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इरोम शर्मिला ने किया अपनी राजनीतिक पार्टी का ऐलान
ब्यूरो/ अमर उजाला, इंफाल
Updated Tue, 18 Oct 2016 09:57 PM IST
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पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में लागू सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम के खिलाफ दुनिया में सबसे लंबी भूख हड़ताल का रिकार्ड बनाने वाली लौह महिला इरोम शर्मिला ने मंगलवार को अपनी नई राजनीतिक पार्टी पीपुल्स रिसर्जेंस जस्टिस एलायंस (प्रजा) के गठन का ऐलान किया।
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इसके साथ ही उन्होंने औपचारिक रूप से राजनीति में कदम रख दिया है। वैसे, बीते महीने अपनी भूख हड़ताल खत्म करने के समय ही उन्होंने राजनीति में उतरने और मणिपुर में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में मैदान में उतरने का ऐलान किया था।
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मानवाधिकार कार्यकर्ता इरोम ने अब पीपुल्स रिसर्जेंस जस्टिस एलायंस के बैनर तले चुनाव लड़कर अगले साल मणिपुर के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठना चाहती हैं ताकि राज्य से विशेषाधिकार अधिनियम को खत्म किया जा सके।
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शर्मिला ने इससे पहले बीते महीने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मुलाकात कर उनसे राज्य की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों को पराजित करने का फार्मूला पूछा था। उन्होंने राजनीति पर सलाह के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की बात कही है।
ईंरेडों लीचोनबाम को शर्मिला की नई पार्टी का संयोजक बनाया गया है जबकि खुद शर्मिला इसकी सह-संयोजक बनीं हैं। नई पार्टी का एलान करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि हम मणिपुर में एक नया राजनीतिक बदलाव लाना चाहते हैं।
उसके बाद सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम जैसे काले कानूनों से आम लोगों को परेशान नहीं किया जा सकेगा। नवंबर, 2000 से उक्त कानून के खिलाफ आमरण अनशन पर बैठी शर्मिला ने बीते महीने अपनी भूख हड़ताल खत्म की थी।
उस समय उन्होंने कहा था कि हड़ताल खत्म होने से उनका आंदोलन खत्म नहीं होगा। अब एक नई शुरुआत होगी। इरोम की भूख हड़ताल दुनिया में अपने किस्म की पहली और शायद सबसे ज्यादा समय तक चलने वाली हड़ताल थी। उनको नाक से जबरन तरल भोजन दिया जाता था।
इसके लिए राजधानी इंफाल के एक सरकारी अस्पताल में ही इरोम को नजरबंद किया गया था। वर्ष 2006 में दिल्ली के जंतर-मंतर पर आमरण अनशन के लिए उनके खिलाफ आत्महत्या की कोशिश का मामला दर्ज किया गया था।
राज्य में फिलहाल ईबोबी सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार सत्ता में है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि इरोम ने नई पार्टी बनाकर चुनाव मैदान में उतरने की वजह से राज्य के राजनीतिक समीकरणों में बड़े पैमाने पर उथल-पुथल तय है।