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Supreme Court: विदेशी कोर्ट का तलाक भारत में मान्य नहीं! सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 से खुद तोड़ी शादी

Wed, 18 Mar 2026 11:35 PM IST
Pavan न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Pavan Updated Wed, 18 Mar 2026 11:35 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने अमेरिकी कोर्ट की तरफ से दिए गए तलाक के फैसले को मानने से इनकार कर दिया। लेकिन साथ ही यह भी देखा कि पति-पत्नी साल 2008 से अलग रह रहे हैं, यानी करीब 18 साल से उनका कोई रिश्ता नहीं बचा है। इसे देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उनकी शादी तोड़ दी।

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‘Irretrievable breakdown’: SC dissolves NRI marriage, refuses to recognise US decree
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : PTI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में एक विदेश में रहने वाले भारतीय (एनआरआई) दंपत्ति का विवाह खत्म कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इस शादी का रिश्ता अब पूरी तरह टूट चुका है और इसमें दोबारा साथ आने की कोई संभावना नहीं बची है। यह मामला एक ऐसे जोड़े का था, जिनकी शादी 25 दिसंबर 2005 को मुंबई में हिंदू रीति-रिवाज से हुई थी। बाद में दोनों अमेरिका में रहने लगे, लेकिन कुछ ही वर्षों में उनके बीच विवाद शुरू हो गया। पत्नी ने 2008 में अमेरिका की कोर्ट (मिशिगन) में तलाक की अर्जी दी, जबकि पति ने उसी समय भारत में पुणे की फैमिली कोर्ट में केस दाखिल किया।
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शादी पूरी तरह टूट जाने के आधार पर अमेरिकी कोर्ट ने दिया था तलाक
अमेरिकी कोर्ट ने 2009 में 'विवाह का अपरिवर्तनीय विघटन' यानी शादी पूरी तरह टूट जाने के आधार पर तलाक दे दिया और संपत्ति व पैसों के बंटवारे पर भी आदेश दिए। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि भारत में ऐसे विदेशी तलाक के फैसले को अपने आप मान्यता नहीं मिलती, खासकर जब वह भारतीय कानून के अनुसार सही आधार पर न हो। 
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सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने फैसले का दिया हवाला
कोर्ट ने यह भी पाया कि पति ने अमेरिकी कोर्ट की कार्यवाही में ठीक से हिस्सा नहीं लिया था, इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि उसे अपनी बात रखने का पूरा मौका मिला। सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने फैसले (वाई नरसिम्हा राव केस) का हवाला देते हुए कहा कि विदेशी तलाक तभी मान्य होगा, जब वह भारतीय कानून के अनुसार हो और दोनों पक्षों को सही तरीके से सुना गया हो।


चूंकि इस मामले में ऐसा नहीं था, इसलिए कोर्ट ने अमेरिकी तलाक के फैसले को मानने से इनकार कर दिया। लेकिन साथ ही यह भी देखा कि पति-पत्नी 2008 से अलग रह रहे हैं, यानी करीब 18 साल से उनका कोई रिश्ता नहीं बचा है। 

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सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 का किया इस्तेमाल
इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करते हुए 'पूर्ण न्याय' देने के लिए खुद ही इस शादी को खत्म (तलाक) कर दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि अब भारत और अमेरिका की कोर्ट के बीच अधिकार क्षेत्र का विवाद तय करने की जरूरत नहीं है, और पुणे की फैमिली कोर्ट में चल रहा केस भी अब खत्म माना जाएगा।

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