पढ़ें, मौलाना ने कैसे बनाया सुभाष को पाक जासूस
राजस्थान के नागौर स्थित कुरैशियों की मस्जिद में इमामत कर मौलाना रमजान खान उर्फ हजरत पिछले 25 सालों से लोगों की आंखों में धूल झोंक रहा था। उसने समाज में अपनी इमेज भी अच्छी बनाई हुई थी। नागौर की मस्जिद में इमाम के अलावा वह मदरसे में बच्चों को कुरान भी पढ़ाता था।
शुरू में उसने कपड़ों की दुकान भी की थी। डेढ़ साल पूर्व उसकी मुलाकात शुएब नामक युवक से हुई। मूलरूप से बाड़मेर, राजस्थान के रहने वाले मौलाना रमजान को गुजरात और राजस्थान के बॉर्डर इलाकों की अच्छी जानकारी थी।
शोएब ने उससे कहा कि वह बॉर्डर पर सेना से जुड़ी जानकारियां देकर मोटा पैसा कमा सकता है। शोएब ने मौलाना की मुलाकात पीआईओ महमूद अख्तर उर्फ महबूब राजपूत से करवाई। महमूद ने मौलाना को बताया कि उसे किस तरह की जानकारियां चाहिए।
कर्ज की वजह से सुभाष को फंसाया
कर्ज की वजह से सुभाष को फंसाया
मूलरूप से इनाना, नागौर राजस्थान का रहने वाले सुभाष जांगीर के पिता करीब 40 साल पहले नागौर सिटी में आ गए थे। यहां वह सरकारी स्कूल में पीटीआई हैं। सुभाष ने शहर में ही मौलाना के पड़ोस में किराने की दुकान खोली थी।
दुकान पर भारी घाटा होने के कारण सुभाष पर काफी कर्जा हो गया था। ऐसे में मौलाना ने उसे जासूसी का लालच देकर अपने साथ मिला लिया। सुभाष ने पुलिस को बताया कि वह दो-तीन भाई मौलाना के साथ दिल्ली आया था। यहां उसकी मुलाकात महमूद से हुई थी, जिसे इन लोगों ने सेना से जुड़ी अहम जानकारियां मुहैया करवाई थीं।