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सेना के इंजीनियर इन चीफ बोले: बुनियादी ढांचे में क्रांति की कगार पर भारत, अपनाए जा रहे विशिष्ट तरीके
Thu, 22 Sep 2022 04:50 PM IST
Amit Mandal
एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Thu, 22 Sep 2022 04:50 PM IST
सार
सिंह ने कहा कि ये पहल रेलवे और राजमार्ग सहित 16 मंत्रालयों को एकीकृत योजना और बुनियादी ढांचा कनेक्टिविटी परियोजनाओं के समन्वित कार्यान्वयन के लिए एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाई गई है।
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इंजीनियर इन चीफ हरपाल सिंह
- फोटो : ANI
विस्तार
अब सेना परिचालन उपयोग के लिए अपने भवनों के निर्माण हेतु उच्च-ऊर्जा प्रौद्योगिकी का उपयोग कर रही है। भारतीय सेना के सर्वोच्च इंजीनियरिंग अधिकारी ने बुधवार को कहा कि देश इस क्षेत्र के विकास के मद्देनजर बुनियादी ढांचे में क्रांति के कगार पर है। गोवा में एक कॉन्क्लेव में बोलते हुए भारतीय सेना के इंजीनियर इन चीफ लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह ने कहा कि भारतीय सेना के कोर ऑफ इंजीनियर्स की एक बुनियादी ढांचा शाखा मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज तेजी से और गुणवत्तापूर्ण निर्माण के लिए विशिष्ट तकनीकों को अपना रही है।
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भारतमाला, सागरमाला, अंतर्देशीय जल परिवहन जैसे प्रोजेक्ट पर काम
उन्होंने कहा, सैनिकों के लिए भारत का पहला 3डी कंक्रीट प्रिंटेड स्थायी विवाहित आवास तीन सप्ताह के भीतर मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस द्वारा एक स्टार्ट-अप चुनकर बनाया गया था। इस तरह के और प्रयास किए जा रहे हैं। सिंह ने कहा कि ये पहल रेलवे और राजमार्ग सहित 16 मंत्रालयों को एकीकृत योजना और बुनियादी ढांचा कनेक्टिविटी परियोजनाओं के समन्वित कार्यान्वयन के लिए एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाई गई है। इस पहल में भारतमाला, सागरमाला, अंतर्देशीय जल परिवहन, शुष्क/भूमि बंदरगाहों, उड़ान आदि जैसे विभिन्न मंत्रालयों और राज्य सरकारों की बुनियादी ढांचा योजनाएं शामिल होंगी। इसलिए, हम देख सकते हैं कि हम पहले से ही एक बुनियादी क्रांति के कगार पर हैं।
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अपशिष्ट से प्लास्टिक सड़क बनाई जा रही
अपशिष्ट प्रबंधन के मुद्दे पर बोलते हुए सिंह ने कहा कि घरेलू और औद्योगिक कचरे की लगातार बढ़ती मात्रा और जटिलता और स्वास्थ्य और पर्यावरण पर उनके प्रभाव के कारण यह आधुनिक समाज की प्रमुख समस्याओं में से एक है। इस क्षेत्र में कुछ नई पहलों में अपशिष्ट स्तर सेंसर और एआई-आधारित रोबोट रीसाइक्लिंग पद्धतियां, साथ ही सौर ऊर्जा संचालित कचरा कम्पेक्टर इत्यादि भी हैं। हम अपशिष्ट पुनर्नवीनीकरण कंक्रीट, अपशिष्ट प्लास्टिक के साथ सड़क बनाने आदि के साथ-साथ प्लाज्मा गैसीकरण भी अपना रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि प्लास्टिक प्रदूषण एक गंभीर समस्या है जिससे सभी को अवगत कराया जा सकता है और हमारे सिविल इंजीनियर समाधान खोजने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसा ही एक विचार सड़क बनाने में प्लास्टिक कचरे का उपयोग करना है। भारत ने इस विचार का परीक्षण भी शुरू कर दिया है और प्लास्टिक की सड़कें बनाईं। उन्होंने कहा कि हालांकि, माइक्रोप्लास्टिक्स और इस तथ्य के बारे में चिंताएं हैं कि वे मिट्टी में मिल जाएंगे और इसे प्रदूषित करेंगे, पारिस्थितिक तंत्र को नुकसान पहुंचाएंगे। बेहतर एप्लिकेशन और एकीकरण के साथ हालांकि यह अवधारणा एक बड़ा गेम-चेंजर हो सकती है।