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Fight Against Malaria: भारत में 2015 के बाद मलेरिया के मामलो में 86 फीसदी की गिरावट, रिपोर्ट में दावा- मौतें भी 79% कम

Wed, 22 Jun 2022 06:21 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Wed, 22 Jun 2022 06:21 PM IST
सार

रिपोर्ट में कहा गया है कि मलेरिया की प्रभावी रिपोर्टिंग में निजी क्षेत्र की भागीदारी, बिना लक्षण वाले या छिपे हुए मलेरिया के मामलों का पता लगाना, बेहतर रीयल-टाइम केस रिपोर्टिंग और तकनीकी नवाचार ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें अधिक काम करने की आवश्यकता है।
 

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India reports 86 percent fall in cases since 2015 and 79 percent reduction in deaths due to Malaria
विश्व मलेरिया दिवस 2022 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मलेरिया से लड़ाई में भारत को सफलता मिल रही है। ये दावा एक गैर लाभकारी संगठन मलेरिया नो मोर ने अपनी एक रिपोर्ट में किया है। 'मलेरिया नो मोर' ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारत में 2015 के बाद से मलेरिया के मामलों में 86 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है। इसके साथ ही 2015 तथा 2021 के बीच इससे होने वाली मौतों की संख्या में 79 प्रतिशत की कमी आई है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि मलेरिया के खिलाफ लड़ाई में इस सफलता के पीछे लंबे समय तक चलाया जाने वाला अभियान भी रहा है। इस दौरान नौ करोड़  से ज्यादा मूल्य के कीटनाशक वितरित किए गए। इनमें से 4.8 करोड़ रुपये के कीटनाशक 2019 और 2021 के बीच वितरित किए गए थे।

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'मलेरिया उन्मूलन की दिशा में भारत का सफर' शीर्षक से प्रकाशित हुई है रिपोर्ट
गैर लाभकारी संगठन मलेरिया नो मोर ने 'मलेरिया उन्मूलन की दिशा में भारत का सफर' इस शीर्षक से एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। इसमें बताया गया है कि 2017 से 2019 के बीच मलेरिया से लड़ने के लिए भारत सरकार द्वारा आवंटित किए जाने वाले बजट में दोगुने से ज्यादा कि बढ़ोतरी की गई। इसके साथ ही 31 राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों में मलेरिया के बारे जानकारी देना जरूरी बना दिया गया। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार का लक्ष्य 2030 तक देश से मलेरिया को खत्म करना है। इसके लिए कुछ महत्वपूर्ण चुनौतियों का समाधान किया जाना बाकी है, जिसमें बीमारी के खिलाफ संयुक्त लड़ाई में निजी क्षेत्र, व्यक्तियों और समुदायों की अधिक भागीदारी शामिल है।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि मलेरिया की प्रभावी रिपोर्टिंग में निजी क्षेत्र की भागीदारी, बिना लक्षण वाले या छिपे हुए मलेरिया के मामलों का पता लगाना, बेहतर रीयल-टाइम केस रिपोर्टिंग और तकनीकी नवाचार ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें अधिक काम करने की आवश्यकता है।
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सरकार को और ध्यान देने की जरूरत
मलेरिया नो मोर के कंट्री डायरेक्टर प्रतीक कुमार ने बुधवार को यहां मलेरिया पर आयोजित एक मीडिया सेंसिटाइजेशन वर्कशॉप को संबोधित करते हुए कहा कि भारत में मलेरिया को एक गरीब आदमी की बीमारी के रूप में माना जाता है, इस प्रकार सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंडे में इसे कम प्राथमिकता दी जाती है। इसके लिए सरकार को और भी ज्यादा ध्यान देते हुए कारर्वाई करने की जरूरत है। 


उन्होंने आगे कहा हालांकि, यह महत्वाकांक्षी लक्ष्य केवल सरकार द्वारा प्राप्त नहीं किया जा सकता है। इसके लिए समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी और समर्थन की आवश्यकता है।  2030 तक भारत से मलेरिया को खत्म करने के प्रयास में सभी हाथ शामिल हों ताकि भारत देश से बीमारी को खत्म करने के लक्ष्य को प्राप्त कर सकें। इस मौके पर ओडिशा में  मलेरिया नो मोर के मुख्य तकनीकी अधिकारी कीर्ति मिश्रा ने कहा कि मलेरिया के खिलाफ लड़ाई ने हाल के वर्षों में काफी प्रगति दर्ज की है। 

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