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दिल्ली-एनसीआर में फौरी राहत, पहाड़ों में बारिश: भीषण गर्मी के बीच क्यों आया यह बदलाव, आगे क्या रहेगी स्थिति?
Sat, 23 May 2026 06:33 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sat, 23 May 2026 06:33 PM IST
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भारत में गर्मी का कहर।
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अमर उजाला
विस्तार
पूरे भारत में इस वक्त मौसम की स्थिति किस तरह बदली हुई है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जहां उत्तर भारत में भीषण गर्मी और लू के चलते लोगों को सावधान रहने की सलाह दी जा रही है तो वहीं पहाड़ी इलाके, पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के कई राज्यों में तेज हवाओं और बारिश के चलते राहत का माहौल है। दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और पंजाब के कुछ इलाकों में 23 मई को अचानक स्थिति में थोड़ा परिवर्तन हुआ और इन जगहों पर बादल छाए रहे। कुछ जगहों पर बूंदाबादी भी दर्ज की गई। हालांकि, यह राहत भी फौरी ही रहने के अनुमान हैं।इन स्थितियों के बीच यह जानना अहम है कि आखिर देशभर में मौसम की स्थितियां बीते 24 घंटे में कैसी रही हैं? 23 मई को कहां-कैसी स्थिति है और दिल्ली-एनसीआर, उत्तर भारत के कुछ हिस्सों को अचानक गर्मी से राहत कैसे मिल गई? आने वाले दिनों में मौसम में क्या बदलाव होने की संभावना है और आम लोगों को कब तक गर्मी और हीटवेव से निजात मिल सकती है? आइये जानते हैं...
बीते 24 घंटे में कैसी रही है भारत में मौसम की स्थिति?
1. उत्तर, उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में भीषण लू
- उत्तर भारत के पहाड़ी क्षेत्रों जैसे जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर, पहलगाम, गुलमर्ग और बनिहाल, काजीगुंड और भद्रवाह में बीते 24 घंटों के दौरान हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई है।
- पूर्वी उत्तर प्रदेश और विदर्भ के कुछ इलाकों में लू से लेकर भीषण लू की स्थिति बनी रही। देश में सबसे अधिक अधिकतम तापमान उत्तर प्रदेश के बांदा में 47.6° सेल्सियस दर्ज किया गया।
- पंजाब, उत्तर प्रदेश, पूर्वी मध्य प्रदेश और विदर्भ के कुछ इलाकों में रात के समय भी गर्मी का प्रकोप बना रहा। दिल्ली में शुक्रवार (22 मई) का न्यूनतम तापमान भी सामान्य से तीन डिग्री अधिक यानी 29.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
- हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तटीय आंध्र प्रदेश के कुछ इलाकों में भी लू का प्रभाव रहा।
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2. दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश
- केरल में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा (11-20 सेमी) और कुछ जगह अत्यधिक भारी वर्षा (21 सेमी या उससे अधिक) दर्ज की गई।
- असम में भारी से बहुत भारी वर्षा (11-20 सेमी) हुई। मेघालय में कुछ स्थानों पर तेज हवाओं के साथ गरज-चमक की स्थिति रही।
- उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, बिहार, रायलसीमा, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में भारी वर्षा (7-11 सेमी) दर्ज की गई।
- दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि भी हुई। कुछ स्थानों पर 80-120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाओं के साथ गरज-चमक की स्थिति रही।
23 मई को कैसा है अलग-अलग राज्यों का मौसम?
1. उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत
मैदानी इलाके: दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान के कई हिस्सों में लू से लेकर भीषण लू की स्थिति बनी हुई है। हालांकि, 23 मई को भीषण गर्मी के बीच दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा (सोनीपत, झज्जर, रेवाड़ी आदि) और राजस्थान (भिवाड़ी) में धूल भरी आंधी, 30-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं और गरज-चमक के साथ हल्की बारिश या बूंदाबांदी हुई है, जिससे तापमान में हल्की फौरी राहत मिली है।
पहाड़ी राज्य: जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में हल्की से मध्यम बारिश और आंधी की संभावना है। आज हिमाचल प्रदेश में कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि की भी चेतावनी दी गई है।
2. दक्षिण भारत
कर्नाटक-आंध्र प्रदेश: कर्नाटक की राजधानी बंगलूरू सहित आंतरिक कर्नाटक, तटीय आंध्र प्रदेश और रायलसीमा में भारी बारिश और 50 से 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली आंधी की चेतावनी है। उत्तरी आंतरिक कर्नाटक और रायलसीमा में ओले गिरने की भी संभावना है।
केरल और तमिलनाडु: केरल और लक्षद्वीप में गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ व्यापक रूप से हल्की से मध्यम बारिश होगी, जबकि तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में भारी बौछारें पड़ने के आसार हैं।
3. पूर्वोत्तर भारत
इस क्षेत्र में सीजन की सबसे भीषण बारिश हो रही है। असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना है।4. पूर्वी भारत
बंगाल-सिक्किम: उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में छिटपुट बहुत भारी बारिश होने की चेतावनी है।बिहार, झारखंड और ओडिशा: गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और ओडिशा में हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलेंगी। इन इलाकों में, खासकर ओडिशा, पश्चिम बंगाल और झारखंड में) 50 से 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी आने की भी प्रबल संभावना है। बिहार के कुछ इलाकों में लू भी चल सकती है।
23 मई को कुछ स्थानों पर यह बदलाव क्यों आया?
मौसम विभाग के पूर्व महानिदेशक डॉ. केजे. रमेश के मुताबिक, एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ उत्तरी पाकिस्तान और आसपास के क्षेत्रों में चक्रवाती परिसंचरण है। इसकी वजह से ही 22 और 23 मई को उत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में गर्मी से फौरी राहत मिली है। हालांकि, यह स्थिति जल्द बदलेगी और एक बार फिर पूरे क्षेत्र में गर्मी का प्रकोप देखने को मिल सकता है।अगले कुछ दिन कैसे रहेंगे हालात?
मौसम विभाग (आईएमडी) के अगले एक सप्ताह के मौसम पूर्वानुमान के मुताबिक, देश के मौसम में मुख्य रूप से दो स्थितियां देखने को मिलेंगी उत्तर और मध्य भारत में भीषण गर्मी का प्रकोप जारी रहेगा, जबकि दक्षिण, पूर्वोत्तर भारत और पहाड़ों पर बारिश की गतिविधियां दर्ज की जाएंगी। इसका मुख्य कारण भारत के आसपास मौसमी परिसंरचनाओं में होने वाला बदलाव है...1. उत्तर और मध्य भारत
- मौसम विभाग के मुताबिक, अगले एक हफ्ते तक उत्तर-पश्चिम भारत के अधिकतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव होने की उम्मीद नहीं है, जिसका अर्थ है कि भीषण गर्मी से कोई बड़ी राहत नहीं मिलेगी।
- दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और राजस्थान के अधिकतर इलाकों में 28 मई तक लू और भीषण लू चलने की स्थिति बनी रहने की आशंका है।
- दिल्ली-एनसीआर में आसमान मुख्य रूप से साफ रहेगा और अधिकतम तापमान 44 डिग्री से 46 डिग्री सेल्सियस के बीच झुलसाएगा। इसके साथ ही दिन के समय 20-30 किमी/घंटे की रफ्तार से तेज गर्म हवाएं चलेंगी, जो कभी-कभी 40-45 किमी/घंटे की रफ्तार के झोंकों में भी बदल सकती हैं।
2. पहाड़ी क्षेत्र
- एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) के कारण जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में हल्की से मध्यम बारिश और आंधी की संभावना है।
- पहाड़ों पर 25 मई से यह मौसमी प्रणाली कमजोर पड़ने लगेगा और 26 मई से आसमान साफ होने की उम्मीद है। खासकर जम्मू-कश्मीर में स्थिति तेजी से बदलेगी।
3. दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत
- पूर्वोत्तर भारत के कुछ राज्य, जैसे-असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश में अगले पांच से सात दिनों तक गरज-चमक और तेज़ हवाओं के साथ भारी से बहुत भारी बारिश होने का पूर्वानुमान है।
- दक्षिण भारत में केरल, लक्षद्वीप, तटीय कर्नाटक और तमिलनाडु में भी अगले कुछ दिनों तक व्यापक रूप से बारिश जारी रहेगी।
- सबसे अहम बात यह है कि मौजूदा परिस्थितियां मानसून के आने के लिए अनुकूल हो रही हैं और दक्षिण-पश्चिम मानसून के 26 मई के आसपास केरल में दस्तक देने की उम्मीद है।
4. पूर्वी और अन्य राज्य
पूर्वी भारत में स्थित पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, ओडिशा में 26-28 मई तक गरज-चमक के साथ छिटपुट बारिश और तेज हवाएं चलने का पूर्वानुमान है। 27 और 28 मई से इन इलाकों के तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस की गिरावट आ सकती है।वहीं, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, ओडिशा और तटीय आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में 26 मई तक हीटवेव (लू) का प्रभाव रहने का अनुमान है।
भीषण गर्मी झेल रहे क्षेत्रों को कब तक मिलेगी राहत?
