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भारत ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का किया सफल परीक्षण
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भुवनेश्वर
Updated Mon, 21 May 2018 02:20 PM IST
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ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल
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भारत ने सोमवार को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का पहला सफल परीक्षण किया। परीक्षण का उद्देश्य इस मिसाइल की कार्यअवधि को 10 से 15 वर्षों तक बढ़ाना था। यह भारत-रूस के साझा उपक्रम से तैयार किया गया है।
डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) के सूत्रों ने बताया कि ओडिशा तट पर चांदीपुर में एकीकृत टेस्ट रेंज (आईटीआर) में मौजूद मोबाइल लॉन्चर से लगभग 10.44 बजे मिसाइल का परीक्षण किया गया था।
रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने बालासोर में आईटीआर से किए गए सफल परीक्षण के लिए टीम ब्रह्मोस और डीआरडीओ को बधाई दी। आईटीआर के एक अधिकारी ने बताया, "ब्रह्मोस मिसाइल के जीवन को बढ़ाने की प्रौद्योगिकियां पहली बार भारत में विकसित की गई हैं।"
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ब्रह्मोस पहली भारतीय मिसाइल है जिसकी कार्यअवधि 10 से 15 साल तक बढ़ा दी गई है।
रक्षा मंत्री ने ट्वीट किया, "सफल परीक्षण से भारतीय सशस्त्र बलों की सूची में शामिल मिसाइलों की प्रतिस्थापन लागत में भारी बचत होगी।"
भारतीय सेना ने अपने शस्त्रागार में ब्रह्मोस की तीन रेजिमेंटों को पहले ही शामिल कर लिया है। सभी मिसाइल के ब्लॉक-III संस्करण से लैस हैं।
भारतीय सेना में ब्रह्मोस के जमीनी हमले करने वाला संस्करण 2007 से इस्तेमाल किया जा रहा है।
मिसाइल में की खासियत है कि इस चलाने देने के बाद यह खुद-ब-खुद ऊपर और नीचे की उड़ान भरकर जमीन के लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है। इस तरह यह दुश्मन के वायु रक्षा प्रणालियों से बच निकलती है।
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डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) के सूत्रों ने बताया कि ओडिशा तट पर चांदीपुर में एकीकृत टेस्ट रेंज (आईटीआर) में मौजूद मोबाइल लॉन्चर से लगभग 10.44 बजे मिसाइल का परीक्षण किया गया था।
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रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने बालासोर में आईटीआर से किए गए सफल परीक्षण के लिए टीम ब्रह्मोस और डीआरडीओ को बधाई दी। आईटीआर के एक अधिकारी ने बताया, "ब्रह्मोस मिसाइल के जीवन को बढ़ाने की प्रौद्योगिकियां पहली बार भारत में विकसित की गई हैं।"
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ब्रह्मोस पहली भारतीय मिसाइल है जिसकी कार्यअवधि 10 से 15 साल तक बढ़ा दी गई है।
रक्षा मंत्री ने ट्वीट किया, "सफल परीक्षण से भारतीय सशस्त्र बलों की सूची में शामिल मिसाइलों की प्रतिस्थापन लागत में भारी बचत होगी।"
The successful test will result in huge savings of replacement cost of missiles held in the inventory of Indian Armed Forces. 2/2
— Raksha Mantri (@DefenceMinIndia) 21 May 2018
भारतीय सेना ने अपने शस्त्रागार में ब्रह्मोस की तीन रेजिमेंटों को पहले ही शामिल कर लिया है। सभी मिसाइल के ब्लॉक-III संस्करण से लैस हैं।
भारतीय सेना में ब्रह्मोस के जमीनी हमले करने वाला संस्करण 2007 से इस्तेमाल किया जा रहा है।
मिसाइल में की खासियत है कि इस चलाने देने के बाद यह खुद-ब-खुद ऊपर और नीचे की उड़ान भरकर जमीन के लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है। इस तरह यह दुश्मन के वायु रक्षा प्रणालियों से बच निकलती है।