चीनी ताइपे और जापान के डब्ल्यूटीओ समिति बनाने का विरोध करेगा भारत
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भारत विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में जापान और चीनी ताइपे के विवाद निपटान समिति बनाने के अनुरोध का विरोध करेगा। दोनों देश भारत की ओर से कुछ सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) उत्पादों के आयात पर सीमा शुल्क लगाने के खिलाफ विवाद निपटान समिति गठित करना चाहते हैं।
एक अधिकारी ने बताया कि दोनों देशों के अनुरोध को सोमवार को जिनेवा में विवाद निपटान निकाय के समक्ष रखा जाएगा, जिसका हम विरोध करेंगे।
डब्ल्यूटीओ के व्यापार विवाद नियमों के अनुसार, अगर ये देश दूसरी बार समिति गठन की मांग करते हैं तो इस मामले में समिति बनेगी। मई, 2019 में दोनों देशों ने कुछ इलेक्ट्रॉनिक सामान पर भारत की ओर से आयात शुल्क लगाने के खिलाफ अपील की थी। इनमें सेल्युलर नेटवर्क के लिए टेलीफोन, स्वागत कक्ष की मशीन, वॉइस, इमेज या अन्य डाटा के ट्रांसमिशन और टेलीफोन सेट के कलपुर्जे शामिल हैं।
दोनों देशों का आरोप है कि इन उत्पादों पर आयात शुल्क लगाकर भारत ने डब्ल्यूटीओ नियमों का उल्लंघन किया है।
- भारत आईटीए-2 करार का हिस्सा नहीं
भारत ने दोनों देशों के आरोपों का कड़ा विरोध किया था। साथ ही इन उत्पादों पर शून्य फीसदी बाउंड टैरिफ की प्रतिबद्धता जताई है। बाउंड टैरिफ या शुल्क का मतलब एक सीमा से है, जिससे अधिक कोई डब्ल्यूटीओ सदस्य आयात शुल्क नहीं लगा सकता है। भारत ने स्पष्ट किया है कि ये आईसीटी उत्पाद डब्ल्यूटीओ के सूचना प्रौद्योगिकी उत्पाद (आईटीए-2) करार का हिस्सा हैं, जबकि वह इस करार का हिस्सा नहीं है।
भारत ने 1997 में आईटीए-1 करार पर हस्ताक्षर किया था। इसमें इन उत्पादों पर सीमा शुल्क खत्म करने का कोई प्रावधान नहीं है।