Indian Railways: सालाना इंक्रीमेंट की बाट जोह रहे ये रेलवे कर्मी, सुप्रीम कोर्ट के फैसले का नहीं हो रहा पालन!
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विस्तार
भारतीय रेलवे के ऐसे कर्मियों को 'अनुमानित वार्षिक वेतन वृद्धि' का लाभ नहीं मिल पा रहा है, जो सेवानिवृत्ति के करीब होते हैं। इसके चलते रिटायरमेंट पर तय होने वाली पेंशन आदि पर असर पड़ता है। इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर एसोसिएशन 'आईआरटीएसए' ने इस संबंध में आवाज उठाई है। एसोसिएशन द्वारा 13 जनवरी को डीओपीटी सचिव को लिखे गए पत्र में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट सहित कई उच्च न्यायालयों से कर्मियों के पक्ष में फैसला आने के बावजूद यह मुद्दा लंबे समय से लटका हुआ है। एसोसिएशन का कहना है कि अनुमानित वार्षिक वेतन वृद्धि सामान्य तौर पर पहली जुलाई या पहली जनवरी को देय होती है। कई बार यह तिथि आगे पीछे सरक जाती है। अनेक कर्मचारी ऐसे हैं, जो इस इन्क्रीमेंट को प्राप्त करने से पहले ही यानी 30 जून या 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त हो जाते हैं। ऐसे में उन्हें इंक्रीमेंट का फायदा नहीं मिल पाता।
कर्नाटक उच्च न्यायालय की खंडपीठ से सहमति
इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर एसोसिएशन 'आईआरटीएसए' द्वारा अपने पत्र में कहा गया है कि कर्नाटक उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच ने कर्नाटक पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड 'केपीटीसीएल' को एक मामले में वार्षिक वेतन वृद्धि देने का निर्देश दिया था। मूल रिट याचिकाकर्ता जो वर्ष के अंतिम दिन रिटायर हो रहा था, उसे अच्छे आचरण एवं कुशलता से कार्य करने के चलते उक्त लाभ देने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने कर्नाटक उच्च न्यायालय की खंडपीठ के साथ पूरी सहमति जताई थी। सर्वोच्च अदालत का कहना था कि मूल रिट याचिकाकर्ताओं (सेवानिवृत्त कर्मचारियों) को उनकी सेवा के अंतिम दिन अर्जित एक वार्षिक वेतन वृद्धि देने का सही निर्देश दिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने इसमें शामिल कानून की व्याख्या की है। उसमें कहा गया है कि विभिन्न न्यायालयों में सुनाए गए सभी प्रासंगिक निर्णयों को ध्यान में रखते हुए 2023 की सिविल अपील संख्या 2471 दिनांक 11.04.2023 में एक विस्तृत तर्कसंगत निर्णय के माध्यम से योग्यता के आधार पर काल्पनिक वेतन वृद्धि के मुद्दे को लेकर निर्णय दिया है।
सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में क्या कहा?
अगर सेवानिवृत्ति से पहले कर्मचारी को नोशनल इंक्रीमेंट यानी काल्पनिक वेतन वृद्धि नहीं मिलती है, तो इससे सरकारी कर्मचारी को वार्षिक वेतन वृद्धि के लाभ से वंचित करने की मनमानी को बढ़ावा मिलेगा। उसके द्वारा पिछले वर्ष में अच्छे आचरण और कुशलता के साथ काम किया गया है। ऐसे में वेतन वृद्धि न देना, किसी व्यक्ति को बिना किसी गलती के दंडित करने जैसा होगा। सर्वोच्च अदालत का कहना था कि वेतन वृद्धि, केवल दंड के माध्यम से रोकी जा सकती है। वह भी उस वक्त, जब किसी कर्मचारी ने कर्तव्य एवं कुशलता से अपना कार्य नहीं किया है। नोशनल इंक्रीमेंट रोक कर किसी ऐसी व्याख्या से बचना चाहिए, जिसमें मनमानी या अनुचित भाव को बढ़ावा मिलता हो। यह एक सरकारी कर्मचारी को उस वार्षिक वेतन वृद्धि से वंचित करने के समान होगा, जिसके लिए उसने बीते एक वर्ष में अच्छा व्यवहार प्रदर्शित किया है। उसकी सेवाओं को सराहना मिली है। वेतन वृद्धि प्राप्त करने की पात्रता तब स्पष्ट हो जाती है, जब सरकारी कर्मचारी अच्छे आचरण के साथ अपेक्षित सेवा अवधि पूरी कर लेता है। अच्छे व्यवहार और कुशलता से काम करने के लिए संबंधित कर्मचारी को वैध वार्षिक वेतन वृद्धि मिलनी ही चाहिए।
