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सोच-समझकर नोटबंदी के समय लगाया गया IRF पर प्रतिबंध : जाकिर
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 26 Nov 2016 05:47 AM IST
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फाइल फोटोः जाकिर नाइक
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विवादित इस्लामिक प्रचारक जाकिर नाईक ने अपनी संस्था इस्लामिक रिसर्च सेंटर (आईआरएफ) पर लगाए गए प्रतिबंध पर केंद्र सरकार को कोसा है। उन्होंने शुक्रवार को खुला पत्र जारी कर कहा कि आईआरएफ पर प्रतिबंध सोच-समझकर नोटबंदी के समय पर लगाया गया, जिससे कि किसी का ध्यान इस मुद्दे की ओर न जाए।
उन्होंने कहा कि इस समय देश की जनता नोटबंदी की वजह से नकदी की किल्लत से जूझ रही है। ऐसे में किसी के पास इस मुद्दे पर विरोध करने की न तो शक्ति है और न ही समय। मीडिया में भी इस समय नोटबंदी का मुद्दा ही छाया हुआ है। इस वजह से मीडिया का ध्यान भी इस मुद्दे की ओर नहीं गया। जाकिर ने अपनी संस्था पर लगे प्रतिबंध को मुस्लिमों, शांति, लोकतंत्र और न्याय व्यवस्था पर हमला बताया है। उन्होंने कहा है कि सरकार ने उनका पक्ष जाने बिना ही उनकी संस्था पर प्रतिबंध लगा दिया है। ऐसे में वह सरकार को इसका कानूनी तरीके से जवाब देंगे।
विवादित उपदेशक ने कहा कि उनकी संस्था पर प्रतिबंध लगाए जाने से पहले न तो नोटिस नहीं दिया गया और ना ही समन या कोई कॉल की गई। जाकिर ने कहा कि उन्होंने अपना पक्ष रखा, लेकिन उसे स्वीकार नहीं किया गया। उन्होंने केंद्र सरकार की कार्रवाई को सांप्रदायिक बताया और कहा कि 25 सालों से वह कानून के दायरे में काम कर रहे थे। अचानक उनकी संस्था को प्रतिबंधित कर दिया गया। जाकिर ने तीन पन्ने के अपने बयान में अल कुरान की आयतों को उद्धृत किया है और कहा है कि वह हिंसा और आतंकवाद के खिलाफ हैं।
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उन्होंने कहा कि इस समय देश की जनता नोटबंदी की वजह से नकदी की किल्लत से जूझ रही है। ऐसे में किसी के पास इस मुद्दे पर विरोध करने की न तो शक्ति है और न ही समय। मीडिया में भी इस समय नोटबंदी का मुद्दा ही छाया हुआ है। इस वजह से मीडिया का ध्यान भी इस मुद्दे की ओर नहीं गया। जाकिर ने अपनी संस्था पर लगे प्रतिबंध को मुस्लिमों, शांति, लोकतंत्र और न्याय व्यवस्था पर हमला बताया है। उन्होंने कहा है कि सरकार ने उनका पक्ष जाने बिना ही उनकी संस्था पर प्रतिबंध लगा दिया है। ऐसे में वह सरकार को इसका कानूनी तरीके से जवाब देंगे।
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विवादित उपदेशक ने कहा कि उनकी संस्था पर प्रतिबंध लगाए जाने से पहले न तो नोटिस नहीं दिया गया और ना ही समन या कोई कॉल की गई। जाकिर ने कहा कि उन्होंने अपना पक्ष रखा, लेकिन उसे स्वीकार नहीं किया गया। उन्होंने केंद्र सरकार की कार्रवाई को सांप्रदायिक बताया और कहा कि 25 सालों से वह कानून के दायरे में काम कर रहे थे। अचानक उनकी संस्था को प्रतिबंधित कर दिया गया। जाकिर ने तीन पन्ने के अपने बयान में अल कुरान की आयतों को उद्धृत किया है और कहा है कि वह हिंसा और आतंकवाद के खिलाफ हैं।
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आतंकवाद रोधी कानून के तहत दर्ज हुआ मामला
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही एनआईए ने आतंकवाद रोधी कानून के तहत प्रतिबंधित आईआरएफ के संस्थापक जाकिर नाईक एवं अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया था। उसके दूसरे दिन मुंबई में आईआरएफ के 12 ठिकानों पर तलाशी ली थी। इसके बाद नेशनल इनवेस्टिगेशन एजेंसी (एनआइए) ने तीन बैंकों से नाईक और उसके संगठन के सभी बैंक खाते सीज करने का निर्देश दिया है।
इसके अलावा, एनआईए ने सभी 72 सूचीबद्ध वाणिज्यिक बैंकों को नाईक, उसके परिजन, करीबी दोस्तों और संगठनों सहित 12 से ज्यादा लोगों की एक सूची सौंपकर यह पता करने को कहा है कि क्या इन वित्तीय संस्थाओं में इन लोगों का कोई बैंक खाता है।
सूत्रों का कहना है कि एनआईए ने ऐसे कुछ दस्तावेज जब्त किए हैं जिसमें आतंकवादी संगठन आईएसआईएस में कथित तौर पर भर्ती हुए अबु अनस ने अक्तूबर 2015 में आईआरएफ से छात्रवृत्ति के तौर पर 80,000 रुपये प्राप्त किए थे। इससे एनआईए को आशंका है कि जाकिर की संस्था आतंकियों को फंडिंग भी करती थी।
इसके अलावा, एनआईए ने सभी 72 सूचीबद्ध वाणिज्यिक बैंकों को नाईक, उसके परिजन, करीबी दोस्तों और संगठनों सहित 12 से ज्यादा लोगों की एक सूची सौंपकर यह पता करने को कहा है कि क्या इन वित्तीय संस्थाओं में इन लोगों का कोई बैंक खाता है।
सूत्रों का कहना है कि एनआईए ने ऐसे कुछ दस्तावेज जब्त किए हैं जिसमें आतंकवादी संगठन आईएसआईएस में कथित तौर पर भर्ती हुए अबु अनस ने अक्तूबर 2015 में आईआरएफ से छात्रवृत्ति के तौर पर 80,000 रुपये प्राप्त किए थे। इससे एनआईए को आशंका है कि जाकिर की संस्था आतंकियों को फंडिंग भी करती थी।