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लाजमी है भारत का डर ..ताकि फिर न बने कोई सरबजीत
amarujala.com- Presented by: संदीप भट्ट
Updated Fri, 19 May 2017 04:58 AM IST
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कुलभूषण जाधव को लेकर भारत का डर स्वाभाविक है, क्योंकि कुछ वर्ष पूर्व पाकिस्तान में सरबजीत सिंह की जेल में ही हत्या की जा चुकी है। 28 अगस्त, 1990 नशे की हालत में खेमकरण सेक्टर से सीमा पार कर पाक पहुंचे सरबजीत को वहां की पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर उन पर 1990 में लाहौर व फैसलाबाद में हुए चार बम विस्फोटों में शामिल होने के आरोप लगा दिए।
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3 अक्तूबर, 1991 को एक अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुनाई। भारत के दबाव में फांसी की सजा टलती रही, लेकिन कोट लखपत जेल में सरबजीत पर 26 अप्रैल 2013 की रात पाकिस्तानी कैदियों ने जानलेवा हमला कर दिया जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर कोमा में चले गए।
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भारत चार दिन तक सरबजीत को लौटाने या किसी तीसरे देश में बेहतर इलाज के लिए भेजने का अनुरोध करता रहा लेकिन पाक नहीं पसीजा। अंतत: 2 मई 2013 को सरबजीत की लाहौर के जिन्ना अस्पताल में मौत हो गई।
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