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SAMAR 2: भारतीय वायुसेना ने 'बेकार' हो चुकीं पुरानी मिसाइलों में फूंकी जान! बनाया यह घातक एयर डिफेंस सिस्टम
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भारतीय वायुसेना ने 'बेकार' हो चुकीं पुरानी मिसाइलों में फूंकी जान!
- फोटो :
अमर उजाला
विस्तार
क्या पुराने पड़ चुके हथियारों को फिर से इस्तेमाल किया जा सकता है? इस सवाल पर अच्छी खासी बहस हो सकती है। लेकिन भारतीय सेना इन हथियारों की उपयोगिता जानती है और इन्हें रिटायर करने की बजाय देश की सुरक्षा में इस्तेमाल कर रही है। भारतीय वायुसेना ने पुरानी रूसी मिसाइलों का इस्तेमाल करके आकाश एयर डिफेंस सिस्टम की तरह ही स्वदेशी नई वायु रक्षा प्रणाली समर-2 (SAMAR-2) का परीक्षण करने की तैयारी कर रहा है। खास बात यह है कि समर-2 की मारक क्षमता लगभग 30 किलोमीटर है।समर-2 एयर डिफेंस सिस्टम की रेंज 30 किमी
तरंग शक्ति एयर एक्सरसाइज में आए समर-2 प्रोजेक्ट से जुड़े वायुसेना के अधिकारियों ने अमर उजाला को बताया उन्होंने समर को पुराने रूसी मूल की R-73 और R-27 हवा से हवा में मार करने वालीं मिसाइलों को फिर से तैयार करके विकसित किया है। इस साल दिसंबर में समर-2 का फायरिंग ट्रायल किया जाएगा। समर-2 एयर डिफेंस सिस्टम की रेंज 30 किमी है, यानी कि यह सिस्टम 30 किमी की दूसरी पर मौजूद दुश्मन के ड्रोन, यूएवी, हेलीकॉप्टर, फाइटर जेट और मिसाइलों को मार गिरा सकता है। नाम न छापने की शर्त पर अधिकारियों ने बताया कि ये मिसाइलें सालों पहले रूस से खरीदी गईं थीं, वहीं अब ये पुरानी होने लगी थीं। जिसके बाद भारतीय वायुसेना ने फैसला किया कि इन्हें सतह से हवा (Surface to Air) में मार करने वाले एयर डिफेंस सिस्टम में बदल दिया जाए। सूत्रों का कहना है कि स्वदेशी रूप से विकसित ये एयर डिफेंस सिस्टम बताया है कि कैसे भारतीय वायुसेना चलन से बाहर हुईं मिसाइलों को प्रभावी इस्तेमाल में लाती है।
भारत के पास पुरानी मिसाइलों का भंडार
भारतीय वायुसेना के अधिकारियों ने बताया कि समर एयर डिफेंस सिस्टम ने हाल ही में राजस्थान के पोखरण में हुए वायुशक्ति 2024 युद्धाभ्यास में अपनी ताकत दिखाई थी। उन्होंने कहा कि हमारे लिए बड़ी चुनौती यह है कि हवा से हवा में मार करने वाली ऐसी मिसाइलें, जो अपनी शेल्फ लाइफ को पूरा कर चुकी हैं और इसलिए एयर लॉन्च के सेफ नहीं हैं, उनका इस्तेमाल सतह से हवा में मार करने वाले समर-2 एयर डिफेंस सिस्टम के तौर पर किया जा रहा है। वहीं, समर-1 को सेना में पहले ही शामिल किया जा चुका है, और इसकी मारक क्षमता 8 किलोमीटर है। दोनों ही सिस्टम में रूसी से खरीदी गईं हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों का उपयोग किया गया है। समर-1 में जहां R-73E मिसाइल लगी है, तो वहीं नए संस्करण समर-2 में R-27 मिसाइल लगी है। बता दें, कि SIPRI की रिपोर्ट के मुातबिक, भारत ने 1987 से अब तक 4500 से अधिक R-73 मिसाइलें खरीदी हैं। जबकि वायुसेना के पास सैकड़ों की संख्या में R-27 मिसाइलें भी मौजूद हैं।
क्या हैं समर-1 और समर-2
भारतीय वायुसेना के मुताबिक, स्वदेशी रूप से विकसित समर-1 प्लेटफॉर्म मिसाइलों को 2 से 2.5 मैक की स्पीड से लॉन्च कर सकता है। वहीं, ट्विन-बुर्ज रेल लॉन्च प्लेटफॉर्म है, जो सिंगल या सैल्वो मोड में दो मिसाइलों को लॉन्च कर सकता है। एयरो इंडिया 2023 में भारतीय वायुसेना ने समर-1 सिस्टम से ट्रायल फायरिंग के दौरान 17 राउंड लॉन्च करके दुनिया को चौंका दिया था। समर मिसाइल ट्रक से लॉन्च होती है, जिसकी स्पीड 2982 किमी प्रति घंटा है। समर (SAMAR) का पूरा नाम Surface-to-air missile for Assured Retaliation है। वायुसेना की बेस रिपेयर डिपो (BRD) यूनिट इसका संचालन करती है। समर-1 का वजन 105 किग्रा, लंबाई 9.7 फीट, व्यास 6.5 इंच और इसमें 7.4 किग्रा का वॉरहेड लगता है। समर-1 की रेंज 12 किलोमीटर है। यह लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों और यूएवी जैसे लो-फाइटिंग विमानों को मार गिराने में सक्षम है।
जबकि समर-2 का वजन 253 किग्रा है। इसकी लंबाई 13.4 फीट है। इसमें 39 किग्रा का वॉरहेड लगा सकते हैं। दोनों मिसाइलों को लॉन्च करने वाले ट्रक भी अलग अलग हैं। समर-1 के लिए अशोक लीलैंड स्टैलियन 4x4 ट्रक का इस्तेमाल होता है। जबकि समर-2 के लिए बीईएमएल टाट्रा टी815 8x8 ट्रक इस्तेमाल होता है।
भारत के पास हैं ये एयर डिफेंस सिस्टम
इसके अलावा डीआरडीओ के प्रोजेक्ट कुशा के तहत स्वदेशी लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली भी डेवलप कर रहा है। जिसकी रेंज 350 किलोमीटर होगी और इसे चार से पांच सालों में तैनात किए जाने की उम्मीद है। इसके अलावा डीआरडीओ ने स्वदेश में निर्मित बहुत कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली (VSHORDS) भी डेवलप किया है। भारत के पास एस-400 एय़र डिफेंस सिस्टम और मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (MRSAM) प्रणाली शामिल हैं, जिन्हें इस्राइल के साथ मिल कर बनाया गया है। इसके अलावा, इस्राइली स्पाइडर, सोवियत मूल की पिकोरा, ओएसए-एके, तुंगुस्का, स्ट्रेला और शिल्का, जू-23-2बी एंटी-एयरक्राफ्ट गन, एडवांस एल-70 एंटी-एयरक्राफ्ट गन (स्वीडिश हथियार फर्म बोफोर्स एबी द्वारा निर्मित) और इग्ला मैनपैड्स (मानव-पोर्टेबल वायु रक्षा प्रणाली) शामिल हैं।