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Indian Air Force: बदलते दौर और युद्ध की आशंका के बीच तकनीक में बदलाव कितना अहम? वायुसेना प्रमुख ने कही यह बात
Thu, 14 Dec 2023 09:03 PM IST
ज्योति भास्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Thu, 14 Dec 2023 09:03 PM IST
सार
वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने कहा, भावी चुनौतियों को मद्देनजर रखते हुए युद्ध लड़ने वाली मशीनरी में सुधार की जरूरत है। भावी युद्धक्षेत्र के लिए तैयारियों को लेकर उन्होंने मशीन को दोबारा विकसित करने पर भी जोर दिया।
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वायुसेना प्रमुख वीआर चौधरी (फाइल)
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
युद्ध जैसी चुनौतियों और भारतीय सेना की तैयारियों को लेकर वायुसेना प्रमुख ने बड़ा बयान दिया है। वायुसेना प्रमुख, एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने कहा कि भविष्य के युद्धक्षेत्र बेतरतीब, भीड़भाड़ वाले और इससे अधिक चुनौतीपूर्ण होंगे। हालात और जटिल होंगे। पारंपरिक युद्ध मशीनरी को अपडेट करने की जरूरत पर जोर देते हुए वायुसेना प्रमुख ने कहा, अत्याधुनिक तकनीक के अनुसार, युद्ध में इस्तेमाल होने वाली मशीनों को नए सिरे से विकसित करने की जरूरत है।
गुरुवार को वायुसेना प्रमुख ने कहा, बदलते हालात को ध्यान में रखते हुए युद्ध में इस्तेमाल होने वाली मशीन की डिजाइन पर भी मंथन जरूरी है। महाराष्ट्र दौरे पर पहुंचे वायुसेना प्रमुख ने सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय में 'समकालीन और भविष्य के लिए तैयार एयरोस्पेस फोर्स' विषय पर व्याख्यान दिया। जनरल बीसी जोशी मेमोरियल लेक्चर में वायुसेना प्रमुख ने कहा, 2023 में भारतीय वायु सेना का दृष्टिकोण 'चुस्त और अनुकूलनीय' (agile and adaptive) है। उन्होंने कहा कि वायुसेना देश के राष्ट्रीय हित को आगे बढ़ाने में निर्णायक एयरोस्पेस शक्ति देती है।
एयरचीफ मार्शल ने कहा, भारतीय वायुसेना को 'पहले और सबसे दूर तक देखें, पहले और सबसे तेज पहुंचें के साथ-साथ पहले और सबसे प्रभावी प्रहार करें' जैसी नीति की जरूरत है। वायुसेना प्रमुख ने कहा, हवाई और मानव रहित प्लेटफार्म के अलावा सेंसर, संचार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों पर भी नए सिरे से विचार की जरूरत है। हवाई श्रेष्ठता सुनिश्चित करने के लिए अत्याधुनिक उपकरण को भी उन्होंने समय की मांग करार दिया।
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वायुसेना प्रमुख ने अच्छी तरह से प्रशिक्षित वायुसेना कर्मियों की जरूरत को रेखांकित करने के साथ-साथ कहा कि आने वाले समय में तकनीक की मदद से संचालित युद्धक्षेत्र बेहद जटिल होने वाले हैं। उन्होंने कहा कि कौशल विकास के लिए प्रौद्योगिकी को अपडेट करने के साथ नवाचार भी जरूरी हैं। विघटनकारी (disruptive) प्रशिक्षण कार्यक्रमों में निवेश को भी वायुसेना प्रमुख ने निर्णायक बताया। उन्होंने कहा कि मित्र देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा देने के प्रति भारतीय वायुसेना प्रतिबद्ध है।
उन्होंने प्राकृतिक आपदाओं के दौरान मानवीय सहायता और आपदा राहत के दौरान वायुसेना की भूमिका का भी जिक्र किया। युद्धग्रस्त क्षेत्रों से भारतीय प्रवासियों को सुरक्षित निकालने में वायुसेना की भूमिका को वायुसेना प्रमुख ने 'शानदार' करार दिया। वायुसेना प्रमुख के मुताबिक बदलते दौर में राष्ट्र निर्माण में भी भारतीय वायुसेना का योगदान उल्लेखनीय है।
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गुरुवार को वायुसेना प्रमुख ने कहा, बदलते हालात को ध्यान में रखते हुए युद्ध में इस्तेमाल होने वाली मशीन की डिजाइन पर भी मंथन जरूरी है। महाराष्ट्र दौरे पर पहुंचे वायुसेना प्रमुख ने सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय में 'समकालीन और भविष्य के लिए तैयार एयरोस्पेस फोर्स' विषय पर व्याख्यान दिया। जनरल बीसी जोशी मेमोरियल लेक्चर में वायुसेना प्रमुख ने कहा, 2023 में भारतीय वायु सेना का दृष्टिकोण 'चुस्त और अनुकूलनीय' (agile and adaptive) है। उन्होंने कहा कि वायुसेना देश के राष्ट्रीय हित को आगे बढ़ाने में निर्णायक एयरोस्पेस शक्ति देती है।
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एयरचीफ मार्शल ने कहा, भारतीय वायुसेना को 'पहले और सबसे दूर तक देखें, पहले और सबसे तेज पहुंचें के साथ-साथ पहले और सबसे प्रभावी प्रहार करें' जैसी नीति की जरूरत है। वायुसेना प्रमुख ने कहा, हवाई और मानव रहित प्लेटफार्म के अलावा सेंसर, संचार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों पर भी नए सिरे से विचार की जरूरत है। हवाई श्रेष्ठता सुनिश्चित करने के लिए अत्याधुनिक उपकरण को भी उन्होंने समय की मांग करार दिया।
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वायुसेना प्रमुख ने अच्छी तरह से प्रशिक्षित वायुसेना कर्मियों की जरूरत को रेखांकित करने के साथ-साथ कहा कि आने वाले समय में तकनीक की मदद से संचालित युद्धक्षेत्र बेहद जटिल होने वाले हैं। उन्होंने कहा कि कौशल विकास के लिए प्रौद्योगिकी को अपडेट करने के साथ नवाचार भी जरूरी हैं। विघटनकारी (disruptive) प्रशिक्षण कार्यक्रमों में निवेश को भी वायुसेना प्रमुख ने निर्णायक बताया। उन्होंने कहा कि मित्र देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा देने के प्रति भारतीय वायुसेना प्रतिबद्ध है।
उन्होंने प्राकृतिक आपदाओं के दौरान मानवीय सहायता और आपदा राहत के दौरान वायुसेना की भूमिका का भी जिक्र किया। युद्धग्रस्त क्षेत्रों से भारतीय प्रवासियों को सुरक्षित निकालने में वायुसेना की भूमिका को वायुसेना प्रमुख ने 'शानदार' करार दिया। वायुसेना प्रमुख के मुताबिक बदलते दौर में राष्ट्र निर्माण में भी भारतीय वायुसेना का योगदान उल्लेखनीय है।
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