फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Irregularities baby food tests FSSAI takes action Nestle India raises questions infant nutrition products.

बेबी फूड क्या नहीं है सुरक्षित?: नेस्ले इंडिया पर FSSAI की बड़ी कार्रवाई, तीन शिशु पोषण उत्पादों पर उठाए सवाल

Fri, 18 Sep 2026 01:44 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली Published by: अस्मिता त्रिपाठी Updated Fri, 18 Sep 2026 01:44 PM IST
सार

एफएसएसएआई ने शिशु पोषण उत्पादों के नियमों के उल्लंघन पर नेस्ले इंडिया के खिलाफ तीन मामले दर्ज किए हैं। एनएएन एक्सेला प्रो स्टेज 1 और लैक्टोजेन प्रो 1 के प्रचार दावों पर आपत्ति जताई गई। आइए जानते हैं कि एफएसएसएआई ने क्या कहा है? 

विज्ञापन
Irregularities baby food tests FSSAI takes action Nestle India raises questions infant nutrition products.
FSSAI की नेस्ले इंडिया पर कार्रवाई - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने शुक्रवार को नेस्ले इंडिया लिमिटेड के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की है।  मामला उत्पादों के प्रचार में किए गए कुछ दावों और एक प्रोडक्ट में पोषक तत्व की तय मात्रा से जुड़ा है। जिन उत्पादों को लेकर सवाल उठाए गए हैं, उनमें एनएएन एक्सेला प्रो 1,लैक्टोजेन  प्रो 1 और नेस्ले का एक फॉलो-अप फॉर्मूला शामिल है।

विज्ञापन


हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इन उत्पादों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। फिलहाल एफएसएसएआई ने कथित नियम उल्लंघन को लेकर तीन अलग-अलग मामलों में सुनवाई की प्रक्रिया शुरू की है। अंतिम फैसला संबंधित प्राधिकरण की जांच और सुनवाई के बाद ही होगा।

विज्ञापन

नेस्ले ने क्या कहा है?

उधर, नेस्ले ने अपने ऊपर लगे आरोपों को नकारा है। कंपनी के प्रवक्ता ने अमर उजाला को भेजे अपने बयान में कहा, "हमारे उत्पाद सभी लागू नियमों का पूर्णतया अनुपालन करते हैं। उक्त उत्पादों (नान एक्सेला प्रो और लैक्टोजेन प्रो) और उनके लेबल को एफएसएसएआई की विशेषज्ञ समिति द्वारा अनुमोदित किया गया है। नोटिस के जवाब में, हमने लेबल पर दिए गए कथनों के संबंध में अधिकारियों को अपना विस्तृत जवाब पुनः प्रस्तुत किया है, जो तथ्यात्मक हैं और इनका वैज्ञानिक आधार है।"

विज्ञापन
विज्ञापन

एनएएन एक्सेला प्रो स्टेज 1 पर क्या है मामला?

एफएसएसएआई के कानूनी नोटिस के मुताबिक, एनएएन एक्सेला प्रो स्टेज 1 के प्रचार में ‘5 HMOs’ और ‘Whey Protein’ से जुड़े दावे किए गए थे। एफएसएसएआई  ने इन दावों को लेकर नेस्ले इंडिया से स्पष्टीकरण मांगा। इसके बाद प्राधिकरण ने कहा कि प्रचार सामग्री फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (शिशुओं के पोषण के लिए खाद्य पदार्थ) रेगुलेशन, 2020' के रेगुलेशन 4(2) के अनुरूप नहीं पाई गई। इस नियम के तहत शिशुओं के लिए बनाए गए खाद्य उत्पादों के प्रचार और ऐसे दावों पर कई तरह की पाबंदियां हैं, खासकर जब उनका उद्देश्य उत्पाद की बिक्री बढ़ाना हो।

लैक्टोजेन  प्रो 1 को लेकर क्या आपत्ति है?

एफएसएसएआई ने लैक्टोजेन  प्रो 1 की प्रचार सामग्री की भी जांच की। बताया गया है कि इसके प्रचार में Whey Protein को आसानी से पचने वाला बताया गया था। एफएसएसएआई  ने इस दावे पर भी नेस्ले से जवाब मांगा। प्राधिकरण के मुताबिक यह प्रचार भी 2020 के नियमों के रेगुलेशन 4(2) के तहत सवालों के घेरे में आया है।

किस नियम के उल्लंघन के तहत की गई कार्रवाई? 

