{"_id":"5a28858a4f1c1b8e698c02c2","slug":"indians-not-able-to-save-themselves-from-digital-devices-in-holidays","type":"story","status":"publish","title_hn":"छुट्टियों में भी डिजिटल उपकरणों से खुद को नहीं बचा पा रहे भारतीय","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
छुट्टियों में भी डिजिटल उपकरणों से खुद को नहीं बचा पा रहे भारतीय
एजेंसी / नई दिल्ली
Updated Thu, 07 Dec 2017 05:34 AM IST
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
सर्दी की छुट्टियों से पहले एक प्रौद्योगिकी कंपनी द्वारा कराए गए सर्वे से डिजिटल उपकरणों की जाल में फंस चुके ग्राहकों की मनोदशा को समझा जा सकता है। इस हालिया सर्वे में सामने आया कि मात्र 40 फीसदी लोग अपना स्मार्टफोन घर पर छोड़कर छुट्टियां बिताना चाहते हैं।
मेकैफी द्वारा कराए गए सर्वे के अनुसार, मात्र 40 फीसदी लोग अपना स्मार्टफोन घर पर छोड़कर छुट्टियां बिताना चाहते हैं जबकि 72 फीसदी लोग अपना लैपटॉप छोड़कर जाने को तैयार हैं। जबकि छुट्टियों पर रहने के दौरान लगभग 60 फीसदी लोग कम से कम अपने दिन का एक घंटा ईमेल, टेक्स्ट मेसेज, सोशल मीडिया के पोस्ट देखने में बिता देते हैं।
पढ़ें- अगर ऑनलाइन ठगी का शिकार नहीं होना चाहते तो ये खबर आपके लिए है, RBI ने निकाली है ये बेहतरीन जुगाड़
विज्ञापन
मेकैफी के प्रबंध निदेशक वेंकट कृष्णापुर ने कहा कि छुट्टियां एक ऐसा अवसर होती हैं जिनमें आप अपने डिजिटल उपकरणों से अलग रहो लेकिन अधिकतर भारतीय इसके लिए संघर्ष करते दिखाई दे रहे हैं। इससे यह भी पता चलता है कि हमारी डिजिटल होती आदतें व्यक्तिगत सूचनाओं के लिए खतरा पैदा कर रही हैं।
विज्ञापन
मेकैफी द्वारा कराए गए सर्वे के अनुसार, मात्र 40 फीसदी लोग अपना स्मार्टफोन घर पर छोड़कर छुट्टियां बिताना चाहते हैं जबकि 72 फीसदी लोग अपना लैपटॉप छोड़कर जाने को तैयार हैं। जबकि छुट्टियों पर रहने के दौरान लगभग 60 फीसदी लोग कम से कम अपने दिन का एक घंटा ईमेल, टेक्स्ट मेसेज, सोशल मीडिया के पोस्ट देखने में बिता देते हैं।
विज्ञापन
पढ़ें- अगर ऑनलाइन ठगी का शिकार नहीं होना चाहते तो ये खबर आपके लिए है, RBI ने निकाली है ये बेहतरीन जुगाड़
विज्ञापन
मेकैफी के प्रबंध निदेशक वेंकट कृष्णापुर ने कहा कि छुट्टियां एक ऐसा अवसर होती हैं जिनमें आप अपने डिजिटल उपकरणों से अलग रहो लेकिन अधिकतर भारतीय इसके लिए संघर्ष करते दिखाई दे रहे हैं। इससे यह भी पता चलता है कि हमारी डिजिटल होती आदतें व्यक्तिगत सूचनाओं के लिए खतरा पैदा कर रही हैं।