महंगाई नियंत्रण में है, ब्याज दर कम और स्थिर हो : राष्ट्रपति
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राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने शुक्रवार को कहा कि ब्याज दर स्थिर, कम और स्वीकार्य स्तर पर रहनी चाहिए, तभी संभावित निवेश पश्चिम बंगाल में विशेष तौर पर और साधारण तौर पर देश में आकर्षित होंगे। उन्होंने कहा कि बेहतर वित्तीय प्रबंधन से वित्तीय घाटा और चालू खाता घाटा कम हुआ है और 2008 के वित्तीय संकट के बावजूद पिछले दशक में भारत लगातार विकास करता रहा।
तीसरे बंगाल वैश्विक व्यापार सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुखर्जी ने कहा कि महंगाई नियंत्रण में है। सभी पैमाने और अध्ययन बताते हैं कि ब्याज दर कम, स्वीकारणीय और स्थिर रहनी चाहिए, जिससे देश में और विशेष तौर से राज्य में संभावित निवेशक उत्साहित होंगे।
उन्होंने कहा कि 2008 के वित्तीय संकट के बाद भी भारत की सालाना विकास दर गत एक दशक में 7.6 फीसदी रही है। इस संकट के बाद यूरो-जोन संकट आया। मुखर्जी ने कहा कि 2008 के संकट का असर भारत पर भी पड़ा है। इससे 2008-09 में विकास दर घट गई। संकट से पहले देश की विकास दर नौ फीसदी से अधिक थी। फिर भी गत एक दशक में हमारी औसत सालाना विकास दर 7.6 फीसदी रही है।
जेटली ने बनाई सम्मेलन से दूरी
इस अवसर पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने निवेशकों को राज्य में निवेश करने के लिए उत्साहित करत हुए कहा कि राज्य में निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल बन गया है। पांच साल पहले उद्योग को श्रम दिवस बर्बाद होने का सामना करना पड़ता था। अब यह समस्या नहीं है।
दो दिवसीय आयोजन में 27 से अधिक देशों के 3,000 विदेशी प्रतिनिधि भी हिस्सा ले रहे हैं।
वहीं, प्रणब दा ने सम्मेलन में वित्त मंत्री अरुण जेटली के शामिल न होने पर नाखुशी जताई। गौरतलब है कि नोटबंदी के मुद्दे पर सूबे की तृणमूल कांग्रेस सरकार और सीएम ममता बनर्जी के रुख से बीजेपी खिन्न है। ममता ने नोटबंदी को लेकर सीधे पीएम मोदी को खूब खरी-खोटी सुनाई थीं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक यही वजह है कि वित्त मंत्री ने इस सम्मेलन से दूरी बना ली।