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भारत-अमेरिकी ने हिंद महासागर में किया संयुक्त अभ्यास, चीन को भेजा गया कड़ा संदेश
Tue, 21 Jul 2020 09:05 AM IST
अनवर अंसारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अनवर अंसारी
Updated Tue, 21 Jul 2020 09:05 AM IST
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US navy warship
- फोटो : ANI
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पूर्वी लद्दाख में चल रहे सैन्य गतिरोध के बीच चीन को एक कड़ा सबक देने के लिए भारतीय नौसेना ने अमेरिका नौसेना के साथ संयुक्त अभ्यास किया। विमानवाहक पोत यूएसएस निमित्ज के नेतृत्व में एक अमेरिकी लड़ाकू बेड़े ने सोमवार को हिंद महासागर में भारतीय युद्धपोतों के साथ संयुक्त अभ्यास किया।
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भारत ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में जगुआर लड़ाकू विमानों को तैनात किया, जो मलक्का जलडमरूमध्य से गुजरने वाले चीन के महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों पर हावी रहे। भारत का अमेरिकी नौसेना के साथ संयुक्त अभ्यास करना और फिर लड़ाकू विमानों को तैनात करना एक रणनीतिक निर्णय प्रतीत हो रहा है, जिससे चीन को एक संदेश भेजा जा सके।
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सूत्रों ने बताया कि भारतीय वायुसेना ने खतरनाक एंटी-शिप हारपून मिसाइलों से लैस 10 जगुआर लड़ाकू विमानों को अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में कार निकोबार एयरबेस पर तैनात किया है। वैसे तो यह बेस भारत के पूर्वी तट से 1200 किलोमीटर दूर है, लेकिन दक्षिणपूर्व एशिया के समुद्री मार्गों पर नजर रखने के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है।
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यह अभ्यास एक पासिंग एक्सरसाइज था, जिसमें परमाणु-शक्ति से लैस यूएसएस निमित्ज और उसके तीन युद्धपोतों के साथ हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर) में अभ्यास किया गया। गौरतलब है कि दक्षिण चीन सागर में चीन अपने आक्रामक व्यवहार को दिखा रहा है, जिससे उसके पड़ोसी देशों को खासा परेशानी उठानी पड़ रही है।
यूएसएस निमित्ज, गाइडेड-मिसाइल क्रूजर यूएसएस प्रिंसटन, मिसाइल डेस्ट्रॉयर यूएसएस स्टेरेट और यूएसएस राल्फ जॉनसन के साथ अमेरिका ने भारतीय युद्धपोत आईएनएस राणा, आईएनएस सह्याद्री और आईएनएस शिवालिक और मिसाइल कोरवेट आईएनएस कमोर्टा के साथ अभ्यास किया।
अमेरिकी कमांडर रियर एडमिरल जिम किर्क ने कहा कि यूएसएस निमित्ज वाहक स्ट्राइक ग्रुप (सीएसजी) के भारतीय पूर्वी बेड़े के साथ अभ्यास करने से हमारी अंतर-क्षमता में सुधार हुआ है और यह हमारे दोनों नौसेनाओं के लचीलेपन का प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि हिंद महासागर में निमित्ज वाहक स्ट्राइक ग्रुप का अभ्यास एक खुले और मुक्त भारत-प्रशांत क्षेत्र का समर्थन करता है। साथ ही यह क्षेत्र को हमारे मित्रों और सहयोगियों के साथ सुरक्षा प्रदान करता है।