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सुधार: भारतीय जलाशयों का जलस्तर पिछले साल की तुलना में बेहतर, सामान्य जल संग्रहण से 14 फीसदी की वृद्धि
Tue, 08 Oct 2024 04:24 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो/नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो/नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Tue, 08 Oct 2024 04:24 AM IST
सार
केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के बुलेटिन में कहा गया है कि देशभर में 86 जलाशय ऐसे हैं, जिनकी पिछले वर्ष की तुलना में जल संग्रहण क्षमता का स्तर बढ़ा है और 123 जलाशय अपनी सामान्य क्षमता से अधिक जल संग्रहण कर रहे हैं। 2024 के आंकड़े पिछले वर्ष के स्तर की तुलना में 18 फीसदी अधिक हैं। यह सामान्य जल संग्रहण से 14 फीसदी वृद्धि दर्शाते हैं।
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लेह जलाशय
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
भारत के जलाशयों का जलस्तर पिछले साल की तुलना में बेहतर रहा है। हालांकि, उत्तरी क्षेत्र में इसके स्तर में गिरावट आई है। कुल 155 जलाशयों में कुल क्षमता का 88 फीसदी पानी भरा हुआ है, जो कि सामान्य जल संग्रहण स्तर से 14 फीसदी अधिक है। यह पिछले वर्ष की इसी अवधि के भंडारण स्तर 134.056 बीसीएम और सामान्य 10 साल के औसत भंडारण 139.114 बीसीएम की तुलना में एक उल्लेखनीय सुधार है।
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केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के बुलेटिन में कहा गया है कि देशभर में 86 जलाशय ऐसे हैं, जिनकी पिछले वर्ष की तुलना में जल संग्रहण क्षमता का स्तर बढ़ा है और 123 जलाशय अपनी सामान्य क्षमता से अधिक जल संग्रहण कर रहे हैं। 2024 के आंकड़े पिछले वर्ष के स्तर की तुलना में 18 फीसदी अधिक हैं। यह सामान्य जल संग्रहण से 14 फीसदी वृद्धि दर्शाते हैं। हालांकि, देशभर में जल संग्रहण स्तर अधिक होने के बाजवूद क्षेत्रीय भिन्नताएं हैं। पश्चिमी क्षेत्र ने सबसे मजबूत जल संग्रहण के आंकड़े दर्ज किए हैं। यहां कुल जल संग्रहण क्षमता का 97 फीसदी पहले ही भर चुका है। यह पिछले वर्ष के 89 फीसदी से काफी अधिक है। इस क्षेत्र में गुजरात, महाराष्ट्र और गोवा शामिल हैं। केंद्र क्षेत्र जिसमें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ शामिल हैं, यहां जलाशयों में जल संग्रहण क्षमता का स्तर घटा है। पूर्वी क्षेत्र जिसमें असम, ओडिशा और बिहार जैसे राज्य शामिल हैं। यहां जल संग्रहण क्षमता का स्तर 86 फीसदी दर्ज किया गया है, जो कि पिछले वर्ष के 77 फीसदी से अधिक है।
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दुनियाभर की प्रमुख नदियों का प्रवाह घटा
2023 में भारत सहित दुनियाभर की प्रमुख नदियों का जलस्तर 33 वर्ष बाद सबसे कम रहा। इसकी वजह से टकराव की घटनाएं भी बढ़ रही हैं, जो चिंताजनक है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) की स्टेट ऑफ ग्लोबल वॉटर रिसोर्सेज नामक रिपोर्ट में कहा गया है कि 2023 में अधिकतर नदियों का जल स्तर सामान्य से कहीं बहुत अधिक कम रहा। 2021 और 2022 की तरह ही पिछले साल दुनिया की 50 फीसदी से अधिक नदी क्षेत्रों में स्थिति असामान्य रही। एशिया और ओशिनिया में भी गंगा, ब्रह्मपुत्र और मेकांग नदी के अधिकतर क्षेत्रों में सामान्य से कम पानी देखा गया।
बर्फ पिघलने से बढ़ेंगी मुश्किलें
जैसे-जैसे आने वाले दशकों में ग्लेशियर और बर्फ की चादरें घटती जाएंगी सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र जैसी प्रमुख हिमालयी नदियों पर इसका सीधा विपरीत प्रभाव दिखाई देगा। उनका प्रवाह कम हो जाएगा। गंगा, ब्रह्मपुत्र और सिंधु सहित दस प्रमुख नदियां हिमालयीन क्षेत्र से निकलती हैं और इसके जलक्षेत्र में लगभग एक अरब 30 करोड़ लोगों की जरूरतें पूरी होती हैं। गंगा-ब्रह्मपुत्र-मेघना नदी डेल्टा लगातार एशिया का सबसे असुरक्षित डेल्टा बना हुआ है। समुद्र के बढ़ते स्तर और समुद्री जल की घुसपैठ नदी डेल्टा के बड़े हिस्से को नष्ट कर रही है।
अत्यधिक और अल्प बारिश घटा रहा भूजल स्तर
बढ़ते तापमान के कारण दुनिया का जलचक्र का संतुलन बिगड़ रहा है। दुनियाभर में लोग बहुत ज्यादा पानी या बहुत कमी जैसी स्थितियों का सामना कर रहे हैं। इनमें अप्रत्याशित बारिश, बाढ़ और सूखा जैसी घटनाएं शामिल हैं।