कैडेवर डोनेशन में भारत विश्व के कई छोटे देशों से भी पीछे
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नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (नोटो) के मुताबिक वर्ष-1995 से 2014 तक 14,353 लोगों ने अंगदान किया जिसमें से कैडेवर डोनर की संख्या 315 ही थी। हालांकि पिछले दो वर्ष में कैडेवर डोनेशन के मामलों में कुछ और वृद्धि हुई है।
कैडेवर डोनेशन के मामले में भारत नॉर्वे, इटली, लीबिया, लंदन, पोलैंड, हंगरी, क्यूबा, इरान, कुवैत जैसे छोटे देशों से भी काफी पीछे है। स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि अंगदान खास कर कैडेवर डोनेशन को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर नोटो के अलावा क्षेत्रिय स्तर पर पांच रिजनल ऑर्गन एंड टिश्यू टांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (रोटो) तैयार किए गए हैं।
हर साल 2 लाख मरीजों का लिवर होता है फेल
फिलहाल सभी रोटो को ट्रेनिंग दी जा रही है और कैडेवर डोनेशन के अलावा लाइव डोनेशन को भी बढ़ावा देने के लिए नोटो के साथ मिलकर काम करने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए पिछले दिनों चेन्नई में एक बैठक भी हुई थी।
नोटो के अनुसार वर्ष-1995 से वर्ष-2014 तक कुल 14,353 डोनेशन हुए जिसमें 14,038 लाइव डोनर थे जबकि 315 कैडेवर। हालांकि यह आंकड़ा पूरे देश का नहीं है क्योंकि वर्ष-2014 तक सभी अस्पतालों में से अंगदान की सूचना नोटो को नहीं दी जा रही थी। देश में प्रति वर्ष दो लाख किडनी प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती है लेकिन छह से सात हजार ही हो पाते हैं।
देश में दो लाख मरीजों के लिवर प्रति वर्ष फेल होते हैं। इनमें से 15 से 20 फीसदी की जान बचाई जा सकती है लेकिन 1500 से 1600 लिवर प्रत्यारोपण ही हो पा रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक भारत में अंग के इंतजार में 90 फीसदी लोगों की मौत हो जाती है।