डोकलाम में भारतीय सेना की तैयारी शुरू, पहुंचाया जा रहा हथियार और गोला-बारूद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यह ऐसी जगह है जहां से भारतीय सेना तिब्बत में चीन की गतिविधियों पर नजर रख सकती है। डोकलाम में चीन के किसी भी आक्रमण से निपटने के लिए सेना भी पूरी तैयारी कर रही है। यहां बंकर बनाने का काम तेजी से चल रहा है। इसके अलावा हल्के टैंक, गोला-बारूद पहुंचाया जा रहा है। बिना किसी शोरगुल के सेना युद्ध की ड्रिल कर रही है।
दोकलम से कुछ किलोमीटर दूर नथांग विवाद का केंद्र बने ट्राई जंक्शन पर भारत की आउटपोस्ट लालटेन के लिए री-इनफोर्समेंट बेस का काम करता है। यहां भारत की प्रख्यात ब्लैक कैट डिवीजन तैनात है। ब्लैक कैट मुख्यालय में तैनात एक ब्रिगेडियर के मुताबिक, भारत बातचीत से विवाद सुलझाना चाहता है। लेकिन चीन की जिद है कि पहले भारतीय फौज पीछे हटे। लेकिन अगर हम अपनी अग्रिम पोस्ट से पीछे हटेंगे तो चीन भूटानी भूभाग पर सड़क बनाना शुरू कर देंगे। हम उसे ऐसा नहीं करने दे सकते।
http://www.amarujala.com/india-news/army-adequately-equipped-to-defend-country-says-arun-jaitley
दोनों ओर से दाव पर बहुत कुछ लगा है। निकट भविष्य में इसका कोई समाधान मुश्किल नजर आता है। कम से कम ब्लैक कैट का यही मानना है। हम चीन से सीमा पर रिश्ते सामान्य चाहते हैं। लेकिन हम यहां लंबे समय के लिए तैयारी कर रहे हैं क्योंकि सीमा के दूसरी ओर से आक्रामक रुख में कोई कमी नहीं आई है।
लालटेन तक सड़क बनाना चाहता है चीन
नथांग में तैनात ब्लैक कैट डिवीजन के एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि भारतीय सेना किसी भी हाल में चीन को सी-40 रोड नहीं बनाने देगी। यह ऐसी रोड होती है जिससे 40 टन भार वाले टैंक जा सकते हैं। चीन डोकलाम पठार में तरह की रोड बनाना चाहता है। ताकि वह यादोंग को लालटेन अग्रिम चौकी से जोड़ सके।
हम किसी भी हाल में उसे ऐसा नहीं करने देंगे। हालांकि हमें साफ आदेश हैं तनाव नहीं बढ़ना चाहिए। इसलिए हम किसी उकसावे वाली कार्रवाई में लिप्त नहीं हैं। लेकिन अगर चीन कोई आक्रामक कदम उठाता है तो हम उसे माकूल जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
भारत की बढ़ती सामरिक क्षमता से चीन चिंतित
भूटान में इंडियन मिलिट्री ट्रेनिंग टीम के कमांडर मेजर जनरल अपूर्व बरदलाई के मुताबिक, दरअसल चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी इस बात से चिंतित है कि भारत के पास अब इस हिमालयी क्षेत्र में काफी अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर है। यहां भारत ने कई अग्रिम लैंडिंग क्षेत्र तैयार कर लिए हैं। इससे सेना की एयरलिफ्ट क्षमता भी बढ़ गई है। सेना में अमेरिका से मिले ट्रांसपोर्ट विमानों के शामिल हो जाने के बाद हिमालयी इलाके में भारतीय फौज को बढ़त मिल गई है। हर गुजरते दिन के साथ भारत क्षमता के मामले में चीन से अपने अंतर को पाट रहे हैं।
सामरिक रूप से अहम है दोकलाम
दोकलाम का पूरा इलाका सामरिक रूप से भारत के लिए बेहद अहम है। अगर चीन यहां सड़क बनाने में कामयाब होता है, तो उसकी भारत के ‘चिकन नेक’ कहे जाने वाले सिलीगुड़ी तक पहुंच काफी आसान हो जाएगी। ‘चिकन नेक’ उस इलाके को कहते हैं जो सामरिक रूप से अहम लेकिन संरचना के आधार पर कमजोर होता है। दोकलाम से सिलीगुड़ी कॉरिडोर की दूरी महज 50 किलोमीटर है। यह ऐसा इलाका है, जिससे शेष भारत, पूर्वोत्तर के 7 राज्यों से जुड़ता है। 200 किलोमीटर लंबा और 60 किलोमीटर चौड़ा ये कॉरिडोर देश की एकता के लिए काफी जरूरी है।
साथ ही सिलीगुड़ी कॉरिडोर साउथ की तरफ से बांग्लादेश और नॉर्थ की तरफ से चीन से घिरा है। ट्रेन, रोड नेटवर्क से संपन्न ये इलाका चीन के किसी भी संभावित हमले में सैनिक साजो-सामान और दूसरी जरूरी चीजों की आपूर्ति के लिए अहम है। जानकार मानते हैं कि अगर चीन ने दोकलाम में सड़क बना ली, तो दुश्मन हमसे और करीब हो जाएगा।