भारतीय नौसेना ने अदन की खाड़ी में लाइबेरियाई पोत को बचाया
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भारतीय नौसेना ने अदन की खाड़ी में समुद्री डकैती की एक कोशिश को नाकाम कर दिया। समुद्री लुटेरे एक लाइबेरियाई पोत पर पहुंचने की फिराक में थे। लेकिन नौसेना के मरीन कमांडो और हथियारबंद हेलीकॉप्टर को आता देख सभी भाग खड़े हुए।
नौसेना का युद्धपोत आईएनएस शारदा अदन की खाड़ी में एंटी पायरेसी मिशन में तैनात है। मंगलवार को करीब 4.45 बजे उसे लाइबेरियाई पोत एमवी लॉर्ड माउंटबेटन से आपात सिग्नल मिला था। पूरे ऑपरेशन की जानकारी देते हुए नौसेना के प्रवक्ता कैप्टन डीके शर्मा ने बताया, एमवी माउंटबेटन ने दो संदिग्ध बड़ी नौकाओं और सात-आठ छोटी नौकाओं के उनकी ओर बढ़ने की सूचना दी थी।
आईएनएस शारदा उस समय घटनास्थल से 30 नॉटिकल मील की दूरी पर था। सूचना मिलने पर नौसेना का पोत तेजी से उस ओर रवाना हो गया। आईएनएस शारदा के वहां पहुंचने पर नौसेना के मार्कोस कमांडो दस्ते हेलीकॉप्टर की मदद से ऑपरेशन शुरू किया।
उन्होंने वहां कुछ संदिग्ध नौकाएं देखीं। कमांडो ने दो बड़ी और पांच छोटी संदिग्ध नौकाओं की जांच की। उन्हें एक बड़ी नौका से एक क्लाशनिकोव राइफल और मैगजीन के 28 राउंड मिले। इससे पहले, भारतीय पोत के पहुंचने पर लुटेरे तीन छोटी नौकाओं पर भागते दिखाई दिए। जिस समय एवी माउंटबेटन ने आपातकालीन कॉल किया था वह अदन की खाड़ी में दक्षिण-पश्चिम की ओर 230 नॉटिकल मील की दूरी पर था।
2008 से अदन की खाड़ी में तैनात है नौसेना
भारतीय नौसेना अक्टूबर 2008 से ही अदन की खाड़ी में तैनात है। समुद्री डकैती के संभावित क्षेत्र में वह 24 घंटे निगरानी रखती है। नौसेना के प्रवक्ता के अनुसार, पिछले साढ़े आठ साल के दौरान यह इस तरह की उनकी 41वीं कार्रवाई थी।
इस दौरान नौसेना ने यहां से गुजरने वाले 3,749 पोतों को सुरक्षा दी है। साथ ही 120 समुद्री लुटेरों को भी गिरफ्तार किया है। अदन की खाड़ी में एंटी पायरेसी अभियान में तैनात होने वाला आईएनएस शारदा 63वां नौसैन्य पोत है।
भारत और चीन की नौसेना ने पिछले महीने अदन की खाड़ी में एक पोत को बचाया था। इस पोत पर सोमालियाई लुटेरों ने कब्जा कर लिया था। इस ऑपरेशन में भारतीय नौसेना के दो पोतों आईएनएस मुंबई और आईएनएस तरकश ने हिस्सा लिया था।