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अंतरराष्ट्रीय महिला वैज्ञानिक दिवस : देश में महज 16.6 प्रतिशत महिलाएं ही शोध व विकास से जुड़ीं

Thu, 11 Feb 2021 07:44 AM IST
Kuldeep Singh अमर उजाला रिसर्च टीम, नई दिल्ली
अमर उजाला रिसर्च टीम, नई दिल्ली Published by: Kuldeep Singh Updated Thu, 11 Feb 2021 07:44 AM IST
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International Womens Scientific Day: 16.6 percent of women in India who are involved in research and development
अंतरराष्ट्रीय महिला वैज्ञानिक दिवस (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया

संयुक्त राष्ट्र हर वर्ष 11 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय महिला वैज्ञानिक दिवस मनाता है। इसका मकसद महिलाओं और लड़कियों को स्टेम यानी विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) के क्षेत्र में लाने के लिए प्रोत्साहित करना है। इस बार की थीम 'कोविड-19 के खिलाफ संघर्ष में अग्रणी महिला विज्ञानी' रखी गई है।


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संयुक्त राष्ट्र हर वर्ष 11 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय महिला वैज्ञानिक दिवस मनाता है। इसका मकसद महिलाओं और लड़कियों को स्टेम यानी विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) के क्षेत्र में लाने के लिए प्रोत्साहित करना है। इस बार की थीम 'कोविड-19 के खिलाफ संघर्ष में अग्रणी महिला विज्ञानी' रखी गई है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, 2019-20 में 16.6 फीसदी महिलाएं देश में सीधे तौर पर शोध एवं विकास (आरएंडडी) से जुड़ी हैं। यह संख्या पुरुषों की तुलना में बेहद कम है। वहीं आईआईटी दिल्ली के सहयोग से वीमन आत्रप्रीन्योरशिप एवं इमपॉवरमेंट (डब्ल्यूईई) के तहत 170 स्टार्टअप के लिए महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया है। तकनीक के क्षेत्र में देश में इस तरह का यह पहला प्रयास है।

तकनीकी शिक्षा में आ रही हैं लड़कियां

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक भारत में एसटीईएम से 43 फीसदी छात्राएं पढ़ाई कर रही हैं। भारत इस मामले में 17 देशों की सूची में पहले नंबर पर है। इसी सूची में रूस दूसरे नंबर पर है जबकि अमेरिका 34 फीसदी के साथ नौवें नंबर पर है। भारत में काम कर रहे 2.80 लाख वैज्ञानिक, इंजीनियर और टेक्नोलॉजिस्ट में सिर्फ 14 फीसदी महिलाएं हैं।

दुनियाभर में सिर्फ 33 प्रतिशत महिला शोधकर्ता
यूनेस्को के आंकड़े के अनुसार, दुनियाभर में केवल 33 फीसदी महिला शोधकर्ता हैं। यह स्थिति तब है जब स्टेम के तहत बैचलर्स और मास्टर्स में दाखिले का प्रतिशत 45 और 55 प्रतिशत है। 44 फीसदी छात्राएं पीएचडी कार्यक्रम में दाखिला लेती हैं। स्वास्थ्य और सामाजिक कार्यों के क्षेत्र में 70 फीसदी महिलाएं हैं, लेकिन उन्हें पुरुषों की तुलना में 11 फीसदी कम वेतन दिया जाता है।

पुरुषों की तुलना में अभी भी काफी पीछे

कोरोना से लड़ाई में महिलाओं की अहम भागीदारी रही। इलाज और जांच से लेकर दवा की खोज और मरीज की देखरेख में महिलाएं आगे रहीं। देश की डॉक्टर सौम्या स्वामीनाथन विश्व स्वास्थ्य संगठन में चीफ साइंटिस्ट की भूमिका में महामारी से लड़ाई को अंजाम पहुंचाने के लिए काम कर रही हैं। महिलाएं आगे बढ़ रही हैं पर पुरुषों की तुलना में वे काफी पीछे हैं, जिन्हें बराबरी पर लाने के लिए पूरी दुनिया को एकजुट होना होगा।

एआई पर सिर्फ 15 प्रतिशत कर रही काम
भारत में 43 फीसदी लड़कियां तकनीकी शिक्षा हासिल कर रही हैं। दुर्भाग्य है कि नौकरी केवल 14 फीसदी को ही मिलती है। स्वीडन में 35 फीसदी युवतियां इन विषयों से पढ़ाई करती हैं और 34 फीसदी को रोजगार मिलता है। इसी तरह गूगल में, फेसबुक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर काम करने वाले स्टाफ में सिर्फ 10 से 15 फीसदी महिलाएं हैं।

विज्ञान क्षेत्र में सिर्फ 25 महिलाओं को नोबेल पुरस्कार
अब तक सिर्फ 25 महिलाओं को फिजिक्स, केमिस्ट्री, मेडिसिन और इकनॉमिक्स के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार मिला है। पुरुषों की संख्या बहुत है जिसकी बराबरी करने में महिलाओं को एक सदी लग सकती है।
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