- दिल्ली-एनसीआर में 23 मई की सुबह धूल भरी आंधी और हल्की बारिश से दिल्ली-एनसीआर के तापमान में मामूली गिरावट आई, जिससे लोगों को तात्कालिक राहत मिली, लेकिन यह राहत अस्थायी है। मौसम विभाग ने रविवार से तापमान के फिर से 44 से 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अलर्ट जारी किया है, जिसका मतलब यह है कि 28 मई तक यहां कोई स्थायी राहत नहीं मिलेगी।
- पूर्वी भारत (पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, ओडिशा) के क्षेत्रों में 26 मई तक तापमान में कोई विशेष बदलाव नहीं होगा, लेकिन 27 और 28 मई को अधिकतम तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस की क्रमिक गिरावट आएगी, जिससे इन इलाकों में भीषण गर्मी से थोड़ी राहत मिलने की प्रबल संभावना है।
- बिहार में 24 मई तक, जबकि छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और तेलंगाना में 26 मई तक लू का प्रभाव रहने की संभावना है। इन तारीखों के बाद यहाँ गर्मी का असर कुछ कम हो सकता है। इसके अलावा, विदर्भ में जहां लगातार भीषण गर्मी पड़ रही है, वहां भी 28 मई के बाद अधिकतम तापमान में मामूली गिरावट देखने को मिल सकती है।
क्या मानसून दिलाएगा गर्मी से राहत, कबसे मिल सकती है स्थायी राहत?
डॉ. केजे. रमेश के मुताबिक, उत्तर और उत्तर पश्चिम भारत में लू का सामना कर रहे क्षेत्रों को इस भीषण गर्मी से पूरी तरह राहत मानसून के आगमन के बाद ही मिलेगी। यानी केरल से मानसून अगर सही समय पर टकराता है तो जून के दूसरे और तीसरे हफ्ते में मैदानी इलाकों में तापमान कुछ नीचे जाएगा।
इस बीच मौसम विभाग ने कहा है कि 23 मई के आसपास दक्षिण-मध्य अरब सागर के ऊपर एक कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना दिखाई दे रही है। कुछ मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यह सिस्टम मानसून की हवाओं को प्रभावित कर सकता है। अगर ऐसा होता है, तो इससे केरल में मानसून की बारिश कमजोर हो सकती है या इसकी एंट्री में थोड़ी देरी भी हो सकती है। हालांकि, इस पर डॉ. रमेश ने कहा कि इस कम दबाव के क्षेत्र के पश्चिमी तट से दूर सोमालिया या ओमान की तरफ बढ़ने की उम्मीद है और इस बार मानसून इतना मजबूत है कि अरब सागर में भी किसी बदलती स्थिति का थोड़ा बहुत असर ही इस पर पड़ेगा और मानसूनी बारिश सामान्य रह सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मानसून ने अब तक अंडमान से आगे बढ़ते हुए श्रीलंका और म्यांमार में एंट्री ले ली है। यानी इसकी गति बेहतर है और भारत में इसकी एंट्री में कोई खास बाधा नहीं है।