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Railways: पत्थरबाजों की धरपकड़ से लेकर ट्रेन सुरक्षा तक, जानिए कैसे एआई ने बदली भारतीय रेलवे की चाल
Fri, 20 Mar 2026 09:17 PM IST
Rahul Kumar
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Rahul Kumar
Updated Fri, 20 Mar 2026 09:17 PM IST
सार
रेल मंत्रालय ने संसद में जानकारी दी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और हाई-रेजोल्यूशन कैमरों की मदद से वंदे भारत एक्सप्रेस पर पत्थरबाजी करने वाले आरोपियों को उनके घर से गिरफ्तार किया गया। सुरक्षा, सिग्नलिंग और खाने की गुणवत्ता तक सुधार के लिए रेलवे ने कवच समेत 11 अत्याधुनिक एआई तकनीकों को अपनाया है। इनकी बदौलत रेल हादसों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
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भारतीय रेलवे
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
भारतीय रेलवे अब तेजी से हाईटेक हो रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से न सिर्फ सुरक्षा मजबूत हुई है, बल्कि यात्रियों का सफर भी पहले से ज्यादा सुरक्षित और आसान बन गया है। रेल मंत्रालय ने संसद में बताया कि कैसे इन तकनीकों की मदद से पत्थरबाजों पर कार्रवाई से लेकर हादसों में बड़ी कमी तक हासिल की है।
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रेलवे ने सुरक्षा बढ़ाने के लिए कवच सिस्टम लागू किया है। जो एक उन्नत ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन तकनीक है। यह सिस्टम ट्रेन की गति और सिग्नल पर लगातार नजर रखता है। किसी खतरे की स्थिति में अपने आप ब्रेक लगाकर हादसे को टाल सकता है। एआई आधारित मॉनिटरिंग के चलते रेलवे सुरक्षा में बड़ा सुधार देखने को मिला है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जहां 2014-15 में 135 रेल हादसे दर्ज हुए थे, वहीं 2025-26 में यह संख्या घटकर सिर्फ 11 रह गई है।
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रेलवे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से पहले ही यह अंदाजा लगा लेता है कि ट्रैक में कब खराबी आ सकती है या ट्रेन के कौन से पार्ट्स कब फेल हो सकते हैं। इससे मरम्मत का काम पहले से ही प्लान हो जाता है और दुर्घटनाओं का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। स्टेशनों पर अब एआई आधारित कैमरे भी लगाए जा रहे हैं, जो ट्रेनों के नीचे के हिस्सों को स्कैन करते हैं। ये सिस्टम किसी भी तरह की टूट फूट या डैमेज को तुरंत पकड़ लेते हैं, जिससे मैनुअल जांच की जरूरत कम हो रही है। इसके अलावा एआई सिस्टम रियल टाइम में ट्रेन के पहिए, एक्सल और अन्य अहम हिस्सों की निगरानी करता है। जैसे ही किसी प्रकार की खराबी या गड़बड़ी सामने आती है, तुरंत अलर्ट जारी हो जाता है, जिससे समय रहते सुधार कर लिया जाता है और सुरक्षा बेहतर होती है।
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ट्रैक के आसपास लगे एआई सेंसर जानवरों की मौजूदगी का पता लगाएंगे
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से जानवरों की सुरक्षा पर भी खास ध्यान दे रहा है। ट्रैक के आसपास लगे एआई सेंसर जानवरों की मौजूदगी का पता लगा लेते हैं और तुरंत लोको पायलट व कंट्रोल रूम को अलर्ट भेज देते हैं। इससे समय रहते ट्रेन की रफ्तार नियंत्रित की जा सकती है और खासकर हाथियों जैसे बड़े जानवरों को हादसों से बचाने में मदद मिल रही है। रेलवे ट्रैक पर हाथियों के साथ टकराव की घटनाएं पहले एक बड़ी चिंता रही हैं, जिसे अब तकनीक के जरिए कम करने की कोशिश हो रही है। रेलवे ने यात्रियों की सुविधा बढ़ाने के लिए रेल मित्र ऐप लॉन्च किया है, जो एआई और मशीन लर्निंग पर आधारित है। इस एप के जरिए यात्री ट्रेन का लाइव स्टेटस देख सकते हैं। यात्री पीएनआर भी चेक कर सकते हैं। सीट कन्फर्म होने की संभावना जान सकते हैं और ट्रेन में खाना भी ऑर्डर कर सकते हैं। यानी सफर से जुड़ी लगभग हर जरूरी जानकारी अब एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है।
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रेल मंत्रालय ने संसद में जानकारी दी कि, रेलवे ने स्मार्ट कोच की शुरुआत की है। इसमें लगे सेंसर ट्रेन की स्थिति पर लगातार नजर रखते हैं। ये सिस्टम किसी भी संभावित खराबी का पहले ही पता लगा लेता है, जिससे समय रहते मरम्मत संभव हो पाती है। ट्रैक की मरम्मत में भी एआई की मदद से किया जा रहा है। यह तकनीक यह अनुमान लगाने लगी है कि ट्रैक कब खराब हो सकता है और उसे कब रिपेयर करना जरूरी है। इसका सीधा फायदा यह है कि ट्रेनों का संचालन ज्यादा समय पर हो रहा है और पंक्चुअलिटी करीब 90 प्रतिशत तक पहुंचने लगी है। इसके अलावा रेलवे ने कैटरिंग सेवाओं में वो बोट एआई को लागू किया है। यह सिस्टम किचन में काम करने वाले स्टाफ की गतिविधियों पर नजर रखता है। अगर कोई कर्मचारी तय नियमों का पालन नहीं करता, जैसे हाइजीन से जुड़ी लापरवाही, तो तुरंत अलर्ट जारी हो जाता है। इससे खाने की गुणवत्ता और साफ-सफाई में सुधार आया है।
मंत्रालय ने संसद को जानकारी दी कि भारतीय रेलवे की कंपनी कोनकोर अब एआई की मदद से कंटेनरों की एंट्री और एग्जिट को पूरी तरह ऑटोमैटिक बना रही है। यह सिस्टम माल को सही जगह तक गाइड करता है और पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाता है। इससे काम पहले से ज्यादा तेज, सटीक और कम खर्च में पूरा हो रहा है। इसके अलावा आईआरसीटीसी का एआई चैटबॉट दिशा 2.0 यात्रियों के लिए बड़ा बदलाव लेकर आया है। अब यात्री सिर्फ आवाज के जरिए टिकट बुक कर सकते हैं, साथ ही चैट या क्लिक के जरिए भी आसानी से काम कर सकते हैं। ओटीपी आधारित लॉगिन सिस्टम इसे सुरक्षित बनाता है। इस तकनीक से यूजर एक्सपीरियंस में करीब 70 प्रतिशत तक सुधार हुआ है। इसके अलावा एआई का इस्तेमाल अब सिग्नल सिस्टम में भी हो रहा है। यह पहले ही बता देता है कि सिग्नल कब खराब हो सकता है। डेटा मोबाइल नेटवर्क (3जी/4जी) से भेजा जाता है, इससे बड़ी दुर्घटनाओं से बचाव होता है।