लोगों के वेश में पाक समर्थित आतंकी समूहों के गुर्गे आदि की जानकारी ली।
  • एनआईए और आयकर विभाग ने कई जगहों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। 
  • प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी वित्तीय संस्थानों के रिकॉर्ड खंगाले। 
  • जम्मू-कश्मीर कैडर के आईपीएस और एनआईए के आईजी मुकेश सिंह को विशेष समन्वयक बनाया गया। 
  • आईजी एसपी पनी का रॉ में तबादला हुआ, लेकिन उन्हें एनआईए के साथ समन्वय की जिम्मेदारी दी गई। 
  • जम्मू-कश्मीर पुलिस में कानून व्यवस्था के एडीजी पद पर कार्यरत मुनीर खान को एक साल का सेवा विस्तार दे दिया गया। 
  • राज्यपाल सत्यपाल मलिक के सलाहकारों की संख्या बढ़ाकर चार कर दी गई है। फारुख खान को जम्मू-कश्मीर की राजनीति का विशेष रणनीतिकार माना जाता है। हालांकि वे भाजपा के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ से भी जुड़े रहे हैं। उन्होंने बीते दिनों केंद्र के कई वरिष्ठ अफसरों के साथ बैठक कर नए जम्मू-कश्मीर की राह का खाका तैयार किया था।
  • आईपीएस अफसर राहुल रस्गोत्रा, जिनका आईबी विंग की जम्मू-कश्मीर इकाई से तबादला हो गया था, उन्हें अब फिर वहीं रखा गया। 
  • सीआरपीएफ के पूर्व डीजी के विजय कुमार और आईबी के पूर्व डायरेक्टर दिनेश्वर शर्मा की अहम बैठक में तय हुआ कि राज्य में सुरक्षा बलों की संख्या बढ़ाई जाए।
  • अगले ही दिन 10,000 से ज्यादा जवानों को जम्मू-कश्मीर में तैनात कर दिया गया। 
  • 28 जुलाई को प्रधानमंत्री मोदी ने 'मन की बात' कार्यक्रम में जम्मू-कश्मीर पर फोकस किया। उन्होंने कहा, विकास की मदद से बंदूक और बमों पर विजय पाई जा सकती है। पहली बार जम्मू-कश्मीर में अधिकारी लोगों के घर पर जाकर उनसे समस्याओं की जानकारी ले रहे हैं।
  • 30 जुलाई को दिल्ली में जम्मू-कश्मीर भाजपा इकाई के कोर ग्रुप की अहम बैठक हुई। 
विज्ञापन

नए जम्मू-कश्मीर की राह इन दो मार्गों से होकर गुजरेगी

नए जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 35 को लेकर कुछ होगा या फिर वहां पर विधानसभा की सीटें बढ़ाई जाएंगी। अनुच्छेद-35 का मामला तो सुप्रीम कोर्ट में जा चुका है, जबकि राज्य के भाजपा नेताओं ने जल्द से जल्द परिसीमन कराने की अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। भाजपा नेताओं का कहना है कि राज्य में परिसीमन अब समय की मांग है। 

अगर मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में परिसीमन होता है तो जम्मू-कश्मीर के अलावा लद्दाख क्षेत्र के साथ भी न्याय हो सकेगा। वहां पर विधानसभा की कई नई सीटें बन सकती हैं। जम्मू-कश्मीर में विधानसभा की 111 सीटें हैं। मौजूदा स्थितियों में केवल 87 सीटों पर चुनाव लड़ा जाता है। वहां के संविधान के धारा-47 के अनुसार, 24 सीटों पर चुनाव नहीं होता है।

बता दें कि जब जम्मू-कश्मीर का संविधान बना तो 24 सीटें पाक अधिकृत कश्मीर के लिए खाली छोड़ी गई थीं। राज्य के भाजपा नेताओं ने परिसीमन को लेकर जो रिपोर्ट दी है, उसमें इन्हीं 24 सीटों का जिक्र है। यदि ये सीटें विधानसभा में मिलती हैं तो उसका फायदा भाजपा को होगा। 

दूसरा, अनुच्छेद 35-ए है। यह जम्मू-कश्मीर विधानसभा को राज्य के 'स्थायी निवासी' की परिभाषा तय करने का अधिकार देता है। इसके तहत जम्मू-कश्मीर के नागरिकों को कुछ खास अधिकार दिए गए हैं। साल 1954 में इसे राष्ट्रपति के आदेश के माध्यम से संविधान में जोड़ा गया था। अब इसमें संशोधन या इसे खत्म करने की चर्चा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed