Meghalaya: बांग्लादेश से मेघालय आने वालों में भारतीय, नेपाली भी शामिल; हिंसा के कारण छोड़ा देश
हिंसा के कारण गुरुवार को बांग्लादेश से 310 लोगों ने मेघालय में प्रवेश किया। भारत में प्रवेश करने वाले लोगों में भारतीय नेपाली और भूटानी भी शामिल हैं।
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हिंसा प्रभावित बांग्लादेश से मेघालय में प्रवेश करने वाले 300 लोगों में भारतीय नेपाली और भूटानी भी शामिल हैं। अधिकारियों ने जानकारी देते हुए बताया कि इनमें ज्यादातर छात्र हैं। जो बांग्लादेश में चल रही हिंसा के कारण फंसे हुए थे।
वहीं एक अन्य पूर्वोत्तर के राज्य असम की सरकार ने कहा है कि वह पड़ोसी देश में रह रहे अपने लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विदेश मंत्रालय के संपर्क में है।
सरकारी नौकरी में कोटा प्रणाली में सुधार को लेकर प्रदर्शन
बांग्लादेश में सरकारी नौकरियों के लिए कोटा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर गुरुवार को छात्रों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान राजधानी ढाका और अन्य जगहों पर हिंसा बढ़ने से कम से कम 11 और लोगों की मौत हो गई। विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद से अब तक मरने वालों की संख्या 18 हो गई है।
गृह विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया, ''शाम तक बांग्लादेश में हिंसा के कारण फंसे 310 लोग, जिनमें भारतीय, नेपाली और भूटानी शामिल हैं। वो सभी लोग डाउकी इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट के जरिए भारत आ गए हैं।''
बांग्लादेश में माहौल अशांत है
बांग्लादेश में फिलहाल माहौल अशांत बना हुआ है। यहां सरकारी नौकरियों में आरक्षण की व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं, पुलिस भी जवाबी कार्रवाई कर रही है। बिगड़े हालातों को देखते हुए ढाका में भारतीय उच्चायोग ने बांग्लादेश में रहे रहे अपने नागरिकों और छात्रों के लिए एक तत्काल एडवाइजरी जारी की। इसमें देश में बढ़ती अशांति के वजह से गैर जरूरी यात्रा से बचने और अपने घरों से बाहर कम से कम निकलने की सलाह दी है।
यह सलाह बांग्लादेशी सरकार द्वारा सभी सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों को बंद करने के फैसले और ढाका में छात्रों तथा पुलिस के बीच हाल ही में हुई हिंसक झड़पों को देखते हुए दी गई है।
सरकारी नौकरियों में लागू कोटा प्रणाली में सुधार की मांग
बांग्लादेश के प्रमुख शहरों में छात्र सरकारी नौकरियों में लागू कोटा प्रणाली में सुधार की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि मौजूदा आरक्षण व्यवस्था सरकारी सेवाओं में मेधावी छात्रों के नामांकन को काफी हद तक रोक रही है। ढाका यूनिवर्सिटी के छात्रों ने फर्स्ट और सेकंड क्लास की सरकारी नौकरियों में भर्ती के लिए चल रहे विरोध प्रदर्शन में अग्रणी भूमिका निभाई है। छात्रों की मांग है कि मौजूदा आरक्षण प्रणाली में सुधार करते हुए प्रतिभा के आधार पर सीटें भरी जाएं।