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16 साल बाद भूख हड़ताल तोड़ेंगी इरोम शर्मिला, लड़ सकती हैं चुनाव
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
Updated Tue, 26 Jul 2016 04:33 PM IST
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मणिपुर की मानवाधिकार कार्यकर्ता इरोम शर्मिला ने 16 साल बाद अपनी भूख हड़ताल खत्म करने का फैसला लिया है। उनकी योजना मणिपुर से चुनाव लड़ने की भी है।
बता दें कि उन्होंने विवादित आर्म्ड फोर्सेज (स्पेशल पॉवर्स) एक्ट, (अफस्पा) को वापस लेने की मांग की थी। इसी के खिलाफ वह अभी भूख हड़ताल पर थी।
इरोम शर्मिला ने कहा कि मैं अपनी भूख हड़ताल खत्म करने जा रही हूं क्योंकि मुझे अभी तक सरकार से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं आई है। अब मैं चुनाव में उतरूंगी और इस मुद्दे का हल निकालूंगी।
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बता दें कि उन्होंने विवादित आर्म्ड फोर्सेज (स्पेशल पॉवर्स) एक्ट, (अफस्पा) को वापस लेने की मांग की थी। इसी के खिलाफ वह अभी भूख हड़ताल पर थी।
इरोम शर्मिला ने कहा कि मैं अपनी भूख हड़ताल खत्म करने जा रही हूं क्योंकि मुझे अभी तक सरकार से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं आई है। अब मैं चुनाव में उतरूंगी और इस मुद्दे का हल निकालूंगी।
9 अगस्त को खत्म करेंगी अपना उपवास
कानून
- फोटो : demo
इरोम शर्मिला ने बताया कि वह 9 अगस्त को अपना उपवास खत्म करेंगी।
बता दें कि मणिपुर से विवादित अफस्पा कानून हटाने की मांग को लेकर इरोम शर्मिला नवंबर 2000 से भूख हड़ताल पर हैं।
इरोम शर्मिला ने भूख हड़ताल की शुरूआत तब की जब सुरक्षा बलों ने इंफाल एयरपोर्ट के पास स्थित बस स्टॉप पर 10 नागरिकों को गोली मार कर हत्या कर दी थी।
इरोम का कहना था कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने उपवास के जरिए अपनी मांगें पूरी की थी। इसलिए उन्होंने इसे हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया।
बता दें कि मणिपुर से विवादित अफस्पा कानून हटाने की मांग को लेकर इरोम शर्मिला नवंबर 2000 से भूख हड़ताल पर हैं।
इरोम शर्मिला ने भूख हड़ताल की शुरूआत तब की जब सुरक्षा बलों ने इंफाल एयरपोर्ट के पास स्थित बस स्टॉप पर 10 नागरिकों को गोली मार कर हत्या कर दी थी।
इरोम का कहना था कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने उपवास के जरिए अपनी मांगें पूरी की थी। इसलिए उन्होंने इसे हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया।