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जमीन और आसमान ही नहीं, अंतरिक्ष में भी हमसे पीछे है पाकिस्तान
Mon, 18 Mar 2019 01:46 PM IST
Priyesh Mishra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Priyesh Mishra
Updated Mon, 18 Mar 2019 01:46 PM IST
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भारतीय खुफिया उपग्रह
- फोटो : The Hacker News
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दुनिया में बढ़ती हथियारों की होड़ ने लगभग सभी देशों को अपना रक्षा बजट बढ़ाने के लिए मजबूर कर दिया है। हर देश अपने प्रतिस्पर्धी से हथियार और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अग्रणी होने की कोशिश में लगा है। जमीन पर भारी भरकम सेना के बावजूद इस समय दुनिया के अधिकतर देश अंतरिक्ष टेक्नोलॉजी को विकसित और आधुनिक बनाने के लिए प्रयासरत हैं।
अमेरिका, रूस और चीन ने जहां अंतरिक्ष में अपने पुराने हो चुके सेटेलाइट को मिसाइल के जरिए नष्ट कर दुनिया में खुद को महाशक्तिशाली होने का संदेश दिया। ऐसा माना जा रहा है कि कई और देश जल्द ही यह क्षमता हासिल कर लेगें। जिसमें भारत भी शामिल होगा।
मिसाइल विकास के अलावा इस समय सैन्य उपग्रह (मिलिट्री सेटेलाइट) को प्रक्षेपित करने की भी होड़ मची है। बहुत कम लोगों को यह पता होगा कि इस मामले में हम कई विकसित देशों से बहुत आगे हैं। जबकि, पाकिस्तान तो हमारे सामने कहीं टिकता ही नहीं है। आगे जानिए कैसी है भारत की अंतरिक्ष में ताकत और सैन्य उपग्रह के मामले में दुनिया से कितना आगे हैं हम?
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किसी भी सैन्य मिशन में गोपनीय जानकारी, नेविगेशन और सैन्य संचार की अहम भूमिका होती है। आधुनिक समय में जनहानि को ध्यान में रखते हुए यह सभी काम सीधे सेटेलाइट के जरिए किए जाते हैं। यह सस्ता, कम जोखिम वाला और तकनीकी रूप से ज्यादा प्रभावी होता है। भारत ने पुलवामा और बालाकोट में स्ट्राइक के समय अपने सैन्य उपग्रहों का बखूबी उपयोग किया था।
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अमेरिका, रूस और चीन ने जहां अंतरिक्ष में अपने पुराने हो चुके सेटेलाइट को मिसाइल के जरिए नष्ट कर दुनिया में खुद को महाशक्तिशाली होने का संदेश दिया। ऐसा माना जा रहा है कि कई और देश जल्द ही यह क्षमता हासिल कर लेगें। जिसमें भारत भी शामिल होगा।
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मिसाइल विकास के अलावा इस समय सैन्य उपग्रह (मिलिट्री सेटेलाइट) को प्रक्षेपित करने की भी होड़ मची है। बहुत कम लोगों को यह पता होगा कि इस मामले में हम कई विकसित देशों से बहुत आगे हैं। जबकि, पाकिस्तान तो हमारे सामने कहीं टिकता ही नहीं है। आगे जानिए कैसी है भारत की अंतरिक्ष में ताकत और सैन्य उपग्रह के मामले में दुनिया से कितना आगे हैं हम?
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किसी भी सैन्य मिशन में गोपनीय जानकारी, नेविगेशन और सैन्य संचार की अहम भूमिका होती है। आधुनिक समय में जनहानि को ध्यान में रखते हुए यह सभी काम सीधे सेटेलाइट के जरिए किए जाते हैं। यह सस्ता, कम जोखिम वाला और तकनीकी रूप से ज्यादा प्रभावी होता है। भारत ने पुलवामा और बालाकोट में स्ट्राइक के समय अपने सैन्य उपग्रहों का बखूबी उपयोग किया था।
कब शुरू हुई थी होड़
प्रतीकात्मक तस्वीर
साल 1960 में अमेरिका और तत्कालीन सोवित संघ में अंतरिक्ष के क्षेत्र में आगे निकलने की खुलेआम होड़ लगी थी। दोनों देश एक दूसरे को पीछे छोड़ने के लिए एक के बाद एक अंतरिक्ष कार्यक्रम लांच कर रहे थे। उसी समय सैन्य उपग्रहों को भी लेकर प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। क्योंकि अघोषित शीत युद्ध में सेटेलाइट खुफिया निगरानी करने का एक अहम हथियार था। हालाकि खुफिया जानकारी जुटाने के लिए आज भी इसका बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है।
रूस- 74
चीन- 68
फ्रांस- 8
इजरायल- 8
भारत- 7
यूनाइटेड किंगडम- 7
जर्मनी- 7
इटली- 6
जापान- 4
सैन्य सेटेलाइट्स के मामले में बहुत आगे है अमेरिका
2018 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका के पास दुनिया की सबसे ज्यादा सैन्य उपग्रह हैं। एशिया में मिलिट्री सेटेलाइट के मामले में चीन के बाद भारत का स्थान है। अमेरिका के मिलिट्री सेटेलाइट के पहले प्रोजेक्ट का नाम वेपन सिस्टम 117एल था। इसके बाद उन्होंने कई बड़े मिलिट्री सेटेलाइट लॉन्च किए। जिसमें अंतरिक्ष युद्ध की क्षमता रखने वाला वाइडबैंड ग्लोबल SATCOM भी शामिल है।यहां जानिए किसके पास कितने है सैन्य उपग्रह
अमेरिका- 123 सेटेलाइटरूस- 74
चीन- 68
फ्रांस- 8
इजरायल- 8
भारत- 7
यूनाइटेड किंगडम- 7
जर्मनी- 7
इटली- 6
जापान- 4
सैन्य उपग्रह मामले में भारत कहां
भारतीय सेना
- फोटो : Magzter
उरी और पुलवामा हमले के बाद सुरक्षाबलों द्वारा पाक की सरजमीं पर आतंक के विरुद्ध की गई कार्रवाई में इन खुफिया सैन्य उपग्रहों ने बड़ी भूमिका निभाई थी। हमने दुश्मन देश में इसकी मदद से कई खुफिया जानकारियां जुटाई थी। जिसने भारतीय सैन्य मिशन को सफल बनाया।
भारत के पास अभी तक कुल सात सैन्य उपग्रह हैं। हालाकि इनके बेड़े में जल्द ही कुछ नए सदस्य शामिल होने वाले हैं। 1 अप्रैल को प्रक्षेपित होने वाले रॉकेट पीएसएलवी सी 45 के द्वारा एडवांस इलेक्ट्रॉनिक खुफिया उपग्रह के इएमआईएसएटी को अन्य 28 उपग्रहों के साथ पृथ्वी की अलग-अलग कक्षाओं में स्थापित किया जाएगा।
भारत के सैन्य उपग्रहों की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हम पाकिस्तान ने 87 फीसदी भूभाग पर हल पल नजर रख सकते हैं। इतना ही नहीं, इन उपग्रहों की मदद से हाई-डेफिनेशन (HD) क्वालिटी की तस्वीरें भी लिए जा सकते हैं।
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार भारतीय खुफिया सेटेलाइट पाक के बड़े भूभाग की लगातार मैपिंग कर रहे हैं। जिसकी जानकारी सुरक्षा एजेंसियों के साथ साझा भी की जा रही है। हालाकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
भारत के पास अभी तक कुल सात सैन्य उपग्रह हैं। हालाकि इनके बेड़े में जल्द ही कुछ नए सदस्य शामिल होने वाले हैं। 1 अप्रैल को प्रक्षेपित होने वाले रॉकेट पीएसएलवी सी 45 के द्वारा एडवांस इलेक्ट्रॉनिक खुफिया उपग्रह के इएमआईएसएटी को अन्य 28 उपग्रहों के साथ पृथ्वी की अलग-अलग कक्षाओं में स्थापित किया जाएगा।
भारत के सैन्य उपग्रहों की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हम पाकिस्तान ने 87 फीसदी भूभाग पर हल पल नजर रख सकते हैं। इतना ही नहीं, इन उपग्रहों की मदद से हाई-डेफिनेशन (HD) क्वालिटी की तस्वीरें भी लिए जा सकते हैं।
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार भारतीय खुफिया सेटेलाइट पाक के बड़े भूभाग की लगातार मैपिंग कर रहे हैं। जिसकी जानकारी सुरक्षा एजेंसियों के साथ साझा भी की जा रही है। हालाकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इतनी है पाकिस्तान की ताकत
गणतंत्र दिवस परेड में शामिल संचार वाहन
- फोटो : PTI
बहुत कम लोगों को यह मालूम होगा कि पाकिस्तान ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत से पहले काम करना शुरू कर दिया था। जहां हमारे पास 7 आधुनिकतम सैन्य उपग्रह हैं वहीं पाकिस्तान के पास पाकिस्तान रिमोट सेंसिंग (PRSS-1) नाम की एक सेटेलाइट ही है। इसे भी पाक ने अपने जिगरी दोस्त चीन की मदद से लांच किया था।