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चंद्रयान का 24 साल का सफर: ऋग्वेद के मंत्र से 'सोमयान', 15 अगस्त के भाषण में चंद्रयान नाम का हुआ था एलान

Thu, 24 Aug 2023 06:49 PM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Thu, 24 Aug 2023 06:49 PM IST
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सार
Chandrayaan Naming: भारत द्वारा चंद्र मिशन को अंजाम देने की परिकल्पना पहली बार 1999 में की गई थी। साल 1998 में पोखरण-ll परीक्षण किया गया था, उसके एक साल बाद मई 1999 में दिल्ली में भारतीय विज्ञान अकादमी का एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसके बाद 2000 में एस्ट्रोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया की बैठक हुई, उसमें भी विचार सामने आया।
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Indian Moon missions story from Somayaan to Chandrayaan and Atal Bihari Vajpayee role
चंद्रयान - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला दुनिया का पहला देश बन चुका है। लैंडर के चांद की सतह पर उतरने के बाद रोवर ने भी अपना काम शुरू कर दिया। अगले 14 दिन रोवर कई अहम जानकारियां जुटाएगा। भारत की इस उपलब्धि पर पूरी दुनिया से बधाई मिल रही है।   


इस बीच यह भी जानने की उत्सुकता हो रही है कि आखिर मिशन की शुरुआत कब हुई? मिशन का नाम चंद्रयान ही क्यों पड़ा? यह नाम किसने दिया? इसके पीछे की कहानी क्या है? आइये जानते हैं...

चंद्रयान 3
चंद्रयान 3 - फोटो : social media
आखिर मिशन की शुरुआत कब हुई?
भारत द्वारा चंद्र मिशन को अंजाम देने की परिकल्पना पहली बार 1999 में की गई थी। साल 1998 में पोखरण-ll परीक्षण किया गया था उसके एक साल बाद मई 1999 में दिल्ली में भारतीय विज्ञान अकादमी का एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसके बाद 2000 में एस्ट्रोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया की बैठक हुई उसमें भी विचार सामने लाया आया। 

ऐसे विशेषज्ञों की सिफारिशों के आधार पर इसरो ने राष्ट्रीय चंद्र मिशन टास्क फोर्स का गठन किया। इस टास्क फोर्स में देश के जाने-माने वैज्ञानिकों और प्रौद्योगिकीविदों को शामिल किया गया। इन्हीं विषेशज्ञों ने चंद्रमा मिशन के लक्ष्य बताए। तब पैनल ने सर्वसम्मति से सिफारिश की कि भारत एक चंद्र मिशन को अंजाम दे। नवंबर 2003 में, केंद्र सरकार ने पहले चंद्रमा मिशन के लिए इसरो के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी - फोटो : सोशल मीडिया
मिशन का नाम चंद्रयान ही क्यों पड़ा?
विभिन्न पौराणिक कथाओं में चंद्रमा को देवता के रूप में पूजा जाता है, जिसे भारत में चंद्र या सोम, रोमन में लूना, ग्रीक में सेलेन और चीनी में चांग'ए कहा जाता है। हमारे मिशन का नाम सबसे पुराने भारतीय ग्रंथों में से एक 'ऋग्वेद' के एक संस्कृत श्लोक 'त्वं सोम प्रचिकितो मनीषा। त्वं राजिष्ठ मनु नेषि पन्थाम्॥' से लिया गया था। श्लोक का अर्थ है- 'हे सोम (चंद्र)! अपनी बुद्धि से हम तुम्हें जानें। तुम हमें उत्तम पथ पर ले चलो।'

हालांकि, तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के विचार अलग थे। इसरो के तत्कालीन अध्यक्ष डॉ के कस्तूरीरंगन के मुताबिक, 'वाजपेयी ने कहा था कि मिशन को चंद्रयान कहा जाना चाहिए, न कि सोमयान, क्योंकि देश एक आर्थिक शक्ति के रूप में उभरा है,और चंद्रमा पर कई खोजपूर्ण यात्राएं करेगा।'

