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ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में 52वें स्थान पर पहुंचा भारत, आईटी का शानदार प्रदर्शन बरकरार

Thu, 25 Jul 2019 03:14 PM IST
गौरव द्विवेदी डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव द्विवेदी Updated Thu, 25 Jul 2019 03:14 PM IST
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India ranks 52nd in Global Innovation Index, spectacular performance in IT
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स 2019 (Global Innovation Index 2019) की ताजा रिपोर्ट में भारत इनोवेशन के मामले में विश्व में 52वें स्थान पर पहुंच गया है। वर्ष 2018 में यह 57वें स्थान पर था। इससे स्पष्ट है कि भारत ने नवाचार या इनोवेशन के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण प्रगति की है। इनफार्मेशन टेक्नॉलॉजी सर्विस एक्सपोर्ट क्षेत्र में देश लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने समग्र रूप में कई महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में अच्छी प्रगति की है। यहां माध्यमिक शिक्षा से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक की शिक्षा ग्रहण करने वाले कुल छात्रों के मामले में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। साइंस और इंजीनियरिंग शिक्षा में ग्रेजुएट तैयार करने के मामले में महत्त्वपूर्ण प्रगति हुई है। बंगलोर, मुंबई और दिल्ली तकनीकी शिक्षा के मायने में शीर्ष पर बने हुए हैं। 

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ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स (जीआईआई) की ताजा सूची में स्वीटजरलैंड पहले स्थान पर है। स्वीडेन, अमेरिका और नीदरलैंड इसके बाद आते हैं। इस रिपोर्ट को बुधवार को दिल्ली में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी आर्गेनाईजेशन के प्रमुख फ्रांसिस गरी के द्वारा जारी किया गया।
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जीआईआई रिपोर्ट 2019 के प्रमुख बिंदु

- क्षेत्र के हिसाब से उत्तरी अमेरिका नवाचार के मामले में शीर्ष पर है, जबकि उच्च आयवर्ग के मामले में स्विट्जरलैंड पहले स्थान पर है। उच्च-मध्य आय वर्ग की श्रेणी में चीन सबसे अधिक नवाचार कर रहा है।
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- दक्षिण-पूर्व एशिया में सिंगापुर नवाचार में पहले स्थान पर है। 

- विश्व की आर्थिक स्थिति में कुछ कमी के बावजूद नवाचार तेजी से बढ़ा है, लेकिन इसके सामने कई गंभीर खतरे भी उत्पन्न हुए हैं जो नवाचार की तेज रफ्तार को रोक सकते हैं। 

- वर्ष 2000 के मुकाबले रिसर्च एंड डेवलपमेंट में अभी भी भारी गिरावट है। 

- चीन (इस वर्ष श्रेणी में 14वें स्थान पर) और इजरायल इस सूची में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। 

- नवाचार के मामले में मध्य आय वर्ग वाले देशों में तीन शीर्ष विश्वविद्यालय चीन से हैं, जबकि आठवें नंबर पर आईआईटी बाम्बे, नवें नंबर पर आईआईएससी बंगलूरू और दसवें नंबर पर आईआईटी दिल्ली है। 

जीआईआई की रिपोर्ट 2015 और 2016 के आधार पर

हालांकि, गुणवत्ता के मामले में यह खबर बहुत संतोषदायक नहीं है क्योंकि नये आविष्कार करने और शोध करने के मामले में भारत बहुत पिछड़ा हुआ है। इसको इस बात से भी समझा जा सकता है कि भारत क्रिएटिव आउटपुट (रचनात्मक उत्पादन) देने के मामले में भारत 94वें स्थान पर है, जबकि इसी सूची में चीन 30, रूस 66, दक्षिण अफ्रीका 77, ब्राजील 90वें पायदान पर हैं। श्रीलंका और ईरान भी इस मामले में भारत से आगे हैं जो इसी सूची में क्रमशः 84वें और 75वें स्थान पर हैं। 