एफएसएसएआई के अनुसार, दोनों प्रोडक्ट 'फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (शिशुओं के पोषण के लिए खाद्य पदार्थ) रेगुलेशन, 2020' के रेगुलेशन 4(2) का उल्लंघन करते पाए गए। यह नियम शिशु आहार की बिक्री बढ़ाने के मकसद से किए जाने वाले प्रचार-प्रसार के दावों और सामग्री पर रोक लगाता है। रेगुलेटर ने 'इन्फैंट मिल्क सब्स्टिट्यूट्स, फींडिंग बॉटल्स एंड इन्फैंट फ़ूड्स (उत्पादन, आपूर्ति और वितरण का नियमन) एक्ट, 1992' की धारा 3 का भी जिक्र किया, जो इनके विज्ञापन और प्रचार पर रोक लगाती है।

बच्चों के खाद्य उत्पादों के प्रचार पर सख्त नियम क्यों?

शिशुओं के लिए तैयार किए जाने वाले दूध और पोषण उत्पादों के लिए सामान्य खाद्य पदार्थों की तुलना में ज्यादा सख्त नियम हैं। इसकी वजह यह है कि ये उत्पाद बच्चों के विकास के बेहद महत्वपूर्ण समय में इस्तेमाल किए जाते हैं। भारत में शिशु आहार और दूध के विकल्पों के विज्ञापन और प्रचार पर इसलिए भी पाबंदियां लगाई गई हैं ताकि मार्केटिंग माता-पिता के बच्चों को दूध या भोजन देने से जुड़े फैसलों को प्रभावित न करे। एफएसएसएआई के नोटिस में शिशु दुग्ध विकल्प, दूध पिलाने की बोतलें और शिशु आहार अधिनियम, 1992 का भी जिक्र किया गया है। यह कानून शिशु दूध के विकल्प और कुछ शिशु खाद्य उत्पादों के विज्ञापन और प्रचार को नियंत्रित करता है।

तीसरे प्रोडक्ट में क्या समस्या मिली?

तीसरा मामला प्रचार से नहीं, बल्कि उत्पाद में मौजूद एक पोषक तत्व की मात्रा से जुड़ा है। नोटिस के अनुसार, नेस्ले इंडिया द्वारा बनाए गए एक फॉलो-अप फॉर्मूला के नमूने की लैब जांच में बायोटिन की मात्रा निर्धारित मानक के अनुरूप नहीं पाई गई। इसके बाद नमूने को दोबारा जांच के लिए रेफरल लैब भेजा गया। वहां भी नमूना 2020 के नियमों के तहत तय बायोटिन मानक के अनुरूप नहीं पाया गया। बायोटिन को विटामिन B7 भी कहा जाता है। यह शरीर की कई जरूरी प्रक्रियाओं में भूमिका निभाता है। बच्चों के पोषण उत्पादों में विभिन्न पोषक तत्वों की मात्रा पहले से तय मानकों के अनुसार रखना जरूरी होता है।

नेस्ले इंडिया के खिलाफ कितने मामले दर्ज हुए?

नोटिस के मुताबिक, इन तीन उत्पादों को लेकर नेस्ले इंडिया लिमिटेड के खिलाफ तीन अलग-अलग मामले दायर किए गए हैं। इनमें से दो मामले प्रचार में किए गए कथित दावों से जुड़े हैं, जबकि तीसरा मामला फॉलो-अप फॉर्मूला में बायोटिन की मात्रा से संबंधित है। अब संबंधित प्राधिकरण इन आरोपों और कंपनी के जवाब की जांच करेगा। इसके बाद ही तय होगा कि किसी नियम का उल्लंघन हुआ है या नहीं और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।

क्या नेस्ले के इन प्रोडक्ट्स पर बैन लग गया है?

नहीं। नोटिस में इन उत्पादों पर प्रतिबंध लगाए जाने की बात नहीं कही गई है। एफएसएसएआई की ओर से कार्रवाई शुरू किए जाने का मतलब केवल यह है कि कथित नियम उल्लंघन की जांच और सुनवाई की जा रही है। इससे यह भी साबित नहीं होता कि इन उत्पादों का हर बैच असुरक्षित है। अंतिम स्थिति संबंधित प्राधिकरण के फैसले के बाद ही साफ होगी।

माता-पिता के लिए क्या जरूरी है?

माता-पिता को केवल इस कानूनी नोटिस के आधार पर यह नहीं मान लेना चाहिए कि कोई प्रोडक्ट अपने आप असुरक्षित हो गया है। हालांकि, छोटे बच्चों के लिए फॉर्मूला मिल्क या अन्य पोषण उत्पाद चुनते या बदलते समय सावधानी बरतना जरूरी है। जरूरत पड़ने पर इस बारे में बाल रोग विशेषज्ञ या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर हो सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed