रसोई गैस के घटे दाम से अर्थव्यवस्था को लगेंगे पंख
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मूंग की दाल का लड्डू बेचने वाले राम किशन यादव काफी खुश हैं। उन्हें महीने भर में कम से कम 14.20 किग्रा वाले छह रसोई गैस सिलेंडर की जरूरत पड़ती है। घर में आठ लोगों का परिवार है और एक सिलेंडर 18 से 20 दिन चलता है। साल भर में वह घर के लिए बिना सब्सिडी वाला 6-7 सिलेंडर लेते हैं। राम किशन एक साथ 133 रुपये प्रति सिलेंडर दाम कम से होने से खुश हैं। कुछ यही स्थिति फुटपाथ पर चाय बेचने वाले रमेश नेगी की भी है। दोनों का मानना है कि छोटे पांच और दो किलो या फिर 14.2 किग्रा वाले गैस सिलेंडर से जीविका चलाने वाले लोगों को इससे काफी राहत मिल सकती है।
विनोद नगर में कन्हैया ठेले पर फिंगर रोल, चाऊमिन बेचते हैं। सिलेंडर के दाम होने से कन्हैया काफी खुश हैं। अभी तक कन्हैया भी दिल्ली में 942 रुपये का एक सिलेंडर ले रहे थे। हालांकि कन्हैया को यही सिलेंडर सितंबर में 897 रुपये में मिल रहा था। उन्हें आज भी याद है कि इसी साल सरकार ने एक साथ सिलेंडर का दाम 59 रुपये प्रति सिलेंडर बढ़ा दिया था।
वैसे भी कन्हैया को एक सिलेंडर के पीछे 15-20 रुपये अतिरिक्त ही देना पड़ता है। रेहड़ी-पटरी संगठन से जुड़े रविन्द्र सिंह बताते हैं कि अकेले दिल्ली के फुटपाथ पर करीब 3-40 हजार लोग गैस सिलेंडर का उपयोग करके अपनी जीविका चलाते हैं। रविन्द्र सिंह का मानना है कि उन्हें इससे निश्चित रूप से बड़ी राहत मिलेगी।
मयूर विहार फेस-टू, दिल्ली में एक गैस एजेंसी पर काम करने वाले विमल कुमार(बदला नाम) के अनुसार सरकार ने रसोई गैस सिलेंडर के दाम जरूर घटाए हैं, लेकिन यह जिस अनुपात में बढ़ा था, उसकी तुलना में काफी है। विमल लेखा-जोखा में अच्छी पकड़ रखते हैं। उनकी गणना कहती है कि यह दाम 150-155 रुपये के करीब कम होने चाहिए थे।
विमल ने पुराना रिकार्ड चेक करके बताया कि सितंबर 2018 में बिना सब्सिडी का एक सिलेंडर 820 रुपये में और सब्सिडी वाला 376 रुपये में मिलता था। विमल के मुताबिक केन्द्र सरकार ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का दाम बढऩे के बाद एलपीजी सिलेंडर के दामों में बढ़ोत्तरी की थी। लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से दाम गिर रहे हैं और सरकार कुछ दिन कमाई करने के बाद धीरे-धीरे और तुलना में कम दाम घटा रही है।