भारत में राजनीतिक वातावरण पहले के मुकाबले ज्यादा सकारात्मक हुआ है। इस मामले में यह 109वें स्थान से सुधार करते हुए 98वें स्थान पर पहुंच गया है। बिजनेस करने के लिए सकारात्मक माहौल बनाने के मामले में भी भारत ने प्रगति की है। इस मामले में यह 130वें स्थान से ऊपर उठकर 117वें स्थान पर पहुंच गया है। शिक्षा देने के मामले में भारत 126वें स्थान से 118वें स्थान पर पहुंचा है। रिसर्च एंड डेवलपमेंट के मामले में 123वें स्थान से 67वें स्थान पर पहुंचा है। टैक्स देने की प्रक्रिया में भी भारत 120वें स्थान से सुधार करते हुए 109वें स्थान पर पहुंच गया है। निवेश के मामले में भी भारत 42वें स्थान से ऊपर उठकर 30वें स्थान पर पहुंच गया है। 
 

इन क्षेत्रों में पिछड़ा है भारत

बड़ी आबादी, संसाधनों का कम उचित दोहन और अपेक्षाकृत कम प्रशिक्षित मानव श्रम के कारण भारत कई क्षेत्रों में अभी भी बहुत पिछड़ा हुआ है जहां सुधार की बहुत अधिक जरूरत महसूस की जा रही है। इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में भारत ब्रिक्स देशों में सबसे पीछे है। चीन इनमें सबसे आगे है जो इंफ्रास्ट्रक्चर इंडेक्स पर 36वें स्थान पर है, जबकि ब्राजील 59वें, रूस 60वें, दक्षिण अफ्रीका 85वें और भारत 87वें स्थान पर है। इसी इंडेक्स पर भारत श्रीलंका जैसे देश से भी पिछड़ा हुआ है जो 58वें स्थान पर है।

छात्र बढ़े, धनराशि घटी

भारत के भविष्य के लिहाज से यह खबर अच्छी नहीं कही जा सकती कि केंद्र सरकार ने शिक्षा के मद में धनराशि खर्च करने में कटौती की है। शिक्षा पर धन खर्च करने के मामले में भारत एक स्थान और नीचे खिसक गया है। 2015 के 82वें स्थान की बजाय 2016 में यह 83वें स्थान पर पहुंच गया है। शिक्षक और छात्र के अनुपात में भी गिरावट आई है। इस मामले में भारत 97वें स्थान से 103वें स्थान पर पहुंच गया है। शोधकर्ताओं की संख्या में भी गिरावट हुई है। वर्ष 2015 के 75वें स्थान के मुकाबले अब भारत इस सूची में 77वें स्थान पर है। पेटेंट कराने के मामले में भी भारत में गिरावट दर्ज हुई है। भारत पेटेंट कराने के मामले में विश्व में 54वें स्थान पर है। मनोरंजन के क्षेत्र में मीडिया का कारोबार भी कम होता दर्ज किया गया है। भारत अब इस क्षेत्र में खर्च करने वाली सूची में 59वें स्थान पर है। भारत सरकार के डिजिटल मीडिया के बहुत प्रचार के बाद भी ऑनलाइन क्रिएटिविटी के मामले में तेज गिरावट दर्ज की गई है। भारत इस सूची में 78वें स्थान से गिरकर 101वें स्थान पर पहुंच गया है। 

रिपोर्ट का आधार

ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स विश्व के महत्त्वपूर्ण देशों की आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक घटनाओं पर कड़ी नजर रखकर तैयार की जाती है। इसके लिए विश्व बैंक, यूनिसेफ, वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन जैसी 30 महत्त्वपूर्ण संस्थाओं की रिपोर्ट-आंकड़े के विश्लेषण के आधार पर 82 मानकों पर तय की जाती है। सूची में जिन 128 देशों को शामिल किया गया है, वे (रिपोर्ट 2015-16 के दौरान) विश्व जनसंख्या की 92 फीसदी की हिस्सेदारी रखते हैं। इन देशों का सकल घरेलू उत्पाद पूरे विश्व का लगभग 98 फीसदी है। रिपोर्ट कोर्नेल यूनिवर्सिटी के माध्यम से प्रकाशित किया जाता है।

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