सभी हस्तक्षेपकर्ता समान राहत पाने के हकदार
सुप्रीम कोर्ट ने पी. अय्यमपेरुमल मामले में मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा अपनाए गए दृष्टिकोण और अन्य उच्च न्यायालयों के निर्णयों से पूरी तरह सहमति जताई है। यह स्पष्ट है कि सर्वोच्च न्यायालय, कर्नाटक उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच से पूरी तरह सहमत है। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने मूल रिट याचिकाकर्ताओं को उनकी सेवा के अंतिम दिन अर्जित एक वार्षिक वेतन वृद्धि देने का सही निर्देश दिया है। वह वेतन वृद्धि, उसकी सेवानिवृत्ति की तारीख से एक वर्ष पहले किए गए अच्छे व्यवहार और कुशलता के साथ काम करने के चलते दी गई है। एक ही मुद्दे पर सभी हस्तक्षेप आवेदनों को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अनुमति दी गई है। सभी हस्तक्षेपकर्ता समान राहत पाने के हकदार हैं। विभिन्न उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय, उनमें उद्धृत कानूनी आधारों पर आधारित हैं। उन्हें समान रूप से सेवानिवृत्त कर्मचारियों पर लागू किया जाना चाहिए। भले ही कोई कर्मचारी मूल आवेदकों में शामिल हो या नहीं। उसने न्यायालय की शरण ली है या नहीं, उसे वह लाभ मिलना ही चाहिए। उक्त मामले में भारत के संविधान के अनुच्छेद 14,16 और 39 में निर्धारित मौलिक संवैधानिक अधिकारों का हवाला दिया गया है। इन सबके मद्देनजर, एसोसिएशन ने डीओपीटी सचिव से आग्रह किया है कि वे 30 जून/31 दिसंबर को सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को भी उनके पेंशन लाभ के लिए अनुमानित वार्षिक वेतन वृद्धि (1 जुलाई/1 जनवरी को देय) देने संबंधी आवश्यक आदेश जारी करें।
इन केसों में अनुमानित वार्षिक वेतन वृद्धि को बताया जायज
- सुप्रीम कोर्ट द्वारा 11 अप्रैल 2023 को अपील संख्या 2471 ऑफ 2023 के तहत दिया गया फैसला
- डीओपीटी का 24 जून 2021 को जारी कार्यालय ज्ञापन 1453545/2021-एस्टेब्लिसमेंट पे-(1)
- रेलवे बोर्ड द्वारा 21 अप्रैल 2023 को जारी कार्यालय ज्ञापन PC-VI/2020/Misc
- रेलवे बोर्ड द्वारा 20 जून 2023 को जारी पत्र संख्या PC-VI/2020/CC/13
- कर्नाटक हाईकोर्ट की डिवीजन बैंच द्वारा 'कर्नाटक पावर ट्रांसमीशन कॉरपोरेशन लिमिटेड' को दिया गया निर्देश
- दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा रिट पेटिशन नंबर 10509/2019, 23 जनवरी 2020 को गोपाल सिंह बनाम भारत सरकार एवं अन्य के मामले में दिया गया फैसला
- इलाहबाद उच्च न्यायालय द्वारा नंद विजय सिंह एवं अन्य, रिट संख्या 13299/2020 में 29 जून 2021 को सुनाया गया फैसला
- मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का योगेंद्र सिंह भदौरिया बनाम स्टेट मध्य प्रदेश केस में दिया गया फैसला
- उड़ीसा हाईकोर्ट द्वारा 30 जुलाई 2021 में एएफआर अरुण कुमार बिस्वाल बनाम स्टेट उड़ीसा रिट पीटिशन संख्या 17715/2020 में दिया फैसला
- गुजरात हाईकोर्ट का स्टेट गुजरात बनाम तख्तसिन्ह उदेसिन्ह सोंगेरा अपील संख्या 868/2021 में दिया फैसला