IND-US Trade: कृषि-ऑटोमोबाइल क्षेत्रों की अड़चनों को दूर कर पूर्ण समझौते के आसार, चार दिनों में ऐसे बनेगी बात
भारत ने अमेरिका की ओर से कृषि और डेयरी उत्पादों पर शुल्क में रियायत की मांग पर सख्त रुख अपनाया है। भारत ने अब तक किसी भी व्यापारिक साझेदार के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) में डेयरी क्षेत्र में कोई रियायत नहीं दी है। दूसरी ओर, भारत अमेरिका से स्टील और एल्यूमीनियम पर 50 फीसदी और ऑटो सेक्टर पर 25 फीसदी शुल्क को कम करने की मांग कर रहा है।
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विस्तार
भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) पर सोमवार से अगले दौर की वार्ता शुरू हो गई। भारतीय वाणिज्य मंत्रालय का एक दल अमेरिका में है। अधिकारियों ने बताया कि मुख्य वार्ताकार और वाणिज्य विभाग में विशेष सचिव राजेश अग्रवाल बुधवार को दल से जुड़ेंगे। जबकि भारत के उप-मुख्य वार्ताकार पहले ही वाशिंगटन पहुंच चुके हैं और वह पहले चरण की बातचीत में हिस्सा लेंगे। चार दिनों तक चलने वाली यह वार्ता बृहस्पतिवार को समाप्त होगी। इस दौरान दोनों पक्ष कृषि और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों में अड़चनों को दूर करने का प्रयास करेंगे। अमेरिका ने भारत पर अतिरिक्त पारस्परिक शुल्क लगाने की समयसीमा 1 अगस्त तक बढ़ा दी है।
जून में भी अमेरिका गया था भारतीय दल
पिछले हफ्ते एक अधिकारी ने बताया था कि भारत इस समझौते को अंतरिम या पहले चरण के तौर पर नहीं देख रहा, बल्कि एक पूर्ण व्यापार समझौते पर काम कर रहा है। हम पूरी डील पर बात कर रहे हैं। जो भी मुद्दे पूरे हो जाएंगे, उन्हें अंतरिम समझौते के रूप में पेश किया जा सकता है। बाकी मुद्दों पर बातचीत आगे भी चलती रहेगी। इससे पहले जून के आखिरी हफ्ते से जुलाई की शुरुआत तक भारतीय टीम वाशिंगटन में थी, जहां 26 जून से 2 जुलाई तक दोनों देशों के अधिकारियों के बीच बातचीत हुई थी।
कृषि और डेयरी पर भारत का रुख सख्त
भारत ने अमेरिका की ओर से कृषि और डेयरी उत्पादों पर शुल्क में रियायत की मांग पर सख्त रुख अपनाया है। भारत ने अब तक किसी भी व्यापारिक साझेदार के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) में डेयरी क्षेत्र में कोई रियायत नहीं दी है। दूसरी ओर, भारत अमेरिका से स्टील और एल्यूमीनियम पर 50 फीसदी और ऑटो सेक्टर पर 25 फीसदी शुल्क को कम करने की मांग कर रहा है। भारत ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के नियमों के तहत जवाबी शुल्क लगाने का अधिकार भी सुरक्षित रखा है।
शराब और इलेक्ट्रिक वाहनों पर छूट चाहता है अमेरिका
अमेरिका कुछ औद्योगिक सामान, ऑटोमोबाइल (खासकर इलेक्ट्रिक वाहन), शराब, पेट्रोकेमिकल उत्पाद, डेयरी, सेब, मेवे और कुछ अन्य फसलों पर शुल्क में छूट चाहता है। जबकि, भारत श्रम आधारित क्षेत्र जैसे कपड़ा, रत्न-आभूषण, चमड़ा, परिधान, प्लास्टिक, केमिकल, झींगा, तिलहन, अंगूर और केले जैसे उत्पादों पर शुल्क में छूट देने की मांग कर रहा है। भारत और अदोनों देश इस साल सितंबर-अक्टूबर तक बीटीए के पहले चरण को अंतिम रूप देने की कोशिश में हैं। उससे पहले एक अंतरिम व्यापार समझौते पर सहमति बन सकती है।
