बेहद कठिन हुई कोहिनूर के भारत आने की संभावना, जानिए वजह
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भारत जहां सुप्रीम कोर्ट में कोहिनूर को वापस लाने के बारे नए सिरे से अपील करने जा रहा है, वहीं ब्रिटेन ने भारत के दावे को कानूनी तौर पर कमजोर करार दिया है।
ब्रिटानी सरकार में एशिया और पैसेफिक अफेयर्स मंत्री अलोक शर्मा का कहना है कि ब्रिटानी सरकार का कोहिनूर को लेकर मानना है कि कानूनी तौर पर कोई आधार नहीं बनता है कि जिससे हीरे को लौटाया जाए।
सूत्रों के अनुसार सरकार आगामी 15 अगस्त से पहले सुप्रीम कोर्ट में कोहिनूर को वापस लाने के लिए नई अपील पेश कर सकती है। साथ ही अब कानूनी के बजाय भारत डिप्लोमैटिक चैनल का उपयोग कर 108 कैरेट के इस हीरे को वापस लाने की कवायद में जुटेगा।
थेरेसा के एजेंडे में नहीं है कोहिनूर हीरे लौटाना
भारत दौरे पर पहुंचे आलोक शर्मा का कहना है कि वह भारत और यूके के बीच रिश्तों को मजबूत करने के उद्देश्य से आए हैं ताकि दोनों देशों के बीच कारोबारी रिश्ते और मजबूत हो सकें। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री थेरेसा के एजेंडे में भारत को कीमती वस्तुएं लौटाना प्राथमिकता में नहीं है।
गौरतलब है कि पिछले हफ्ते ही कोहिनूर को वापस लाने के लिए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा ने 45 मिनट तक बैठक कर नई रणनीति बनायी है। आजादी से पहले का मामला होने के कारण आयी कानूनी अड़चनों के कारण ही अबतक सरकार कोहिनूर वापस लाने में असमर्थ रही है।
उल्लेखनीय है कि अप्रैल में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी थी कि कोहिनूर को ब्रिटानी सरकार ने न ही जबरदस्ती लिया था न ही चुराया था,उसे पंजाब के शासकों ने तोहफे के तौर पर दिया था। ब्रिटेन की राय जानने के बाद सरकार का कहना है कि हीरे को लाने के लिए हर मुमकिन कोशिश की जाएगी। ऐतिहासिक महत्ता वाले कोहिनूर पर भारत के अलावा तीन और देशों में दावा किया है।