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म्यांमार और अफ्रीकी देशों से होगा दाल का आयात, बनेगा बफर स्टॉक

Wed, 15 Jun 2016 08:44 PM IST
अमर उजाला/ ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला/ ब्यूरो, नई दिल्ली Updated Wed, 15 Jun 2016 08:44 PM IST
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india will impoer pulses from Myanmar and African countries, will be a buffer stock
फाइल फोटो - फोटो : PTI

दालों की आसमान छूती कीमतों को देखते हुए सरकार ने म्यांमार और अफ्रीकी देशों से दाल का आयात करने का फैसला किया है। इसके साथ ही दालों का बफर स्टॉक बनाने तथा जमाखोरों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का भी फैसला हुआ है। केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के आवास पर बुधवार को हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में दाल और टमाटर जैसे वस्तुओं की आसमान छूती कीमतों पर चर्चा हुई।

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इस बैठक में कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह, खाद्य मंत्री रामबिलास पासवान, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमण तथा शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू शामिल हुए। इस दौरान दालों की कीमत 170 रुपये और टमाटर की कीमत 100 रुपये प्रति किलो पहुंचने की पुरजोर चर्चा हुई।
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बैठक में शामिल एक अधिकारी के मुताबिक इस दौरान बताया गया कि कीमतें क्यों चढ़ी और इस स्थिति से निबटने के लिए क्या क्या हो सकता है। बैठक में बताया गया कि इस साल 1.15 लाख टन दालों की खरीद हो चुकी है, जिनमें से 10 हजार टन दाल राज्यों को जारी किया जा चुका है।
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इसमें से और दालें शीघ्र ही कुल और राज्यों को दी जाएंगी। यही नही, यदि जरूरत पड़ी तो और दालों का आयात किया जाएगा। इसके अलावा दालों का बफर स्टॉक बनाने पर भी सहमति बनी और निर्णय हुआ कि इसके लिए म्यांमार और अफ्रीकी देशों से सरकारी स्तर पर बात करके दाल का आयात किया जाए।

इस दौरान दाल के जमाखोरों पर भी कड़ी कार्रवाई करने पर सहमति बनी। बैठक के बाद रामबिलास पासवान ने बताया कि बैठक का मुख्य विषय दाल ही था। उनके विभाग से कहा गया है कि बफर स्टॉक बनाने के लिए और दालों का आयात किया जाए।

इस साल डेढ़ लाख टन दाल खरीद का लक्ष्य था, जिसमें से 1.15 लाख टन की खरीद हो चुकी है तथा अभी भी यह जारी है। उनके मुताबिक वित्त मंत्री ने सरकारी के साथ साथ निजी कंपनियों द्वारा भी दालों के भरपूर आयात की वकालत की ताकि दाम पर अंकुश लगाया जा सके।


लेकिन निजी आयातकों पर नजर भी रखी जाए कि वे दाल बाजार में बेच रहे हैं या गोदाम में भर रहे हैं। टमाटर की कीमतों की चर्चा करते हुए पासवान ने कहा कि इसकी कीमत बढ़ने का कारण मौसमी और स्थानिक है। अभी टमाटर का मौसम नहीं है और इस समय सीमित इलाकों में इसकी खेती होती है। इसके साथ ही टमाटर की फसल ज्यादा दिन नहीं टिकती और इसका गेहूं-चावल की तरह स्टोरेज भी नहीं हो सकता है।

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