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Climate Change: भारत ने 33 फीसदी घटाया ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन, धरती को गर्म होने से रोकने में अहम योगदान

Thu, 10 Aug 2023 05:14 AM IST
गुलाम अहमद एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Published by: गुलाम अहमद Updated Thu, 10 Aug 2023 05:14 AM IST
सार

रिपोर्ट के मुताबिक, 2014-16 के बीच ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन सालाना 1.5 फीसदी की दर से घट रहा था। वहीं, 2016-19 के बीच यह तीन फीसदी की रफ्तार से घटने लगा है। यानी कमी की रफ्तार तेज हुई है। यह लगातार और भी तेज हो रही है।
 

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India succeeds in reducing greenhouse emissions rate by more than 33 percent in 14 years
ग्रीन हाउस गैस - फोटो : PTI

विस्तार

पृथ्वी को गर्म होने से बचाने और जलवायु परिवर्तन रोकने में महत्वपूर्ण योगदान देते हुए भारत ने ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन महज 14 साल में 33 फीसदी घटा लिया है। संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क सम्मेलन (यूएनएफसीसीसी) में तय लक्ष्य के अनुसार, इसे साल 2005 के मुकाबले साल 2030 तक 45 फीसदी घटाया जाना है। भारत इस लक्ष्य के बेहद करीब पहुंच गया है। यह आंकड़े सरकार द्वारा यूएन को भेजे जाएंगे।

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इसे लेकर बनी तृतीय राष्ट्रीय संचार (टीएनसी) रिपोर्ट की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया कि 2005 के मुकाबले 2019 तक भारत की जीडीपी में प्रति यूनिट इजाफे के लिए कुल ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन में 33 फीसदी की कमी आई है। इसे उत्सर्जन तीव्रता कहा जाता है। यह बताती है कि आर्थिक प्रगति के लिए कितना उत्सर्जन हो रहा है। सभी देश उत्सर्जन घटाने के लिए अपने यहां किए काम बताने के लिए टीएनसी रिपोर्ट तैयार करवा रहे हैं। भारत में यह रिपोर्ट केंद्रीय कैबिनेट को भेजी जाएगी, जहां से पारित होने पर इसे यूएन को भेजा जाएगा।
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तेज हुई घटने की रफ्तार भी
रिपोर्ट ने एक खास बात यह भी बताई कि 2014-16 के बीच ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन सालाना 1.5 फीसदी की दर से घट रहा था। वहीं, 2016-19 के बीच यह तीन फीसदी की रफ्तार से घटने लगा है। यानी कमी की रफ्तार तेज हुई है। यह लगातार और भी तेज हो रही है।
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आर्थिक प्रगति व उत्सर्जन में जोड़ को तोड़ा
एक अधिकारी ने दावा किया कि उत्सर्जन घटने के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था बढ़ रही है। यह संकेत है कि हमने उत्सर्जन और आर्थिक प्रगति के आपसी जोड़ को तोड़ दिया है।

दबाव नहीं डाल पाएंगे दूसरे देश
विशेषज्ञों के अनुसार बीते कुछ वर्षों में भारत की ओर से कोयले से बिजली उत्पादन को लेकर विकसित देशों में आलोचना की जा रही है। अब ये देश इसके लिए हम पर दबाव नहीं डाल पाएंगे, क्योंकि हम उत्सर्जन घटाने के लिए तय लक्ष्य को कहीं पहले हासिल करते नजर आ रहे हैं।


ऐसे मिली सफलता

  • विशेषज्ञों के अनुसार, यह सफलता अक्षय ऊर्जा उत्पादन व वन आवरण में वृद्धि से मिली है।
  • वन आवरण 2019 तक 24.56% पहुंच गया है, यह आंकड़े में 8.07 हेक्टेयर है।
  • सबसे अहम वजह केंद्रीय बिजली प्राधिकरण के आंकड़ों में है जो बताते हैं कि बिजली उत्पादन में गैर-जीवाश्म ऊर्जा के स्रोतों का योगदान 24.6% से बढ़कर 25.3% हो गया है।
  • इसी दौरान कोयले से बिजली बनाने वाले तापीय बिजलीघरों से योगदान 75% से घटकर 73% पर आ गया है।  
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