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सिंधु जल समझौता: पाक पर दबाव बनाने की तैयारी, अपने हिस्से का पानी जाने से रोकेगा भारत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 25 Nov 2018 10:25 PM IST
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Indus Water Treaty
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भारत ने आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले पाकिस्तान को सबक सिखाने की योजना बनाई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत 1960 की सिंधु जल समझौते के अपने हिस्से के पानी को पाकिस्तान जाने से रोकेगा। इसके लिए भारत दो बांध समेत तीन परियोजनाओं पर काम कर रहा है।
अधिकारियों के अनुसार दोनों देशों के बीच हुए सिंधु जल समझौते के तहत भारत को मिले उसके हिस्से का काफी पानी पाकिस्तान जाता है। लेकिन अब इसे रोकने की योजना बन गई है। भाारत अपने हिस्से के पानी को पाक जाने से रोकने के लिए पंजाब के शाहपुर कांडी बांध परियोजना, सतलुज-ब्यास की दूसरी लिंक परियोजना और जम्मू-कश्मीर में प्रस्तावित उज्ज बांध परियोजना को जल्द ही पूरा कर लेगा।
बता दें कि सिंधु जल संधि के प्रावधानों के तहत सतलज, व्यास और रावी का पानी भारत को और सिंधु, झेलम और चिनाब का पानी पाकिस्तान को दिया गया है। पर जम्मू एवं कश्मीर की दो जल विद्युत परियोजनाओं की डिजाइन को लेकर पाकिस्तान ने आपत्ति दर्ज कराई थी और 2016 में इस मामले को लेकर विश्व बैंक पहुंचा था।
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गौरतलब है कि भारत और पाकिस्तान ने नौ सालों की बातचीत के बाद 1960 में सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें विश्व बैंक भी एक हस्ताक्षरकर्ता (सिग्नेटरी) है। दोनों देशों के जल आयुक्तों को साल में दो बार मुलाकात करनी होती है और परियोजना स्थलों एवं महत्त्वपूर्ण नदी हेडवर्क के तकनीकी दौरे का प्रबंध करना होता है।
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अधिकारियों के अनुसार दोनों देशों के बीच हुए सिंधु जल समझौते के तहत भारत को मिले उसके हिस्से का काफी पानी पाकिस्तान जाता है। लेकिन अब इसे रोकने की योजना बन गई है। भाारत अपने हिस्से के पानी को पाक जाने से रोकने के लिए पंजाब के शाहपुर कांडी बांध परियोजना, सतलुज-ब्यास की दूसरी लिंक परियोजना और जम्मू-कश्मीर में प्रस्तावित उज्ज बांध परियोजना को जल्द ही पूरा कर लेगा।
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बता दें कि सिंधु जल संधि के प्रावधानों के तहत सतलज, व्यास और रावी का पानी भारत को और सिंधु, झेलम और चिनाब का पानी पाकिस्तान को दिया गया है। पर जम्मू एवं कश्मीर की दो जल विद्युत परियोजनाओं की डिजाइन को लेकर पाकिस्तान ने आपत्ति दर्ज कराई थी और 2016 में इस मामले को लेकर विश्व बैंक पहुंचा था।
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गौरतलब है कि भारत और पाकिस्तान ने नौ सालों की बातचीत के बाद 1960 में सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें विश्व बैंक भी एक हस्ताक्षरकर्ता (सिग्नेटरी) है। दोनों देशों के जल आयुक्तों को साल में दो बार मुलाकात करनी होती है और परियोजना स्थलों एवं महत्त्वपूर्ण नदी हेडवर्क के तकनीकी दौरे का प्रबंध करना होता है।