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भारत ने ठुकराया पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे से सैनिकों को हटाने का चीन का प्रस्ताव
Fri, 25 Sep 2020 11:03 PM IST
गौरव पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Fri, 25 Sep 2020 11:03 PM IST
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भारत चीन गतिरोध
- फोटो : iStock
भारत और चीन के बीच हाल ही में हुई सैन्य वार्ताओं में चीनी की सेना ने पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे से सैनिकों को पीछे हटाने की प्रक्रिया शुरू करने पर जोर दिया था। लेकिन, भारतीय सेना ने साफ कहा है कि पूर्वी लद्दाख में तनाव को समाप्त करने के लिए संघर्ष के सभी स्थानों पर एक साथ कदम उठाए जाने चाहिए। सूत्रों ने यह जानकारी शुक्रवार को दी। बता दें कि दोनों देशों के बीच पिछले तीन महीने से ज्यादा समय से सीमा विवाद को लेकर तनाव चल रहा है।
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सूत्रों ने कहा कि बैठक के दौरान दोनों देशों की सेनाओं के बीच विवाद के मुद्दों पर बात की गई। लेकिन, दोनों ही पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि बातचीत जारी रखते हुए विश्वास बहाली और अप्रैल की स्थिति में वापस जाने का रास्ता निकाला जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक बैठक में दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि पूर्वी लद्दाख में स्थिति बिगड़ने न पाए। दोनों पक्षों ने कहा कि तनाव न बढ़ने को लेकर दोनों एकमत हैं।
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भारतीय पक्ष ने चीन से यह भी कहा कि डिसइंगेजमेंट को लेकर वार्ताओं में डेपसांग समेत वो सभी स्थान शामिल होने चाहिए जहां दोनों सेनाओं के बीच झड़प हुई हैं। सूत्रों ने बताया कि भारतीय पक्ष ने जोर देते हुए कहा कि यह प्रक्रिया सभी स्थानों पर एक साथ शुरू होनी चाहिए, न कि कुछ चयनित स्थानों पर। भारत ने कहा कि चूंकि मई में चीन की आक्रामकता के चलते गतिरोध शुरू हुआ था, इसलिए पहले उन्हें सैनिकों को पीछे हटाने की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए।
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भारत ने स्पष्ट किया कि वह अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्ध है। भारत ने कहा कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के किसी भी आक्रामक व्यवहार का या उकसाने वाली कार्रवाई का पूरी मजबूती से जवाब दिया जाएगा। जून मध्य में गलवां घाटी में हुई झड़प के बाद भारत सरकार ने सेना को चीन की किसी भी कार्रवाई का भरपूर जवाब देने की स्वतंत्रता दे दी थी। तब से भारत ने इन इलाकों में सैन्य तैनाती भी बढ़ाई है।