पुलवामा के बाद भारत किसी के सामने नहीं गिड़गिड़ाया
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पुलवामा में सीआरपीएफ काफिले पर हमला और उसके बाद 26 फरवरी को एयरस्ट्राइक आपरेशन बालाकोट-2019 के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत किसी के सामने गिड़गिड़ाने नहीं गया। केन्द्र सरकार के उच्चपदस्थ सूत्र कहते हैं कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान को लेकर कोई भ्रम नहीं फैलना चाहिए।
भारत ने इसको लेकर किसी से मथ्यस्थता या सहयोग की अपील नहीं की है। भारत को पता है कि उसे पाकिस्तान से आतंकवाद के नाम पर मिल रही इस छद्मयुद्ध की चुनौती से अकेले लडना पड़ेगा।
क्यों गए और क्या कहा यूएनएससी के स्थायी सदस्य समेत अन्य से
भारत का कहना है कि पुलवामा के बाद हमने दुनिया को पाकिस्तान का सच बताया। उन्हें बताया कि पाकिस्तान में कैसे भारत विरोधी गतिविधियां चल रही हैं, कैसे पाकिस्तान की सरकार संरक्षण दे रही है और इसमें वहां के सरकारी विभाग शामिल हैं। जबकि पाकिस्तान ने लगातार आश्वासन दिया है कि वह अपनी जमीन से आतंकविरोधी गतिविधियों को नहीं चलने देगा।
सूत्र का कहना है कि अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और रूस समेत अन्य से हमने वास्तविकता बताकर पाकिस्तान को समझाने की अपील की। भारत ने आतंकवाद के विरूद्ध पाकिस्तान पर ठोस कार्रवाई के कूटनीति दबाव के लिए ऐसा किया। सूत्र का कहना है कि आपरेशन बालाकोट के बाद भी भारत ने दुनिया के देशों को केवल पाकिस्तान की करतूत बताई।
पाकिस्तान गिड़गिड़ाया
उच्चपदस्थ सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान दुनिया के सामने गिड़गिड़ाया। उसने मध्यस्थता चाही, लेकिन किसी भी देश ने भारत से सफाई नहीं मांगी। राजनयिकों का कहना है कि पाकिस्तान का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिकार्ड अच्छा नहीं है।
वहीं विश्वसनीयता को लेकर भारत के अंतरराष्ट्रीय पर कोई अंगुली नहीं उठा सकता। यही वजह रही कि अबू धाबी में ओआईसी (इस्लामिक देशों के संगठन) में भारत पचास साल बाद पहली बार शरीक हुआ, लेकिन हमें ओआईसी का साथ मिला। आतंकवाद के विरुद्ध सख्तप्रस्ताव पारित हुआ और वहां भी पाकिस्तान को झटका लगा।