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कोविड-19: हवा में तैर रहे कोरोनावायरस से भी संक्रमित हो सकते हैं इंसान, भारतीय स्टडी में हुआ खुलासा
Tue, 03 May 2022 10:57 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Tue, 03 May 2022 10:57 PM IST
सार
अध्ययन में शामिल वैज्ञानिक शिवरंजनी मोहरीर ने कहा कि हमारे नतीजे बताते हैं कि बंद जगहों में वेंटिलेशन के अभाव में कोरोनावायरस कुछ समय के लिए हवा में रह सकता है। उन्होंने फेस मास्क पहनने का सुझाव दिया है।
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कोरोना अपडेट
- फोटो : Social Media
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विस्तार
कोरोना वायरस को लेकर हुए एक नए अध्ययन में स्वास्थ्य विशेषज्ञों कहा है कि हवा में तैर रहे कोरोना वायरस से इंसान संक्रमित हो सकते हैं। ये अध्ययन सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (सीसीएमबी), हैदराबाद और आईएमटेक, चंडीगढ़ के वैज्ञानिकों के एक समूह ने किया है।
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सीसीएमबी ने एक विज्ञप्ति में मंगलवार को कहा कि कोरोनावायरस के SARS-CoV-2 के प्रसार का सटीक कारण अभी भी संदेहों में बना हुआ है। पहले वैज्ञानिकों का विचार था कि कोरोना का वायरस सतहों से फैल रहा है, तब महामारी विज्ञानियों ने पाया कि महामारी में मास्क पहनने वाले देश मास्क न पहनने वाले देशों से कम गंभीर रूप से प्रभावित हुए थे। हालांकि, तब हवा में संक्रामक कोरोनावायरस कणों को दिखाने वाले मात्रात्मक सबूतों की कमी थी।
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इसके बाद जब जब वैज्ञानिकों ने अस्पतालों, बंद कमरों सहित कोरोना रोगियों के रहने वाले विभिन्न क्षेत्रों से एकत्र किए गए हवा के नमूनों से कोरोनावायरस की जीनोम सामग्री का विश्लेषण किया तो वैज्ञानिकों ने पाया कि कोरोना रोगियों के आसपास हवा में वायरस का प्रसार होता है। इसके साथ ही परिसर में मौजूद रोगियों की संख्या के साथ कोरोना सकारात्मकता दर में वृद्धि हुई है। इसके बाद इस अध्ययन से SARS-CoV-2 के हवा में प्रसार होने की पुष्टि की गई।
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अध्ययन में शामिल वैज्ञानिक शिवरंजनी मोहरीर ने कहा कि वैज्ञानिकों ने आईसीयू के साथ-साथ अस्पतालों के गैर-आईसीयू वार्डों में भी वायरस पाया। वैज्ञानिकों ने कहा कि अध्ययन में यह भी पाया गया कि हवा में वाइबल कोरोनावायरस भी पाया गया जो जीवित कोशिकाओं को भी संक्रमित कर सकता है और ये वायरस लंबी दूरी तक फैल सकता है। ये अध्ययन जर्नल ऑफ एरोसोल साइंस में प्रकाशित हुआ था।
वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस के बढ़ रहे प्रसार को बताते हुए फेस मास्क पहनने का सुझाव दिया है। अध्ययन में शामिल वैज्ञानिक शिवरंजनी मोहरीर ने कहा कि हमारे नतीजे बताते हैं कि बंद जगहों में वेंटिलेशन के अभाव में कोरोनावायरस कुछ समय के लिए हवा में रह सकता है।
मोहरीर ने कहा कि हमारे अवलोकन पिछले अध्ययनों के समवर्ती हैं, जो बताते हैं कि SARS-CoV-2 RNA की सांद्रता बाहरी हवा की तुलना में इनडोर वायु में ज्यादा है।