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Navy: 5 अरब डॉलर के सौदे के लिए राफेल और एफ-18 के बीच कड़ा मुकाबला, नौसेना कर रही रिपोर्ट का मूल्यांकन
Thu, 22 Sep 2022 05:33 PM IST
Amit Mandal
एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Thu, 22 Sep 2022 05:33 PM IST
सार
पहले लगभग 57 विमान खरीदने की योजना बनाई गई थी, लेकिन अब इसे घटाकर केवल 26 कर दिया गया है। पिछली बार जब दोनों विमानों ने एक भारतीय निविदा में भाग लिया था, तो राफेल विजेता के रूप में उभरा था।
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fighter jets
- फोटो : social media
विस्तार
26 लड़ाकू विमान खरीदने के लिए 5 अरब डॉलर के सौदे के लिए फ्रांसीसी लड़ाकू विमान राफेल और अमेरिकी लड़ाकू विमान एफ-18 में कड़ी टक्कर है। इन दोनों विमानों के व्यापक परीक्षण की रिपोर्ट का भारतीय नौसेना मुख्यालय मूल्यांकन कर रही है। विमान को हाल ही में कोच्चि में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कमीशन किए गए अपने नवीनतम विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत से संचालन के लिए सरकार के सौदे के तहत इन्हें खरीदने की योजना है।
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गोवा में हुआ दोनों विमानों का परीक्षण
एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, लड़ाकू विमान राफेल और एफ-18 दोनों का गोवा में एक नौसेना टीम ने व्यापक परीक्षण किया था। रिपोर्ट मुख्यालय के पास है और अंतिम शॉर्टलिस्टिंग के लिए तैयार की जा रही है। उन्होंने कहा कि मूल्यांकन यह देखने के लिए है कि विमान नौसैनिक जरूरतों के तकनीकी मानकों को पूरा करता है या नहीं।
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अमेरिकी विमान एफ-18 लगभग एक लाख टन वजन के वाहक के लिए सक्षम हैं जबकि फ्रांसीसी राफेल 60,000 टन वजन के वाहक के लिए बनाए गए हैं। नौसेना के पास मिग-29K हैं जो आईएनएस विक्रमादित्य से संचालित होते हैं और उनका सेवा क्षमता रिकॉर्ड बहुत मजबूत नहीं है और उनकी संख्या केवल एक वाहक के लिए ही पर्याप्त मानी जाती है।
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परीक्षण रिपोर्ट से तय होगा विजेता का नाम
परीक्षण रिपोर्ट प्रतियोगिता के विजेता का नाम तय करेगी। पहले लगभग 57 विमान खरीदने की योजना बनाई गई थी, लेकिन अब इसे घटाकर केवल 26 कर दिया गया है। पिछली बार जब दोनों विमानों ने एक भारतीय निविदा में भाग लिया था, तो राफेल एक विजेता के रूप में उभरा था, लेकिन तकनीकी मुद्दों के कारण यह सौदा पूरा नहीं हो सका।
हालांकि, पिछले सौदे के अंतिम चयन के आधार पर सरकार ने 36 राफेल खरीदे, जिसने पूर्वी लद्दाख और अन्य क्षेत्रों में चीन के खिलाफ तैनाती के दौरान एक बड़ी भूमिका निभाई। अमेरिकी पक्ष यह दावा करता रहा है कि वह पिछली प्रतियोगिता की तुलना में विमान के प्रदर्शन और क्षमताओं में सुधार करते हुए भारतीय नौसेना की सभी आवश्यकताओं को पूरा करता है।