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मेघालय खदान हादसा: भारतीय नौसेना से छूटा क्षत-विक्षत शव

Thu, 24 Jan 2019 10:45 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयंतिया हिल्स
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयंतिया हिल्स Published by: Sneha Baluni Updated Thu, 24 Jan 2019 10:45 AM IST
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Indian Navy lost track of the disintegrating body while trying to pull it out from illegal coal mine
मेघालय खदान

मेघालय की अवैध खदान से खनिकों को बाहर निकालने का काम इस समय भारतीय नौसेना कर रही है। इस खदान में पिछले साल 13 दिसंबर से 15 खनिक फंसे हुए हैं। डर है कि सभी की मौत हो चुकी है। पूर्वी जयंतिया हिल्स से एक खनिक के विघटित (क्षत-विक्षत) शव को निकालते समय वह सेना से छूट गया। मंगलवार शाम को रिमोट ऑपरेटिड अंडरवाटर व्हीकल (आरओवी) के जरिए नौसेना खनिक के शव को निकाल रही थी तभी उसकी पकड़ ढीली हो गई। बुधवार को कई बार कोशिश करने के बावजूद उस शव का कुछ पता नहीं लग पाया। आरओवी वीडियो रिकॉर्डिंग भी कर सकता है।

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इस हफ्ते की शुरुआत में राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक रिपोर्ट जमा करवाई थी। जिसमें उसने कहा था कि खोपड़ी, कलाई और पैर शरीर को दोबारा प्राप्त करने की शुरुआती कोशिशों के दौरान विघटित हो गए हैं। बचाव कार्य के आधिकारिक प्रवक्ता आर सुसंगी ने कहा, 'भारतीय नौसेना ने आरओवी के जरिए आज खदान के अंदर अपना काम शुरू किया जिससे कि उन अवशेषों का पता लगाया जा सके जो कल आरओसी से ऊपर खींचने के दौरान छूट गए थे। पाइप, केबल, डेबरिस की मौजूदगी के कारण शरीर का पता लगाने की कोशिशें अभी तक सफल नहीं रही हैं।' 
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13 दिसंबर से खदान के अंदर 15 खनिक फंस गए हैं और डर है कि सभी की खदान के अंदर मौत हो चुकी है। उन्हें बाहर निकालने के लिए बचाव कार्य जारी है। 2014 में राष्ट्रीय हरित प्राधिकारण द्वारा प्रतिबंध लगाने के बावजूद मेघालय में अवैध खनन जारी है। पिछले हफ्ते कोयला खदान के अंदर एक शव का पता नौसेना के आरओवी के जरिए चला था। वह 160 फीट पर था। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई स्टेटस रिपोर्ट में मेघालय सरकार का कहना था कि संभवत सभी 14 खनिकों की मौत हो चुकी है।
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16 जनवरी को एक खनिक का शव मिला था। हालांकि पांच के परिजन शव की शिनाख्त नहीं कर पाए थे। नौसेना के अधिकारियों को पानी में करीब 160 फीट नीचे एक खनिक का शव दिखा था जिसे आरओवी से ही बाहर निकालने की कोशिश की गई थी लेकिन डॉक्टरों ने यह कह कर शव बाहर निकालने के लिए मना कर दिया था कि पानी में गलने के कारण जोर लगाने पर यह क्षत विक्षत हो सकता है। वहीं मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा कई बार मीडिया से कह चुके हैं कि शव को बाहर निकालना असंभव के समान है।

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