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'फलस्तीनियों की जगह लेंगे भारतीय': इस्राइल में कर्मचारियों की हुई कमी, एक लाख भारतीयों को नौकरी देने की तैयारी

Tue, 07 Nov 2023 11:56 AM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तेल अवीव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तेल अवीव Published by: नितिन गौतम Updated Tue, 07 Nov 2023 11:56 AM IST
सार

हाएम फेगलिन ने बताया कि 'अगर इस्राइल की सरकार मंजूरी दे देती है तो इस्राइली कंस्ट्रक्शन (निर्माण) कंपनियां एक लाख भारतीयों को नौकरी देने के लिए तैयार हैं।'

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इस्राइल में हुई कामगारों की कमी - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

पश्चिम एशिया में इस्राइल और हमास के बीच छिड़ी लड़ाई जहां दुनियाभर में तनाव बढ़ा रही है और बड़ी संख्या में लोगों की जान जा रही है, वहीं ये लड़ाई भारतीयों के लिए एक अवसर लेकर आयी है। दरअसल गाजा में जारी लड़ाई के चलते इस्राइल की सरकार एक लाख भारतीयों को अपने देश में नौकरी देने की तैयारी कर रही है। अगर ऐसा होता है तो फिर इस्राइल में काम करने वाले फलस्तीनी नागरिकों की जगह भारतीय ले लेंगे। बता दें कि ये नौकरियां निर्माण क्षेत्र में मिलेंगी। 
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इस सेक्टर में मिलेगी नौकरी
एक अमेरिकी मीडिया के साथ बात करते हुए इस्राइल बिल्डर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष हाएम फेगलिन ने बताया कि 'अगर इस्राइल की सरकार मंजूरी दे देती है तो इस्राइली कंस्ट्रक्शन (निर्माण) कंपनियां एक लाख भारतीयों को नौकरी देने के लिए तैयार हैं, जो फलस्तीन के 90 हजार कामगारों की जगह लेंगे।' हाएम ने बताया कि 'फिलहाल वह भारत के साथ बात कर रहे हैं और इस्राइल सरकार द्वारा मंजूरी देने का इंतजार कर रहे हैं। हम उम्मीद कर रहे हैं कि 50 हजार से एक लाख भारतीय कामगार इस्राइल के निर्माण क्षेत्र को चला सकते हैं।' हालांकि इस्राइल के विदेश मंत्रालय ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है। 
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फलस्तीनियों की जगह लेंगे भारतीय
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस्राइल के कंस्ट्रक्शन सेक्टर में 25 प्रतिशत कामगार फलस्तीनी हैं। अब चूंकि हमास के बीती 7 अक्तूबर के हमले के बाद से इस्राइल और हमास के बीच भीषण लड़ाई छिड़ी है और अब तक इस लड़ाई में 11 हजार से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। ऐसे में या तो फलस्तीनी कामगार काम पर नहीं आ रहे हैं या फिर इस्राइल की सरकार द्वारा उन्हें आने की मंजूरी ही नहीं दी जा रही है। फलस्तीन से इस्राइल जाकर काम करने वाले 10 प्रतिशत कर्मचारी गाजा पट्टी के रहने वाले हैं और बाकी वेस्ट बैंक के निवासी हैं। 
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बता दें कि मई में भारत और इस्राइल के बीच एक सौदा हुआ था, जिसके तहत 42 हजार भारतीयों को इस्राइल में काम करने की अनुमति दी गई थी। ये भारतीय कर्मचारी इस्राइल के कंस्ट्रक्शन सेक्टर और नर्सिंग सेक्टर में काम करेंगे। इस्राइल के विदेश मंत्री एली कोहेन की भारत यात्रा के दौरान 9 मई को इस सौदे पर हस्ताक्षर हुए थे। गाजा पट्टी में छिड़ी लड़ाई के चलते इस्राइल ने बड़ी संख्या में फलस्तीनी कामगारों को वापस भेज दिया है और वहां से लोगों के आने पर रोक भी लगा दी है। गाजा में पहले से ही बेरोजगारी दर 50 प्रतिशत है और अब इस्राइल के इस कदम से गाजा में हालात और खराब होंगे। 


 
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