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ट्रंप के मध्यस्थता के बयानों को गंभीरता से नहीं लेता भारत, पहले भी ले चुके हैं 'यू-टर्न'

Tue, 10 Sep 2019 07:18 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला
शशिधर पाठक, अमर उजाला Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 10 Sep 2019 07:18 PM IST
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Indian never offensive on US President Donald Trump mediation offers on Kashmir
Narendra Modi and Donald Trump at G7 Summit France - फोटो : PTI

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से मदद की पेशकश की है। ट्रंप ने कहा कि भारत-पाकिस्तान के बीच में तनाव काफी कम हुआ है और दोनों देश चाहें तो वह मदद के लिए तैयार हैं। ट्रंप के इस बयान पर राजनयिक सूत्रों का कहना है कि आखिर वह कौन सी मदद करेंगे? उनसे मदद कौन मांग रहा है? सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप और उनके विदेश विभाग को पता है कि भारत पड़ोसी देश पाकिस्तान के साथ दिपक्षीय मामले में किसी तीसरे की मध्यस्थता के लिए कभी तैयार नहीं होगा। इसलिए ट्रंप के इस बयान को गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है।

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मीडिया के सवालों पर बोल जाते हैं ट्रंप

राष्ट्रपति ट्रंप से मीडिया जब सवाल पूछती है, तो वह निराश नहीं करते। अमेरिका से लौटे एक राजनयिक ने बताया कि वह अपने हिसाब से कुछ न कुछ डिजाइन तैयार करके बोल जाते हैं। इसलिए कई बार जो उन्होंने पिछली बार कहा है, उसके विपरीत भी बयान दे देते हैं। सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप का ताजा बयान इसी तरह के क्रम में आया है। ताजा बयान में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि यदि भारत और पाकिस्तान दोनों चाहें तो वह मदद करने के लिए तैयार हैं। सूत्रों का कहना है कि पिछले महीने फ्रांस के बियारेत्ज में जी-7 की बैठक से इतर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता में राष्ट्रपति ट्रंप ने मध्यस्थता की जरूरत से साफ इनकार कर दिया था। अमेरिकी विदेश विभाग भी कश्मीर को भारत, पाकिस्तान का द्विपक्षीय मामला मानता है।

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सितंबर के आखिरी सप्ताह में आमने-सामने होंगे भारत-पाक

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सितंबर के आखिरी सप्ताह में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में हिस्सा लेने जाएंगे। वहां पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान भी होंगे। प्रधानमंत्री इमरान खान 27 सितंबर को प्रस्तावित अपने संबोधन में कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय रंग देने की कोशिश कर सकते हैं। भारत ने भी प्रधानमंत्री इमरान खान और पाकिस्तान के तमाम दावे की पोल खोलने की कूटनीतिक तैयारी तेज कर दी है। भारत का लगातार कहना है कि जम्मू-कश्मीर की वैधानिक स्थिति में बदलाव उसका आंतरिक मामला है। भारत जम्मू-कश्मीर में शांति, सौहार्द, स्थायित्व, विकास और मानव अधिकारों की सुरक्षा तथा संरक्षण के लिए लगातार प्रतिबद्ध है और अपनी भूमिका को जिम्मेदारी के साथ पूरा कर रहा है।

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इस दौरान भारत पाकिस्तान से प्रायोजित आतंकवाद पर एक बार फिर करारा प्रहार कर सकता है। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद के विरुद्ध सहयोग जारी रखने, आतंकवाद को शह देने वाले देशों की वित्तीय मदद रोकने समेत कई मुद्दों पर पाकिस्तान को घेर सकते हैं।

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