चीन पर अमेरिकी शुल्क वृद्धि से भारत को मिलेगा लाभ
नीति आयोग ने सोमवार को कहा कि ट्रंप प्रशासन की ओर से चीन, कनाडा और मेक्सिको सहित अन्य देशों पर ज्यादा शुल्क लगाने से अमेरिका को भारतीय निर्यात और अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाएगा। इससे भारत को लाभ होगा।
नीति आयोग ने व्यापार पर तिमाही रिपोर्ट के तीसरे संस्करण में कहा कि उत्पादों की संख्या और अमेरिकी बाजार के आकार, दोनों के संदर्भ में भारत के लिए महत्वपूर्ण अवसर होंगे। भारत को शीर्ष 30 श्रेणियों में से 22 में प्रतिस्पर्धी लाभ मिलने की उम्मीद है। इन वस्तुओं का बाजार 2,285.2 अरब डॉलर का है। चीन, कनाडा और मेक्सिको इन श्रेणियों में अमेरिका के प्रमुख निर्यातक हैं। इसलिए इन देशों पर क्रमशः 30, 35 और 25% का उच्च शुल्क प्रतिस्पर्धी क्षमता को बढ़ाएगा। आयोग ने कहा कि भारत की प्रतिस्पर्धी क्षमता 30 में से छह श्रेणियों में अपरिवर्तित रहेगी। यह अमेरिका को किए जाने वाले निर्यात का 32.8% और अमेरिका के कुल आयात का 26% है। मूल्य के हिसाब से यह 26.5 अरब डॉलर है।
इन क्षेत्रों में लाभ
आयोग के मुताबिक, एचएस-दो स्तर पर छह उत्पाद श्रेणियों के लिए भारत को उच्च औसत शुल्क (एक से तीन प्रतिशत के बीच) का सामना करना पड़ रहा है, जिसपर अमेरिका के साथ बातचीत की जा सकती है। 78 उत्पादों में भारत को प्रतिस्पर्धी लाभ मिलने की उम्मीद है। यह भारत के निर्यात में 52 प्रतिशत और कुल अमेरिकी आयात में 26 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं। आयोग ने यह भी कहा कि भारत को 1,265 अरब डॉलर के बाजार में चीन समेत दूसरे देशों की तुलना में उच्च शुल्क अंतर वाले क्षेत्रों खनिज, ईंधन, परिधान, इलेक्ट्रॉनिक्स, प्लास्टिक, फर्नीचर और समुद्री खाद्य पदार्थों में लाभ होगा।
अमेरिका से समझौते में सतर्क रहे भारत : कांग्रेस
वहीं, कांग्रेस ने अमेरिका के साथ संभावित व्यापार समझौते को लेकर सरकार को सतर्क रहने की सलाह दी है। कांग्रेस ने इसे ‘मसाला डील’ बताया है, जिसका अर्थ है म्युचुअली एग्रीड सेटेलमेंट्स अचीव्ड थ्रू लेवेलारज्ड आर्म ट्विस्टिंग, यानी दबाव डालकर आपसी समझौते हासिल करना। इससे पहले लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी अमेरिका के साथ होने वाले व्यापार समझौते पर चिंता जाहिर कर चुके हैं। थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इंस्टीट्यूट (जीटीआरआई) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि अमेरिका इस तरह के समझौतों के जरिए भारत जैसे देशों पर अनावश्यक व्यापारिक दबाव बना रहा है। ऐसे समझौतों के प्रति आगाह करते हुए जीटीआरआई ने कहा है कि भारत को अमेरिका के साथ किसी भी व्यापारिक समझौते में जल्दबाजी से बचना चाहिए।