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रिपोर्ट: अमेरिका में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों में इस वजह से आ रही है कमी

Mon, 26 Feb 2018 10:15 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलूरू Updated Mon, 26 Feb 2018 10:15 AM IST
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Indian students joining American Computer Science and Engineering colleges declined
प्रतीकात्मक तस्वीर

अमेरिका में कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग प्रोग्राम में स्नातक स्तर पर एडमिशन लेने वाले भारतीयों छात्रों में साल 2016 से 2017 के बीच 21 प्रतिशत की कमी आई है। अमेरिकी नीति के राष्ट्रीय फाउंडेशन (एनएफएपी) की रिपोर्ट के अनुसार यूएस डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी द्वारा मुहैया कराए गए आंकड़ों के आधार पर बनाया गया है उससे इस गिरावट का पता चला है। एनएफएपी का कहना है कि यूएस की यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेने वाले अतंर्राष्ट्रीय छात्रों में लगभग 2016 और 2017 के बीच 4 प्रतिशत की कमी आई है। इसमें आधे से ज्यादा बच्चे भारत के हैं जो अमेरिका में ग्रैजुएशन के लिए कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग में एडमिशन लेते हैं। 

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एनएफएपी की रिपोर्ट के अनुसार वर्जिनिया की गैर लाभ संस्थान, गैर-पक्षपातपूर्ण सार्वजनिक नीति शोध संगठन ने इशारा किया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की प्रतिबंधात्मक वीजा नीति और कार्य नीति की वजह से छात्र अमेरिका में पढ़ने के लिए नहीं आ रहे हैं। इन छात्रों का अमेरिका की अर्थव्यवस्था में काफी योगदान होता है। रिपोर्ट का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के फैसले की वजह से नकदी की गंभीर कमी हो गई है। इस वजह से भी भारतीय छात्रों की संख्या में कमी आई है। मगर यह मुख्य कारण नहीं हो सकता है क्योंकि कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग प्रोग्राम में अंडर-ग्रैजुएशन (स्नातक पूर्व) के लिए अमेरिका आने वाले छात्रों की संख्या में 740 की बढ़ोत्तरी हुई है।
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एनएफएपी की रिपोर्ट के अनुसार- विदेश मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि साल 2017 में 206,708 भारतीय छात्र अमेरिका में पढ़ रहे हैं। अमेरिका की खबरों और दूसरी सूचनाओं के अनुसार अंतर्राष्ट्रीय छात्रों को पढ़ाई पूरी करने के बाद अमेरिका में नौकरी पाने की क्षमता को सीमित कर दिया गया है। ग्रैजुएशन के बाद अमेरिका की नीतियां छात्रों के लिए देश में काम करने के लिए काफी मुश्किल नीतियां बनाती है। जिसकी वजह से अब छात्र अमेरिका का पढ़ाई के लिए चयन कम कर रहे हैं।

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