प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 2003 में लाल किले से भारत के 56 वें स्वतंत्रता दिवस पर भाषण देते हुए चंद्रयान-1 की घोषणा की थी। उन्होंने कहा, 'हमारा देश अब विज्ञान के क्षेत्र में ऊंची उड़ान भरने के लिए तैयार है। मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि भारत 2008 तक चंद्रमा पर अपना अंतरिक्ष यान भेजेगा। इसे चंद्रयान नाम दिया जा रहा है।'

चंद्रयान
चंद्रयान - फोटो : ISRO
फिर शुरू हुए मिशन और रच गया इतिहास
बुधवार को चांद की सतह पर उतरा चंद्रयान-3 चंद्रयान शृंखला का तीसरा मिशन है। मिशन ने 14 जुलाई को दोपहर 2:35 बजे श्रीहरिकोटा केन्द्र से उड़ान भरी थी और अनुसार 23 अगस्त को चंद्रमा पर उतरा। भारत के लिए यह उपलब्धि अनोखी थी क्योंकि भारत चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचा जहां अब तक कोई नहीं पहुंच पाया है। 

चंद्रयान-3 मिशन चंद्रयान-2 का ही अगला चरण था। इससे पहले 22 जुलाई 2019 को चंद्रयान-2 लॉन्च किया गया था। यह चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला किसी भी देश का पहला अंतरिक्ष मिशन था। हालांकि, मिशन का विक्रम चंद्र लैंडर छह सितंबर 2029 को चंद्रमा पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। लगभग तीन महीने बाद नासा ने इसका मलबा खोजा। असफलता के बावजूद, मिशन पूरी तरह से असफल नहीं हुआ। इसकी वजह थी कि मिशन का ऑर्बिटर घटक सुचारू रूप से काम करता रहा और ढेर सारे नए डेटा जुटाए जिससे चंद्रमा और उसके पर्यावरण के बारे में इसरो को नई जानकारियां मिलीं।

चंद्रयान-1 के विपरीत, चंद्रयान-2 ने चंद्रमा की सतह पर अपने विक्रम मॉड्यूल को सॉफ्ट-लैंड करने की कोशिश की। उड़ान भरने पर चंद्रयान-1 का वजन 1380 किलोग्राम था, जबकि चंद्रयान-2 का वजन 3850 किलोग्राम था। वहीं, चंद्रयान-3 का वजन 3,900 किलोग्राम है।

चंद्रयान 3
चंद्रयान 3 - फोटो : सोशल मीडिया
14 दिन क्या करेगा चंद्रयान-3? 
चंद्रयान-3 का लैंडर मॉड्यूल लैंडर के कम्प्लीट कॉन्फिगरेशन को बताता है। इसमें रोवर का वजन 26 किलोग्राम है। रोवर चंद्रयान-2 के विक्रम रोवर के जैसे ही है। प्रज्ञान रोवर कल ही बाहर आ गया था। सॉफ्ट लैंडिंग के साथ ही लैंडर और रोवर ने चांद की सतह पर अपना काम करना शुरू कर दिया है। लैंडर के साथ ही चांद की सतह पर उतरने वाले रोवर अपने पहियों वाले उपकरण के साथ वहां की सतह की पूरी जानकारी इसरो के वैज्ञानिकों को देना शुरू कर देगा। 

वैज्ञानिकों के मुताबिक, सॉफ्ट लैंडिंग के बाद रोवर और लैंडर से जो जानकारी इसरो को मिलेगी, वह 14 दिनों तक ही होगी, क्योंकि चांद को पूरी रोशनी सिर्फ इसी दौर में मिलेगी। उनका कहना है कि रोवर से मिलने वाली जानकारी बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण इसलिए मानी जाती है, क्योंकि वह चांद की सतह पर जाकर आगे बढ़ता रहता है।
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