हाफिज सईद पर कार्रवाई का भारत ने किया समर्थन
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भारत ने सोमवार को कहा कि मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद और उसके साथियों के खिलाफ कार्रवाई आतंकवाद एवं हिंसक उग्रवाद के दोहरे खतरे से क्षेत्र को मुक्त बनाने की दिशा में पहला तार्किक कदम है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने बताया, ‘हाफिज सईद एक अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी, मुंबई आतंकवादी हमलों का मास्टरमाइंड और लश्कर ए ताइबा/जमाद उद दावा और उनसे संबद्ध संगठनों के जरिए पाकिस्तान के पड़ोसियों के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए जिम्मेदार है।’
उन्होंने कहा, ‘उसके, उसके आतंकवादी संगठनों और उसके सहयोगियों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावशाली कार्रवाई उसे न्याय के दायरे में लाने और आतंकवाद एवं हिंसक उग्रवाद के दोहरे खतरे से हमारे क्षेत्र को मुक्त बनाने के लिए पहला तार्किक कदम है।’
सईद इस समय पाकिस्तान में नजरबंद है
स्वरूप ने ये बातें पाकिस्तान द्वारा सईद को आतंकवाद निरोधक कानून के तहत सूचीबद्ध किए जाने संबंधी प्रश्न के उत्तर में कही। आतंकी गुट जमात उद दावा का मुखिया सईद इस समय पाकिस्तान में नजरबंद है।
आतंकवाद विरोधी कानून-1997 पाकिस्तान सरकार को संबंधित व्यक्ति को एक पक्षीय आधार पर चौथी सूची में रखने का अधिकार देता है। इस चौथी सूची के प्रावधान का उल्लंघन करने वाले को तीन साल की कैद और जुर्माना या फिर दोनों की सजा हो सकती है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक इस हमला मामले में पाकिस्तान पहली बार गंभीर दिखा है। लेकिन भारत इसके तार्किक परिणति तक पहुंचने के साथ ही आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद के सरगना मौलाना मसूद अजहर पर भी पाकिस्तान का रुख भांप लेना चाहता है। रिश्ते सुधारने की नई कोशिश की संभावना इसलिए बनती है कि अगले साल पाकिस्तान के पीएम नवाज शरीफ चुनाव में व्यस्त हो जाएंगे, जबकि भारत में अगले कुछ महीने तक कोई चुनाव नहीं है। ऐसे में अगर नए सिरे से कूटनीतिक पहल होनी है तो इसके लिए दोनों देशों के पास महज 4-5 महीने का ही वक्त है।
यह ठीक है कि अगला कुछ महीना ही दोनों देशों के लिए नई पहल करने के लिए बचा है। हालांकि मेरा मानना है कि भारत को इंतजार करना चाहिए। हाफिज के खिलाफ पाकिस्तान ने कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की है। यूएन घोषित आतंकी होने के कारण वह पहले भी अन्य देशों में यात्रा नहीं कर सकता था। थाने में रिपोर्ट करने की सच्चाई और पाकिस्तान की गंभीरता को कौन जांचेगा? -जी. पार्थसारथी, पूर्व राजदूत